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अनिवार्य

सामान्य

अनासक्ति

महिमावंत है तू, हे मेरे ईश्वर! धन्यवाद देता हूँ मैं तुझे कि तू ने मुझे उसका ज्ञान कराया, जो तुम्हारी दया का आदिस्त्रोत है, जो तुम्हारी अनुकम्पा का आदिस्थल है और जो है तुम्हारे धर्म का कोषागार। जिस नाम के स्मरण मात्र से उनके चेहरे दीप्तिमान हो उठते हैं, जो तुम्हारे समीप हैं और उनके हृदय-पखेरू तुम तक पहुँचने के लिये आकुल-व्याकुल हो उठते हैं, जो तुम्हारे भक्त हैं।

मैं तुम्हारे उस नाम के सहारे याचना करता हूँ कि यह वर दे कि हर पल, हर परिस्थिति में तुम्हारी डोर थामे रहूँ और तुम्हें छोड़कर अन्य सबकी आसक्ति से मुक्त हो जाऊँ और तुम्हारे प्रकटीकरण की ओर एकटक देखता रहूँ और तुमने अपनी पातियों में जो विहित किया है उनका अनुपालन कर सकूँ। हे मेरे ईश्वर! मेरे बाह्य और अन्तर्मन को अपनी अनुकम्पा और प्रेममय दया के परिधान से आभूषित कर। मुझे सुरक्षित रख और तुम्हें जो कुछ भी अप्रिय है उनसे दूर रख और अपनी आज्ञाओं के अनुपालन में कृपापूर्वक मेरी और मेरे प्रियजनों की सहायता कर और मेरे अंदर जो भी विषय-प्रवृत्ति और दुष्काम भाव हैं उन पर विजय पाने में मेरी सहायता कर।

तू सत्य ही, समस्त मानवजाति का स्वामी है। तेरे अतिरिक्त अन्य कोई ईश्वर नहीं, तू ही है सर्वज्ञ, सर्वप्रज्ञ।

#8218
- बहाउल्लाह

 

हे ईश्वर! मेरे ईश्वर मुझे अपने निकट बुला, अपने दरबार की पवित्र परिधि में रहने दे, तुझसे दूर रहकर मैं निष्प्राण हो गया हूँ; अपने अनुग्रह के पंखों की छाया तले विश्राम करने दे, तुझसे वियोग की ज्वाला ने मेरे हृदय को विह्वल कर दिया है। बुला ले मुझे, उस सरिता के निकट जो सत्य ही जीवन है। निरंतर तेरी खोज में मेरी आत्मा प्यास से दग्ध हो गई है। हे मेरे ईश्वर! मेरी आहें, मेरी वेदना की तीक्ष्णता और मेरे आँसू तेरे प्रति मेरे प्रेम के प्रतीक हैं। उस गुणगान के माध्यम से जिसका बखान तू ने किया, मैं याचना करता हूँ, ऐसी अनुकम्पा कर कि मैं उन लोगों में गिना जाऊँ जिन्होंने तेरे दिवस में तुझे पहचाना है और तेरी सम्प्रभुता स्वीकार की है। हे मेरे ईश्वर! अपनी प्रेममय दयालुता के जीवंत जल का अपनी दया के करों से पान करने में सहायता कर, ताकि मैं तुझे छोड़, पूरी तरह बिसरा दूँ सब कुछ और पूरी तरह तुझमें ही रम जाऊँ। तू जो चाहे करने में समर्थ है। तेरे अतिरिक्त अन्य कोई ईश्वर नहीं, संकट में सहायक, स्वयंभू। तू है सर्वशक्तिमान; हे तू, जो सभी सम्राटों का सम्राट है, तेरी महिमा का गुणगान हो।

#8219
- बहाउल्लाह

 

जयघोष हो तुम्हारे नाम का, हे मेरे ईश्वर! तुम्हारी आज्ञा से और तुम्हारी इच्छा के अनुकूल सम्पूर्ण सृष्टि में व्याप्त, तुम्हारी अनुकम्पा के परिधान की सुरभि के सहारे और तुम्हारी दिव्य इच्छा के सूर्य के सहारे, जो तुम्हारी दया के क्षितिज पर तुम्हारी शक्ति और सम्प्रभुता के साथ प्रखर प्रकाशमान हुआ है, मैं याचना करता हूँ कि मेरे हृदय से कपोल कल्पनाओं और व्यर्थ धारणाओं को धो डाल, ताकि तन-मन से मैं तेरी ओर उन्मुख हो सकूँ। हे तू, जो समस्त मानवजाति का स्वामी है! मैं तेरा सेवक हूँ और हूँ तेरे सेवक का पुत्र! हे मेरे ईश्वर! मैंने तुम्हारी अनुकम्पा की बांह पकड़ ली है और तुम्हारी स्नेहिल कृपा की डोर थाम ली है। मेरे लिये उन शुभ पदार्थों का विधान कर जो तुम्हारे हैं और अपने आशीष के स्वर्ग से, अपने अनुग्रह के आकाश से भेजे गये सहभोज में सम्मिलित होने दे। तू सत्य ही, सभी लोकों का स्वामी है और ईश्वर है उन सबका, जो स्वर्ग में और धरा पर हैं।

#8220
- बहाउल्लाह

 

हे ईश्वर! तेरे धर्म की ऊष्मा ने कई अचेत हृदयों को किया है प्रदीप्त और तेरी वाणी के माधुर्य ने जगाया है अनेक सोये हुए लोगों को। न जाने कितने ऐसे अनजाने लोग हैं, जिन्होंने तेरी एकता के तरुवर की छाया में आश्रय चाहा है और न जाने कितने ऐसे प्यासे लोग हैं जो तेरे इस दिवस में तेरी जीवंत जलधारा की ओर आकुल हो दौड़ पड़े हैं।

धन्य है वह जो उन्मुख हुआ है तेरी ओर, हुआ है तत्पर तेरी मुख-ज्योति का अरुणोदय पाने को! धन्य है वह जो उन्मुख हुआ है पूर्ण स्नेह से तेरे प्राकट्य के उदय बिन्दु, तेरी प्रेरणा के निर्झर स्रोत की ओर। धन्य है वह जिसने तेरी उदारता और कृपा से प्राप्त अपना सर्वस्व न्यौछावर कर दिया है तेरे ही पथ में। धन्य है वह जिसने तुझे पाने की उत्कट चाह में तेरे सिवा अपना सर्वस्व त्याग दिया है। धन्य है वह जिसने तेरी अंतरंग प्रार्थना का सुख पाया है और विरक्त हो गया है जो सब कुछ से, सिवाय तेरे।

मैं याचना करता हूँ, हे मेरे नाथ ! उसके माध्यम से जो ’नाम‘ है तेरा, तेरी ही शक्ति सम्प्रभुता से जो उदित हुआ है कारागार के क्षितिज पर, कि सबको तू वह प्रदान कर जो तू समझता है उचित और जो है तेरे परम पद के अनुरूप। वस्तुतः, तेरी शक्ति है सर्वोपरि।

#8221
- बहाउल्लाह

 

मैं नहीं जानता, हे मेरे ईश्वर, कि वह कौन सी अग्नि है जो तूने अपनी भूमि पर प्रज्ज्वलित की है। धरती कभी भी इसके तेज को आच्छादित नहीं कर सकती और न जल ही इसकी ज्वाला को बुझा सकता है। संसार के समस्त निवासी इसके वेग को अवरुद्ध करने में असमर्थ हैं। वह जो इसके निकट खिंच आया है और इसकी गम्भीर गर्जना को जिसने सुना है उसे प्राप्त आशीर्वाद महान हैं।

कुछ को, हे मेरे ईश्वर, तूने अपनी शक्तिदायिनी कृपा के द्वारा इसकी ओर आने के योग्य बनाया है, जबकि दूसरों को उनके कर्मों के कारण पीछे रखा है। जिसने भी शीघ्रता से इसकी ओर पग बढ़ाये हैं और तेरे सौन्दर्य को निहारने की उत्कंठा में तुझ तक जो भी पहुँचा है, उसने तेरे पथ में अपना जीवन न्यौछावर कर दिया है और तेरे अतिरिक्त अन्य सब कुछ से पूर्णतया अनासक्त होकर तुझ तक पहुँच गया है।

मैं याचना करता हूँ कि उस अग्नि से जो तेरी सृष्टि में प्रज्ज्वलित हुई है, उन पदों को विदीर्ण कर दे, जिन्होंने मुझे तेरी भव्यता के सिंहासन के सम्मुख उपस्थित होने और तेरे प्रवेश-द्वार पर खड़ा होने से रोक रखा है। हे मेरे प्रभु! मेरे लिये अपने ग्रंथ में विहित हर वस्तु का विधान कर और मुझे अपनी दया की शरण से बहुत दूर हटाये जाने का दुःख न दे। तू जैसा चाहे करने में सशक्त है; तू निश्चय ही, सर्वशक्तिशाली, परम उदार है।

#8222
- बहाउल्लाह

 

स्तुति हो तेरी हे मेरे परमेश्वर! मैं तेरे उन सेवकों में से एक हूँ जिन्होंने तुझ पर और तेरे चिन्हों पर विश्वास किया है। देखता है तू कि कैसे तेरी दया के द्वार की ओर मैं ध्यान लगाये हुए हूँ और तेरी स्नेहमयी कृपा की ओर उन्मुख हो गया हूँ। मैं याचना करता हूँ तुझसे, तेरी परम श्रेष्ठ उपाधियों और परम उदात्त गुणों के नाम पर, कि मेरे सम्मुख अपने वरदानों के द्वार खोल दे और तब जो शुभ हो वह करने में मेरी सहायता कर। हे तू, जो सभी नामों और गुणों का अधिष्ठाता है!

मैं दरिद्र हूँ, हे मेरे प्रभु! तू है सर्वसम्पन्न! मैं तेरी ओर उन्मुख हूँ और स्वयं को तेरे अतिरिक्त अन्य सभी से मुक्त कर लिया है। मैं विनती करता हूँ तुझसे कि मुझे अपनी मृदुल दया के पवन झकोरों से वंचित मत कर और जो कुछ तूने अपने प्रिय सेवकों के लिये निश्चित किया है, उसे मुझ तक आने से न रोक।

मेरे नेत्रों से पर्दा हटा दे, हे मेरे प्रभु, जिससे जो भी तूने अपने प्राणियों के लिये चाहा है, मैं उसे पहचान पाऊँ और तेरी रचना के सभी मूर्त्त रूपों में तेरी सर्वसामर्थ्यमय शक्ति के प्रकटीकरणों को खोज पाऊँ। हे मेरे प्रभु, मेरी आत्मा को अपने परम सामर्थ्यमय चिन्हों से उल्लसित कर दे और मुझे मेरी भ्रष्ट और अधम इच्छाओं के घेरे से बाहर निकाल। तब मेरे लिये इस लोक और परलोक के समस्त शुभ मंगल का विधान कर। जो तू चाहे वह करने की सामर्थ्य है तुझमें। तुझ सर्वमहिमावान के अतिरिक्त अन्य कोई ईश्वर नहीं है, जिसकी सहायता की कामना सभी मानव करते हैं।

मैं धन्यवाद देता हूँ तुझे, हे मेरे प्रभु! कि तूने मुझे मेरी निद्रा से जगाया और मुझे गतिमान कर दिया है और मेरे अंदर वह देख पाने की कामना जगाई है जिसे समझने में तेरे अधिकतर सेवक विफल रहे हैं। इसलिये, हे मेरे नाथ, अपने प्रेम और प्रसन्नता के लिये तेरी जो भी कामना है, वह देखने योग्य मुझे बना। तू वह है जिसकी सामर्थ्य और प्रभुसत्ता की शक्ति की समस्त वस्तुएँ साक्षी हैं।

तू सर्वशक्तिमान, कल्याणकारी है; तेरे अतिरिक्त अन्य कोई परमेश्वर नहीं है !

#8231
- बहाउल्लाह

 

उस स्वामी के नाम पर! उस सृष्टिकर्ता, सम्प्रभु, परिपूरक, परम उदात्त के नाम पर, जिसकी सहायता की याचना सभी मनुष्य करते हैं, कहोः ”हे मेरे ईश्वर! तू, जो सभी स्वर्गों और धरती का रचयिता है, हे दिव्य साम्राज्य के स्वामिन्! तू अच्छी तरह मेरे हृदय के रहस्यों को जानता है, जबकि तेरा अस्तित्व तेरे अतिरिक्त अन्य सभी के ज्ञान से परे है। जो भी है मेरा, वह सब तू देखता है, जबकि तेरे अतिरिक्त अन्य कोई ऐसा कर नहीं सकता है। अपने अनुग्रह के द्वारा मेरे लिये वह प्रदान कर जो मुझे तेरे सिवा अन्य सबसे स्वाधीन होने के योग्य बना दे। वर दे कि मैं इहलोक और परलोक में अपने जीवन के सुफल प्राप्त करूँ। मेरे सम्मुख अपने अनुग्रह के द्वार खोल दे और कृपापूर्वक मुझे अपनी स्नेहिल दया और वरदानों से विभूषित कर।

हे तू, जो असीम अनुकम्पाओं का स्वामी है। जो तुझसे प्रेम करते हैं, उन्हें अपनी स्वर्गिक सहायता से आवृत कर और हमें अपने उपहारों और अक्षय सम्पदाओं का दान दे। तू हमारे लिये परिपूरक बन। हमारे पापों को क्षमा कर दे और हम पर दया कर।

तू ही हमारा स्वामी और सभी सृजित वस्तुओं का स्वामी है। हम तेरे अतिरिक्त अन्य किसी की आराधना नहीं करते और तेरे अतिरिक्त अन्य किसी के अनुग्रहों की कामना नहीं करते। तेरे अतिरिक्त अन्य कोई ईश्वर नहीं, सर्वसम्पन्न, सर्वोच्च!

हे मेरे स्वामी, अपने दिव्य संदेशवाहकों पर, उन पावन और सदाचारी जनों पर अपने आशीषों की वर्षा कर। सत्य ही तू परमेश्वर है, अद्वितीय, सर्ववशकारी।

#8224
- बाब

 

हे परमेश्वर! मैं तेरी शरण में आना चाहता हूँ, मैं तेरे सभी चिन्हों की ओर अपना हृदय केन्द्रित करता हूँ, हे नाथ! चाहे मैं यात्रा पर रहूँ या घर पर, रहूँ अपने व्यवसाय अथवा अपने काम पर; मैं अपना पूरा भरोसा तुझमें ही रखता हूँ। अतः, हे अपरिमेय करुणा के स्वामी! मुझे भरपूर सहायता प्रदान कर, जिससे मैं सबसे स्वतंत्र हो जाऊँ। हे तू, जो असीम कृपा का स्वामी है!

हे नाथ ! अपनी प्रसन्नता के अनुसार मुझको मेरा अंश प्रदान कर और ऐसा कर दे कि जो भी तू मेरे लिये नियत करे मैं उसमें ही संतुष्ट रहूँ।

आदेश देने का पूरा अधिकार तेरा ही है।

#8225
- बाब

 

हे ईश्वर, मेरे परमेश्वर! सभी वस्तुओं से अनासक्ति के मेरे प्याले को भर दे और अपनी भव्यता और दानशीलता के कारण प्रेम की मदिरा से मुझे उल्लसित कर दे, मुझे वासनाओं और कामनाओं के आघातों से मुक्त कर, मेरी इन सांसारिक बेड़ियों को तोड़ डाल, परम आनन्द के साथ मुझे अपने अलौकिक लोक में ले चल और अपनी सेविकाओं के बीच मुझे अपनी पावनता की सांसों से नवस्फूर्ति दे।

अपने आशीषों के प्रकाश से मेरे मुखड़े को दीप्तिमान कर, अपनी सर्वसमर्थ शक्ति के दर्शन से मेरे नेत्रों को नवज्योति प्रदान कर और अपने उस ज्ञान के द्वारा, जो सर्वसम्पूर्ण है, मुझे आह्लादित कर दे। हे तू, इस लोक और परलोक के साम्राज्य के राजाधिराज! हे तू प्रभुसत्ता और शक्ति के स्वामी! मेरी आत्मा को नवस्फूर्ति प्रदान करने वाले महान आनन्द के शुभ समाचारों से मुझे आनन्द विभोर कर दे, ताकि मैं तेरे प्रतीकों और तेरी शिक्षाओं का प्रसार दूर-दूर तक कर सकूँ, तेरे विधानों का पालन कर सकूँ और तेरी वाणी को यशस्वी बना सकूँ।

तू निश्चय ही शक्तिशाली, सदा देने वाला, सुयोग्य, सर्वशक्तिमान है।

#8228
- अब्दुल-बहा

 

हे ईश्वर! मेरे परमेश्वर! तू मेरी आशा और मेरा प्रियतम, मेरा सर्वोच्च लक्ष्य और मेरी कामना है! अत्यन्त विनीत भाव से और सम्पूर्ण समर्पण के साथ मैं तूझसे याचना करता हूँ, मुझे अपनी धरती पर अपने प्रेम की एक मीनार बना, अपने प्राणियों के बीच अपने ज्ञान का एक दीप बना और अपने साम्राज्य में अपनी दिव्य कृपा की ध्वजा बना दे। मुझे ऐसे सेवकों में गिन जिन्होंने स्वयं को तेरे अतिरिक्त अन्य सबसे अनासक्त कर लिया है, स्वयं को तेरे इस संसार की क्षणभंगुर वस्तुओं से पवित्र कर लिया है और अपने आपको निरर्थक, कपोल कल्पनाओं की दुहाई देने वालों के इशारों से मुक्त कर लिया है। अपने लोक की चेतना की सम्पुष्टि के द्वारा मेरे हृदय को आनन्दविभोर हो जाने दे और अपनी सर्वशक्तिमय महिमा के साम्राज्य से मुझ पर निरन्तर बरसने वाली दिव्य सहायता के समूहों के दर्शन से मेरे नेत्रों को दीप्तिमान कर दे।

तू सत्य ही, सर्वसामर्थ्यशाली, सर्वमहिमामय, सर्वशक्तिमंत है।

#8229
- अब्दुल-बहा

 

आध्यात्मिक गुण

अपनी अनन्तता की सुवासित जलधाराओं में से मुझे पान करने दे, हे मेरे परमेश्वर! और अपने अस्तित्व के वृक्ष के फलों का आस्वाद लेने योग्य मुझे बना, हे मेरी आशा! अपने प्रेम के स्फटिक निर्मल झरनों से घूंट भरने के अवसर दे मुझे, हे मेरी महिमा! और अपने अनन्त मंगल विधान की छत्रछाया में मुझे विश्राम करने दे, हे मेरी ज्योति! अपनी निकटता के उपवन में, अपने सान्निध्य में, मुझे विश्राम करने योग्य बना, हे मेरे प्रियतम! और अपने सिंहासन की दाहिनी भुजा पर मुझे बैठा, हे मेरी कामना अपने उल्लास के सुवासित झकोरों का एक झोंका मुझ पर से बह जाने दे, हे मेरे लक्ष्य! अपने सत्य के स्वर्ग की ऊँचाइयों में मुझे प्रवेश पाने दे, हे मेरे आराध्य! अपनी एकता की दिव्य कोकिला की मधुर रागिनी को सुन पाने का अवसर दे मुझे, हे देदीप्यमान प्रभु! अपनी शक्ति और सामर्थ्य की चेतना से मुझे अनुप्राणित कर दे, हे मेरे विश्वम्भर! अपने प्रेम में मुझे अटल बना, हे मेरे सहायक! और अपनी सुप्रसन्नता के पथ में मेरे पगों को अडिग रख, हे मेरे स्रष्टा! अपनी अमरता के उपवन में, अपने मुखारविन्द के सम्मुख सदा निवास करने दे मुझे, हे तू जो सदासर्वदा मुझ पर दयालु है! और अपनी महिमा के आसन पर मुझे प्रतिष्ठित कर, हे तू, जो मेरा स्वामी है! अपनी प्रेममयी कृपा के स्वर्ग तक मुझे उड़ान भरने दे, हे मेरे जीवनाधार! और अपने मार्गदर्शन के सूर्य से मेरा पथ आलोकित कर, हे मनमोहन! अपनी अदृश्य चेतना से मेरा साक्षात्कार करा, हे तू जो मेरा उद्गम है और है मेरी सर्वोपरि इच्छा; और अपने सौन्दर्य की सुरभि के सार तक मुझे लौटने दे, हे तू जो मेरा ईश्वर है!

तुझे जो प्रिय है, वह करने में तू समर्थ है। तू, सत्य ही, परम उदात्त, सर्वमहिमामय, सर्वोच्च है।

#8275
- बहाउल्लाह

 

मुझे एक निर्मल हृदय प्रदान कर, हे मेरे ईश्वर, और मुझमें एक प्रशांत अंतश्चेतना को नवरूप दे, हे मेरी आशा! अपनी शक्ति के सहारे मुझे अपने धर्म में दृढ़ कर, हे मेरे परम प्रियतम, और अपनी महिमा के प्रकाश से मेरे समक्ष अपना पथ आलोकित कर, हे तू, जो मेरी आकांक्षा का लक्ष्य है! अपनी सर्वातीत शक्ति के सहारे अपनी पावनता के स्वर्ग तक उड़ान भरने दे, हे मेरे अस्तित्व के आधार और अपनी चिरंतनता के पवन-झकोरों से मुझे आनन्दित कर दे, हे तू, जो मेरा परमेश्वर है! अपने सदाबहार संगीत से मेरे मन-प्राण को मुग्ध हो जाने दे, हे मेरे सखा, अपने सनातन रूप के दर्शन करा कि मै तेरे सिवा सब कुछ भूल जाऊँ, हे मेरे स्वामी! और अपनी पावन दिव्य सुरभि के संचरित होने के सुसमाचार से मुझे आनन्दित कर दे, हे तू जो प्रकट में सर्वाधिक प्रकट और गुह्य में सर्वाधिक गुह्य है !

#8276
- बहाउल्लाह

 

वह अनुकम्पामय है, है सब कुछ देने वाला! हे ईश्वर! मेरे ईश्वर! तेरी पुकार ने मुझे अपनी ओर बुलाया है और तेरी महिमा की महालेखनी ने मुझे जगाया है। तेरे पावन वचन के निर्झर ने मुझे आनन्दविभोर कर दिया है और तेरी प्रेरणा की मदिरा ने मुझे भावशून्य कर दिया है। हे प्रभु! तू देखता है मुझे, तेरे अतिरिक्त अन्य सबसे विरक्त, तेरे आशीषों की डोर से बंधा और तेरी अनुकम्पा के चमत्कारों के लिये आकुल मन-प्राण लिये, तेरी स्नेहसिक्त कृपा के उमड़ते सागर और तेरे संरक्षण के दमकते प्रकाश के नाम पर मैं तुझसे विनती करता हूँ कि तू ऐसा वर दे जो मुझे तेरे समीप ले जाये और तेरे नाम-रत्न का धनी बना दे। मेरी जिह्वा, मेरी लेखनी, मेरा तन-मन तुम्हारी शक्ति, तुम्हारी सामर्थ्य, तुम्हारी अनुकम्पा और तुम्हारी कृपा का प्रमाण दे रहे हैं कि तू ही है ईश्वर और तेरे अतिरिक्त अन्य कोई ईश्वर नहीं, शक्तिसम्पन्न, सामर्थ्यवान।

#8277
- बहाउल्लाह

 

हे मेरे प्रभु, मैं इस क्षण साक्षी देता हूँ अपनी निरीहता और तेरी सर्वोपरि सत्ता, अपनी दुर्बलता और तेरी शक्तिमयता की। मैं नहीं जानता कि मेरे लिये क्या है लाभकारी और क्या है हानिकर। तू, सत्य ही, सर्वज्ञाता, सर्वप्रज्ञ है। हे मेरे परमेश्वर, मेरे नाथ, तू मेरे लिये उसका विधान कर जो मुझे तेरे चिरंतन आदेश में संतुष्टि की अनुभूति कराये और मुझे तेरे हर लोक में समृद्धि दिलाये। तू, सत्य ही, दयालु है, और है दानशील।

हे नाथ! मुझे अपनी सम्पदा और अपनी कृपा के महासागर से दूर मत हटा और मेरे लिये इस लोक और परलोक के शुभ-मंगल का विधान कर। वस्तुतः, तू दया के परमोच्च सिंहासन का स्वामी है, तेरे अतिरिक्त अन्य कोई परमेश्वर नहीं है, सर्वज्ञाता, सर्वप्रज्ञ!

#8278
- बहाउल्लाह

 

हे मेरे नाथ! अपने सौंदर्य को मेरा आहार, अपनी समीपता को मेरा जीवन-जल, अपनी सुप्रसन्नता को मेरी आशा, अपनी स्तुति को मेरा दैनिक कर्म, अपने स्मरण को मेरा संगी, अपनी सम्प्रभुता की शक्ति को मेरा सहायक, अपने निवास को मेरा नीड़ और अपने उस स्थान को मेरा निवास बना जहाँ वैसे लोगां का प्रवेश वर्जित है जो एक पर्दे के कारण तुमसे दूर हैं।

तू सत्य ही, परम सामर्थ्यमय, सर्वमहिमामय, परम शक्तिशाली है।

#8279
- बहाउल्लाह

 

जयघोष हो तेरे नाम का, हे प्रभु, मेरे ईश्वर! मैं तेरा वह सेवक हूँ जिसने तेरी करुणामयी दया की डोर को थामा है और जो तेरी असीम दानशीलता के आंचल से लिपटा हुआ है। तेरे उस नाम पर जिसके द्वारा तूने सृष्टि की सभी दृश्य और अदृश्य वस्तुओं को अपने अधीन किया है और जिसके द्वारा यह सांस, जो वस्तुतः जीवन ही है, समस्त सृष्टि में प्रवाहित की गई है, मैं याचना करता हूँ कि तू स्वर्गों और धरा को आवृत करने वाली अपनी शक्ति से मुझे सबल बना और सभी रोगों और विपदाओं से मेरी रक्षा कर। मैं साक्षी देता हूँ कि तू ही सभी नामों का स्वामी है और जो तुझे पसंद हो वैसी आज्ञा देने वाला है, तेरे अतिरिक्त अन्य कोई ईश्वर नहीं, सर्वशक्तिशाली, सर्वज्ञाता, सर्वप्रज्ञ!

हे मेरे नाथ! मेरे लिये उसका विधान कर जो तेरे हर लोक मे मेरे लिये मंगलकारी हो। और तब मेरे लिये वह भेज जो तूने अपने चुने हुए प्राणियों के लिये निर्धारित किया है : ऐसे प्राणी, जिन्हें न तो दोष लगाने वालों का दोषारोपण, न ही अधर्मियों का शोर और न ही तुझसे विमुख हुए प्राणियों की विरक्ति तुम्हारी ओर उन्मुख होने से रोक सकी है।

अपनी सर्वोपरि सत्ता से, तू सत्य ही, संकट में सहायक है। तेरे अतिरिक्त अन्य कोई परमेश्वर नहीं है, सर्वशक्तिशाली, परम बलशाली।

#8280
- बहाउल्लाह

 

वह अनुकम्पामय है, है सब कुछ देने वाला! हे ईश्वर! मेरे ईश्वर! तेरी पुकार ने मुझे अपनी ओर बुलाया है और तेरी महिमा की महालेखनी ने मुझे जगाया है। तेरे पावन वचन के निर्झर ने मुझे आनन्दविभोर कर दिया है और तेरी प्रेरणा की मदिरा ने मुझे भावशून्य कर दिया है। हे प्रभु! तू देखता है मुझे, तेरे अतिरिक्त अन्य सबसे विरक्त, तेरे आशीषों की डोर से बंधा और तेरी अनुकम्पा के चमत्कारों के लिये आकुल मन-प्राण लिये, तेरी स्नेहसिक्त कृपा के उमड़ते सागर और तेरे संरक्षण के दमकते प्रकाश के नाम पर मैं तुझसे विनती करता हूँ कि तू ऐसा वर दे जो मुझे तेरे समीप ले जाये और तेरे नाम-रत्न का धनी बना दे। मेरी जिह्वा, मेरी लेखनी, मेरा तन-मन तुम्हारी शक्ति, तुम्हारी सामर्थ्य, तुम्हारी अनुकम्पा और तुम्हारी कृपा का प्रमाण दे रहे हैं कि तू ही है ईश्वर और तेरे अतिरिक्त अन्य कोई ईश्वर नहीं, शक्तिसम्पन्न, सामर्थ्यवान।

#8283
- बहाउल्लाह

 

हे मेरे प्रभु, मैं इस क्षण साक्षी देता हूँ अपनी निरीहता और तेरी सर्वोपरि सत्ता, अपनी दुर्बलता और तेरी शक्तिमयता की। मैं नहीं जानता कि मेरे लिये क्या है लाभकारी और क्या है हानिकर। तू, सत्य ही, सर्वज्ञाता, सर्वप्रज्ञ है। हे मेरे परमेश्वर, मेरे नाथ, तू मेरे लिये उसका विधान कर जो मुझे तेरे चिरंतन आदेश में संतुष्टि की अनुभूति कराये और मुझे तेरे हर लोक में समृद्धि दिलाये। तू, सत्य ही, दयालु है, और है दानशील।

हे नाथ! मुझे अपनी सम्पदा और अपनी कृपा के महासागर से दूर मत हटा और मेरे लिये इस लोक और परलोक के शुभ-मंगल का विधान कर। वस्तुतः, तू दया के परमोच्च सिंहासन का स्वामी है, तेरे अतिरिक्त अन्य कोई परमेश्वर नहीं है, सर्वज्ञाता, सर्वप्रज्ञ!

#8285
- बहाउल्लाह

 

वह अनुकम्पामय है, है सब कुछ देने वाला! हे ईश्वर! मेरे ईश्वर! तेरी पुकार ने मुझे अपनी ओर बुलाया है और तेरी महिमा की महालेखनी ने मुझे जगाया है। तेरे पावन वचन के निर्झर ने मुझे आनन्दविभोर कर दिया है और तेरी प्रेरणा की मदिरा ने मुझे भावशून्य कर दिया है। हे प्रभु! तू देखता है मुझे, तेरे अतिरिक्त अन्य सबसे विरक्त, तेरे आशीषों की डोर से बंधा और तेरी अनुकम्पा के चमत्कारों के लिये आकुल मन-प्राण लिये, तेरी स्नेहसिक्त कृपा के उमड़ते सागर और तेरे संरक्षण के दमकते प्रकाश के नाम पर मैं तुझसे विनती करता हूँ कि तू ऐसा वर दे जो मुझे तेरे समीप ले जाये और तेरे नाम-रत्न का धनी बना दे। मेरी जिह्वा, मेरी लेखनी, मेरा तन-मन तुम्हारी शक्ति, तुम्हारी सामर्थ्य, तुम्हारी अनुकम्पा और तुम्हारी कृपा का प्रमाण दे रहे हैं कि तू ही है ईश्वर और तेरे अतिरिक्त अन्य कोई ईश्वर नहीं, शक्तिसम्पन्न, सामर्थ्यवान।

#8289
- बहाउल्लाह

 

हे मेरे प्रभु, मैं इस क्षण साक्षी देता हूँ अपनी निरीहता और तेरी सर्वोपरि सत्ता, अपनी दुर्बलता और तेरी शक्तिमयता की। मैं नहीं जानता कि मेरे लिये क्या है लाभकारी और क्या है हानिकर। तू, सत्य ही, सर्वज्ञाता, सर्वप्रज्ञ है। हे मेरे परमेश्वर, मेरे नाथ, तू मेरे लिये उसका विधान कर जो मुझे तेरे चिरंतन आदेश में संतुष्टि की अनुभूति कराये और मुझे तेरे हर लोक में समृद्धि दिलाये। तू, सत्य ही, दयालु है, और है दानशील।

हे नाथ! मुझे अपनी सम्पदा और अपनी कृपा के महासागर से दूर मत हटा और मेरे लिये इस लोक और परलोक के शुभ-मंगल का विधान कर। वस्तुतः, तू दया के परमोच्च सिंहासन का स्वामी है, तेरे अतिरिक्त अन्य कोई परमेश्वर नहीं है, सर्वज्ञाता, सर्वप्रज्ञ!

#8291
- बहाउल्लाह

 

वह अनुकम्पामय है, है सब कुछ देने वाला! हे ईश्वर! मेरे ईश्वर! तेरी पुकार ने मुझे अपनी ओर बुलाया है और तेरी महिमा की महालेखनी ने मुझे जगाया है। तेरे पावन वचन के निर्झर ने मुझे आनन्दविभोर कर दिया है और तेरी प्रेरणा की मदिरा ने मुझे भावशून्य कर दिया है। हे प्रभु! तू देखता है मुझे, तेरे अतिरिक्त अन्य सबसे विरक्त, तेरे आशीषों की डोर से बंधा और तेरी अनुकम्पा के चमत्कारों के लिये आकुल मन-प्राण लिये, तेरी स्नेहसिक्त कृपा के उमड़ते सागर और तेरे संरक्षण के दमकते प्रकाश के नाम पर मैं तुझसे विनती करता हूँ कि तू ऐसा वर दे जो मुझे तेरे समीप ले जाये और तेरे नाम-रत्न का धनी बना दे। मेरी जिह्वा, मेरी लेखनी, मेरा तन-मन तुम्हारी शक्ति, तुम्हारी सामर्थ्य, तुम्हारी अनुकम्पा और तुम्हारी कृपा का प्रमाण दे रहे हैं कि तू ही है ईश्वर और तेरे अतिरिक्त अन्य कोई ईश्वर नहीं, शक्तिसम्पन्न, सामर्थ्यवान।

#8294
- बहाउल्लाह

 

हे मेरे प्रभु, मैं इस क्षण साक्षी देता हूँ अपनी निरीहता और तेरी सर्वोपरि सत्ता, अपनी दुर्बलता और तेरी शक्तिमयता की। मैं नहीं जानता कि मेरे लिये क्या है लाभकारी और क्या है हानिकर। तू, सत्य ही, सर्वज्ञाता, सर्वप्रज्ञ है। हे मेरे परमेश्वर, मेरे नाथ, तू मेरे लिये उसका विधान कर जो मुझे तेरे चिरंतन आदेश में संतुष्टि की अनुभूति कराये और मुझे तेरे हर लोक में समृद्धि दिलाये। तू, सत्य ही, दयालु है, और है दानशील।

हे नाथ! मुझे अपनी सम्पदा और अपनी कृपा के महासागर से दूर मत हटा और मेरे लिये इस लोक और परलोक के शुभ-मंगल का विधान कर। वस्तुतः, तू दया के परमोच्च सिंहासन का स्वामी है, तेरे अतिरिक्त अन्य कोई परमेश्वर नहीं है, सर्वज्ञाता, सर्वप्रज्ञ!

#8295
- बहाउल्लाह

 

वह अनुकम्पामय है, है सब कुछ देने वाला! हे ईश्वर! मेरे ईश्वर! तेरी पुकार ने मुझे अपनी ओर बुलाया है और तेरी महिमा की महालेखनी ने मुझे जगाया है। तेरे पावन वचन के निर्झर ने मुझे आनन्दविभोर कर दिया है और तेरी प्रेरणा की मदिरा ने मुझे भावशून्य कर दिया है। हे प्रभु! तू देखता है मुझे, तेरे अतिरिक्त अन्य सबसे विरक्त, तेरे आशीषों की डोर से बंधा और तेरी अनुकम्पा के चमत्कारों के लिये आकुल मन-प्राण लिये, तेरी स्नेहसिक्त कृपा के उमड़ते सागर और तेरे संरक्षण के दमकते प्रकाश के नाम पर मैं तुझसे विनती करता हूँ कि तू ऐसा वर दे जो मुझे तेरे समीप ले जाये और तेरे नाम-रत्न का धनी बना दे। मेरी जिह्वा, मेरी लेखनी, मेरा तन-मन तुम्हारी शक्ति, तुम्हारी सामर्थ्य, तुम्हारी अनुकम्पा और तुम्हारी कृपा का प्रमाण दे रहे हैं कि तू ही है ईश्वर और तेरे अतिरिक्त अन्य कोई ईश्वर नहीं, शक्तिसम्पन्न, सामर्थ्यवान।

#8301
- बहाउल्लाह

 

हे मेरे प्रभु, मैं इस क्षण साक्षी देता हूँ अपनी निरीहता और तेरी सर्वोपरि सत्ता, अपनी दुर्बलता और तेरी शक्तिमयता की। मैं नहीं जानता कि मेरे लिये क्या है लाभकारी और क्या है हानिकर। तू, सत्य ही, सर्वज्ञाता, सर्वप्रज्ञ है। हे मेरे परमेश्वर, मेरे नाथ, तू मेरे लिये उसका विधान कर जो मुझे तेरे चिरंतन आदेश में संतुष्टि की अनुभूति कराये और मुझे तेरे हर लोक में समृद्धि दिलाये। तू, सत्य ही, दयालु है, और है दानशील।

हे नाथ! मुझे अपनी सम्पदा और अपनी कृपा के महासागर से दूर मत हटा और मेरे लिये इस लोक और परलोक के शुभ-मंगल का विधान कर। वस्तुतः, तू दया के परमोच्च सिंहासन का स्वामी है, तेरे अतिरिक्त अन्य कोई परमेश्वर नहीं है, सर्वज्ञाता, सर्वप्रज्ञ!

#8302
- बहाउल्लाह

 

वह अनुकम्पामय है, है सब कुछ देने वाला! हे ईश्वर! मेरे ईश्वर! तेरी पुकार ने मुझे अपनी ओर बुलाया है और तेरी महिमा की महालेखनी ने मुझे जगाया है। तेरे पावन वचन के निर्झर ने मुझे आनन्दविभोर कर दिया है और तेरी प्रेरणा की मदिरा ने मुझे भावशून्य कर दिया है। हे प्रभु! तू देखता है मुझे, तेरे अतिरिक्त अन्य सबसे विरक्त, तेरे आशीषों की डोर से बंधा और तेरी अनुकम्पा के चमत्कारों के लिये आकुल मन-प्राण लिये, तेरी स्नेहसिक्त कृपा के उमड़ते सागर और तेरे संरक्षण के दमकते प्रकाश के नाम पर मैं तुझसे विनती करता हूँ कि तू ऐसा वर दे जो मुझे तेरे समीप ले जाये और तेरे नाम-रत्न का धनी बना दे। मेरी जिह्वा, मेरी लेखनी, मेरा तन-मन तुम्हारी शक्ति, तुम्हारी सामर्थ्य, तुम्हारी अनुकम्पा और तुम्हारी कृपा का प्रमाण दे रहे हैं कि तू ही है ईश्वर और तेरे अतिरिक्त अन्य कोई ईश्वर नहीं, शक्तिसम्पन्न, सामर्थ्यवान।

#8306
- बहाउल्लाह

 

हे मेरे प्रभु, मैं इस क्षण साक्षी देता हूँ अपनी निरीहता और तेरी सर्वोपरि सत्ता, अपनी दुर्बलता और तेरी शक्तिमयता की। मैं नहीं जानता कि मेरे लिये क्या है लाभकारी और क्या है हानिकर। तू, सत्य ही, सर्वज्ञाता, सर्वप्रज्ञ है। हे मेरे परमेश्वर, मेरे नाथ, तू मेरे लिये उसका विधान कर जो मुझे तेरे चिरंतन आदेश में संतुष्टि की अनुभूति कराये और मुझे तेरे हर लोक में समृद्धि दिलाये। तू, सत्य ही, दयालु है, और है दानशील।

हे नाथ! मुझे अपनी सम्पदा और अपनी कृपा के महासागर से दूर मत हटा और मेरे लिये इस लोक और परलोक के शुभ-मंगल का विधान कर। वस्तुतः, तू दया के परमोच्च सिंहासन का स्वामी है, तेरे अतिरिक्त अन्य कोई परमेश्वर नहीं है, सर्वज्ञाता, सर्वप्रज्ञ!

#8307
- बहाउल्लाह

 

हे ईश्वर! मेरे परमेश्वर! यह तेरा सेवक तेरी ओर बढ़ चला है। तेरी सेवा के पथ में विचरण कर रहा है। तेरी अक्षय सम्पदाओं की आशा करते हुए तेरे साम्राज्य पर भरोसा रखे हुए और तेरे वरदानों की मदिरा से मदमस्त होकर तेरे प्रेम के मरुस्थल में भावना के उन्माद में भटक रहा है, तेरे अनुग्रहों की अपेक्षा रखे हुए। हे मेरे ईश्वर! तेरे प्रति अनुराग की उसकी प्रचंडता को, तेरी स्तुति की इस निरंतरता को और तेरे प्रति प्रेम की प्रखरता को बढ़ा दे।

निश्चय ही तू परम उदार भरपूर कृपा का प्रभु है। तेरे अतिरिक्त अन्य कोई परमेश्वर नहीं है। क्षमाशील, दयामय।

#8273
- अब्दुल-बहा

 

हे ईश्वर, मेरे ईश्वर! अपने प्रियजनों को अपने धर्म में अडिग रहने, अपने पथ पर चलने और प्रभुधर्म में अटल रहने में सहायता कर; अहम् और आवेग को दमित करने की शक्ति प्रदान कर ताकि वे दिव्य मार्गदर्शन के पथ का अनुसरण कर सकें। तू शक्तिशाली, महिमावान, स्वयंजीवी, दाता, दयालु, सर्वसमर्थ और सर्वप्रदाता है।

#8274
- अब्दुल-बहा

 

आध्यात्मिक सभा

(जब भी तुम परामर्श के लिये सभाकक्ष में प्रवेश करो, तो प्रभु-प्रेम से छलकते हृदय से और मात्र उसके स्मरण के अतिरिक्त अन्य सब कुछ से मुक्त हुई जिह्वा से इस प्रार्थना का पाठ करो, जिससे कि वह सर्वशक्तिमान विजय प्राप्त करने में अनुग्रहपूर्वक तुम्हारी सहायता करे।)

हे तू दिव्य साम्राज्य के स्वामी! हमारे शरीर यहाँ एकत्र हैं अवश्य, लेकिन मंत्रमुग्ध हैं हम, हर लिया है हमारे मन-प्राण को तुम्हारे प्रेम ने; हम तेरे कांतिमय मुखड़े से आनन्द विभोर हो उठे हैं। भले ही हम दुर्बल हैं, किन्तु तेरे मार्गदर्शन के तेज और तेरी शक्ति की प्रेरणा की प्रतीक्षा करते हैं। भले ही हम दरिद्र हैं, सम्पत्ति और साधन से हैं हीन, फिर भी हम तुम्हारे दिव्य साम्राज्य की निधियों से समृद्धि पाते हैं। भले ही हम हैं बूंद भर, फिर भी तेरे महासिंधु की अतल गहराइयों से हम अपना भाग ग्रहण करते हैं! हम धूलकण हैं सही, फिर भी, तेरे भव्य सूर्य की महिमा से कांति पाते हैं। हे पालनहार प्रभु! अपनी सहायता भेज, ताकि यहाँ एकत्रित हर व्यक्ति एक प्रकाशित दीप बन जाये, हर एक बन जाये आकर्षण का केन्द्रबिन्दु और तुम्हारे स्वर्गिक आंगन मंे बुलाने वाला हरकारा बन जाये, ताकि हम इस अधम संसार को तुम्हारे स्वर्ग का दर्पण बना सकें।

#8281
- अब्दुल-बहा

 

(आध्यात्मिक सभा की बैठक की समाप्ति पर यह प्रार्थना करें)

हे ईश्वर! हे परमेश्वर! अपनी एकता के अदृश्य साम्राज्य से तू देखता है कि तुझमें पूरी आस्था, तुम्हारे चिन्हों में पूरे विश्वास के साथ और तुम्हारी संविदा और इच्छा के प्रति अडिग होकर, तुम्हारे प्रति आकर्षित होकर, तुम्हारे प्रेम की अग्नि से दीप्त, तुम्हारे धर्म के प्रति निष्ठावान बन हम इस आध्यात्मिक सभा में एकत्रित हुए हैं। हम तुम्हारी बगिया के सेवक हैं, तुम्हारे धर्म के प्रसारक, तुम्हारे मुखारबिंदु के प्रति समर्पित साधक, तुम्हारे प्रियजनों के प्रति विनम्र, तुम्हारे द्वार पर नतमस्तक हैं और तुमसे याचना करते हैं कि अपने प्रियजनों की सेवा करने के अवसर दे, शक्ति दे कि हम तेरी आराधना कर सकें, तेरे प्रति समर्पित रह सकें और तुझसे संलाप कर सकें। हे हमारे स्वामी! हम दुर्बल हैं, तू है सबल; हम प्राणविहीन हैं, तू है प्राणाधार चेतना; हम अभावों से भरे हैं, तू है दाता, रक्षक शक्तिशाली। हे हमारे स्वामी! अपने कृपालु मुखारविन्द की ओर हमें उन्मुख कर, अपनी असीम कृपा से, अपने स्वर्गिक सहभोज में हमें सम्मिलित कर, अपने सर्वोपरि देवदूतों द्वारा हमें सहायता दे और आभालोक के साम्राज्य के पावन जनों के द्वारा हमारी सेवा को स्वीकार कर। सत्य ही, तू उदार और कृपालु है; अक्षय सम्पदाओं का स्वामी है। सत्य ही, तू क्षमाशील और करुणामय है।

#8282
- अब्दुल-बहा

 

हे परमेश्वर, मेरे प्रभु! हम तेरे वे ही सेवक हैं जो भक्तिपूर्वक तेरे पावन मुखड़े की ओर उन्मुख हुए हैं, जिन्होंने इस महिमामय युग में तेरे अतिरिक्त अन्य सब कुछ से अपने आपको अनासक्त कर लिया है। हम इस आध्यात्मिक सभा में अपने विचारों और चिन्तन में एक बनकर उपस्थित हुए हैं और मानवजाति के बीच तेरी वाणी का यशोगान करने के लिये हमारे उद्देश्य एक हो गये हैं। हे प्रभु, हमारे परमेश्वर! हमें अपने दिव्य मार्गदर्शन के प्रतीक चिन्ह, मनुष्यों के बीच अपने उदात्त धर्म की ध्वजाएँ और अपनी सशक्त संविदा के सेवक बना, हे हमारे परमोच्च प्रभु ! हमें अपने आभा लोक में अपनी दिव्य एकता के मूर्त्त रूप और सभी देशों-प्रदेशों पर जगमगाने वाले सितारे बना। प्रभो! हमें अपनी अद्भुत कृपा की विराट तरंगों से प्रवाहित होने वाली सरितायें, अपनी दिव्य धर्म के तरूवर पर फलने वाले सुफल और स्वर्गिक उपवन में अपनी कृपा के समीर से झूमने वाले तरूवर बना। हे परमेश्वर! हमारी आत्माओं को अपनी दिव्य एकता के छन्दों पर आश्रित कर दे, हमारे हृदयों को अपनी अनुकम्पा की बरखा से उल्लसित कर दे, जिससे कि हम समुद्र की तरंगों के समान एक दूसरे में समा जायें, कि हमारे चिन्तन, हमारे विचार, हमारी अनुभूतियाँ एक ही सत्य का रूप ले लें, जो सम्पूर्ण विश्व में एकता की भावना को मूर्त्त करे। तू कृपालु, परम सम्पदामय, वरदाता, सर्वसामर्थ्यवान, दयामय, करूणामय है।

Abdu’l-Baha

#8284
- अब्दुल-बहा

 

हे परमेश्वर, मेरे प्रभु! हम तेरे वे ही सेवक हैं जो भक्तिपूर्वक तेरे पावन मुखड़े की ओर उन्मुख हुए हैं, जिन्होंने इस महिमामय युग में तेरे अतिरिक्त अन्य सब कुछ से अपने आपको अनासक्त कर लिया है। हम इस आध्यात्मिक सभा में अपने विचारों और चिन्तन में एक बनकर उपस्थित हुए हैं और मानवजाति के बीच तेरी वाणी का यशोगान करने के लिये हमारे उद्देश्य एक हो गये हैं। हे प्रभु, हमारे परमेश्वर! हमें अपने दिव्य मार्गदर्शन के प्रतीक चिन्ह, मनुष्यों के बीच अपने उदात्त धर्म की ध्वजाएँ और अपनी सशक्त संविदा के सेवक बना, हे हमारे परमोच्च प्रभु ! हमें अपने आभा लोक में अपनी दिव्य एकता के मूर्त्त रूप और सभी देशों-प्रदेशों पर जगमगाने वाले सितारे बना। प्रभो! हमें अपनी अद्भुत कृपा की विराट तरंगों से प्रवाहित होने वाली सरितायें, अपनी दिव्य धर्म के तरूवर पर फलने वाले सुफल और स्वर्गिक उपवन में अपनी कृपा के समीर से झूमने वाले तरूवर बना। हे परमेश्वर! हमारी आत्माओं को अपनी दिव्य एकता के छन्दों पर आश्रित कर दे, हमारे हृदयों को अपनी अनुकम्पा की बरखा से उल्लसित कर दे, जिससे कि हम समुद्र की तरंगों के समान एक दूसरे में समा जायें, कि हमारे चिन्तन, हमारे विचार, हमारी अनुभूतियाँ एक ही सत्य का रूप ले लें, जो सम्पूर्ण विश्व में एकता की भावना को मूर्त्त करे। तू कृपालु, परम सम्पदामय, वरदाता, सर्वसामर्थ्यवान, दयामय, करूणामय है।

Abdu’l-Baha

#8290
- अब्दुल-बहा

 

हे परमेश्वर, मेरे प्रभु! हम तेरे वे ही सेवक हैं जो भक्तिपूर्वक तेरे पावन मुखड़े की ओर उन्मुख हुए हैं, जिन्होंने इस महिमामय युग में तेरे अतिरिक्त अन्य सब कुछ से अपने आपको अनासक्त कर लिया है। हम इस आध्यात्मिक सभा में अपने विचारों और चिन्तन में एक बनकर उपस्थित हुए हैं और मानवजाति के बीच तेरी वाणी का यशोगान करने के लिये हमारे उद्देश्य एक हो गये हैं। हे प्रभु, हमारे परमेश्वर! हमें अपने दिव्य मार्गदर्शन के प्रतीक चिन्ह, मनुष्यों के बीच अपने उदात्त धर्म की ध्वजाएँ और अपनी सशक्त संविदा के सेवक बना, हे हमारे परमोच्च प्रभु ! हमें अपने आभा लोक में अपनी दिव्य एकता के मूर्त्त रूप और सभी देशों-प्रदेशों पर जगमगाने वाले सितारे बना। प्रभो! हमें अपनी अद्भुत कृपा की विराट तरंगों से प्रवाहित होने वाली सरितायें, अपनी दिव्य धर्म के तरूवर पर फलने वाले सुफल और स्वर्गिक उपवन में अपनी कृपा के समीर से झूमने वाले तरूवर बना। हे परमेश्वर! हमारी आत्माओं को अपनी दिव्य एकता के छन्दों पर आश्रित कर दे, हमारे हृदयों को अपनी अनुकम्पा की बरखा से उल्लसित कर दे, जिससे कि हम समुद्र की तरंगों के समान एक दूसरे में समा जायें, कि हमारे चिन्तन, हमारे विचार, हमारी अनुभूतियाँ एक ही सत्य का रूप ले लें, जो सम्पूर्ण विश्व में एकता की भावना को मूर्त्त करे। तू कृपालु, परम सम्पदामय, वरदाता, सर्वसामर्थ्यवान, दयामय, करूणामय है।

Abdu’l-Baha

#8293
- अब्दुल-बहा

 

हे परमेश्वर, मेरे प्रभु! हम तेरे वे ही सेवक हैं जो भक्तिपूर्वक तेरे पावन मुखड़े की ओर उन्मुख हुए हैं, जिन्होंने इस महिमामय युग में तेरे अतिरिक्त अन्य सब कुछ से अपने आपको अनासक्त कर लिया है। हम इस आध्यात्मिक सभा में अपने विचारों और चिन्तन में एक बनकर उपस्थित हुए हैं और मानवजाति के बीच तेरी वाणी का यशोगान करने के लिये हमारे उद्देश्य एक हो गये हैं। हे प्रभु, हमारे परमेश्वर! हमें अपने दिव्य मार्गदर्शन के प्रतीक चिन्ह, मनुष्यों के बीच अपने उदात्त धर्म की ध्वजाएँ और अपनी सशक्त संविदा के सेवक बना, हे हमारे परमोच्च प्रभु ! हमें अपने आभा लोक में अपनी दिव्य एकता के मूर्त्त रूप और सभी देशों-प्रदेशों पर जगमगाने वाले सितारे बना। प्रभो! हमें अपनी अद्भुत कृपा की विराट तरंगों से प्रवाहित होने वाली सरितायें, अपनी दिव्य धर्म के तरूवर पर फलने वाले सुफल और स्वर्गिक उपवन में अपनी कृपा के समीर से झूमने वाले तरूवर बना। हे परमेश्वर! हमारी आत्माओं को अपनी दिव्य एकता के छन्दों पर आश्रित कर दे, हमारे हृदयों को अपनी अनुकम्पा की बरखा से उल्लसित कर दे, जिससे कि हम समुद्र की तरंगों के समान एक दूसरे में समा जायें, कि हमारे चिन्तन, हमारे विचार, हमारी अनुभूतियाँ एक ही सत्य का रूप ले लें, जो सम्पूर्ण विश्व में एकता की भावना को मूर्त्त करे। तू कृपालु, परम सम्पदामय, वरदाता, सर्वसामर्थ्यवान, दयामय, करूणामय है।

Abdu’l-Baha

#8300
- अब्दुल-बहा

 

हे परमेश्वर, मेरे प्रभु! हम तेरे वे ही सेवक हैं जो भक्तिपूर्वक तेरे पावन मुखड़े की ओर उन्मुख हुए हैं, जिन्होंने इस महिमामय युग में तेरे अतिरिक्त अन्य सब कुछ से अपने आपको अनासक्त कर लिया है। हम इस आध्यात्मिक सभा में अपने विचारों और चिन्तन में एक बनकर उपस्थित हुए हैं और मानवजाति के बीच तेरी वाणी का यशोगान करने के लिये हमारे उद्देश्य एक हो गये हैं। हे प्रभु, हमारे परमेश्वर! हमें अपने दिव्य मार्गदर्शन के प्रतीक चिन्ह, मनुष्यों के बीच अपने उदात्त धर्म की ध्वजाएँ और अपनी सशक्त संविदा के सेवक बना, हे हमारे परमोच्च प्रभु ! हमें अपने आभा लोक में अपनी दिव्य एकता के मूर्त्त रूप और सभी देशों-प्रदेशों पर जगमगाने वाले सितारे बना। प्रभो! हमें अपनी अद्भुत कृपा की विराट तरंगों से प्रवाहित होने वाली सरितायें, अपनी दिव्य धर्म के तरूवर पर फलने वाले सुफल और स्वर्गिक उपवन में अपनी कृपा के समीर से झूमने वाले तरूवर बना। हे परमेश्वर! हमारी आत्माओं को अपनी दिव्य एकता के छन्दों पर आश्रित कर दे, हमारे हृदयों को अपनी अनुकम्पा की बरखा से उल्लसित कर दे, जिससे कि हम समुद्र की तरंगों के समान एक दूसरे में समा जायें, कि हमारे चिन्तन, हमारे विचार, हमारी अनुभूतियाँ एक ही सत्य का रूप ले लें, जो सम्पूर्ण विश्व में एकता की भावना को मूर्त्त करे। तू कृपालु, परम सम्पदामय, वरदाता, सर्वसामर्थ्यवान, दयामय, करूणामय है।

Abdu’l-Baha

#8305
- अब्दुल-बहा

 

आरोग्य

आरोग्य के लिये लम्बी प्रार्थना

Long healing Prayer

वह है रोगनिवारक, वही है परिपूरक सहायक, क्षमाशील, सर्वकरुणामय !

आहवान करता हूँ तेरा, हे परम महान !

हे निष्ठावान, हे गरिमावान, तू परिपूरक, तू रोगनिवारक, तू चिरन्तन, हे तू चिरन्तन !

आह्वान करता हूँ तेरा, हे सम्राट, हे उन्नतिदाता, हे न्यायकर्ता ! तू परिपूरक, तू रोगनिवारक, तू चिरन्तन, हे चिरन्तन !

आहवान करता हूँ तेरा, हे अनुपम, हे अनन्त, हे एकमेव ! तू परिपूरक, तू रोगनिवारक, तू चिरन्तन, हे तू चिरन्तन !

आहवान करता हूँ तेरा, हे परम प्रशंसित, हे पावन हे सहायक ! तू परिपूरक, तू रोगनिवारक, तू चिरन्तन, हे तू चिरन्तन !

आहवान करता हूँ तेरा, सर्वदर्शी, हे महाप्रज्ञ, हे परम महान ! तू परिपूरक, तू रोगनिवारक, तू चिरन्तन, हे तू चिरन्तन !

आहवान करता हूँ तेरा, हे सौम्य, हे भव्य, हे निर्णायक ! तू परिपूरक, तू रोगनिवारक, तू चिरन्तन, हे चिरन्तन !

आहवान करता हूँ तेरा, हे प्रियतम, हे चिरवांछित, हे परमानन्द ! तू परिपूरक, तू रोगनिवारक, तू चिरन्तन, हे तू चिरन्तन !

आहवान करता हूँ तेरा, हे परम शक्तिमंत, हे प्राणाधर, हे सामर्थ्यवान ! तू परिपूरक, तू रोगनिवारक, तू चिरन्तन, हे तू चिरन्तन !

आहवान करता हूँ तेरा, हे अधिनायक, हे स्वयंजीवी, हे सर्वज्ञ | तू परिपूरक, तू रोगनिवारक, तू चिरन्तन, हे तू चिरन्तन !

आह्वान करता हूँ तेरा, हे चेतना, हे प्रकाश, हे परम प्रत्यक्ष ! तू परिपूरक, तू रोगनिवारक, तू चिरन्तन, हे तू चिरन्तन !

आहवान करता हूँ तेरा, हे सर्वसुलभ, हे सर्वज्ञात, हे सर्वनिगूढ़ ! तू परिपूरक, तू रोगनिवारक, तू चिरन्तन, हे तू चिरन्तन !

आहवान करता हूँ तेरा, हे अगोचर, हे विजेता, हे वरदाता ! तू परिपूरक, तू रोगनिवारक, तू चिरन्तन, हे तू चिरन्तन !

आहवान करता हूँ तेरा, हे सर्वशक्तिमंत, हे सहायक, हे आवरणदाता! तू परिपूरक, तू रोगनिवारक, तू चिरन्तन, हे तू चिरन्तन !

आहवान करता हूँ तेरा, हे स्वरूपदाता, हे पालनहार, हे संहारकर्ता ! तू परिपूरक, तू रोगनिवारक, तू चिरन्तन, हे तू चिरन्तन !

आहवान करता हूँ तेरा, हे उदीयमान, हे एकत्रकर्ता, हे उन्नायक ! तू परिपूरक, तू रोगनिवारक, तू चिरन्तन, हे तू चिरन्तन !

आहवान करता हूँ तेरा, हे पूर्णकर्ता, हे अप्रतिबंधित, हे कृपालु ! तू परिपूरक, तू रोगनिवारक, तू चिरन्तन, हे तू चिरन्तन !

आहवान करता हूँ तेरा, हे परोपकारी, हे बंधनकारी, हे सृष्टिकर्ता ! तू परिपूरक, तू रोगनिवारक, तू चिरन्तन, हे तू चिरन्तन !

आहवान करता हूँ तेरा, हे परमउदात्त, हे परम सौदंर्य ! तू परम दयालु, तू रोगनिवारक, तू चिरन्तन, हे तू चिरन्तन !

आहवान करता हूँ तेरा, हे न्यायशील, हे दयाशील, हे परम उदार ! तू परिपूरक, तू रोगनिवारक, तू चिरन्तन, हे तू चिरन्तन !

आहवान करता हूँ तेरा, हे सर्वबाध्यकारी, हे चिरशाश्वत, हे परम ज्ञाता ! तू परिपूरक, तू रोगनिवारक, तू चिरन्तन, हे तू चिरन्तन !

आहवान करता हूँ तेरा, हे महभव्य , हे युग-प्राचीन, हे महामना ! तू परिपूरक, तू रोगनिवारक, तू चिरन्तन, हे तू चिरन्तन !

आहवान करता हूँ तेरा, हे सुसंरक्षित, हे सच्चिदानन्द, हे मनोवांछित ! तू परिपूरक, तू रोगनिवारक, तू चिरन्तन, हे तू चिरन्तन !

आहवान करता हूँ तेरा, हे सर्वदयालु, हे सर्वकृपालु, हे कल्याणीकारी! तू परिपूरक, तू रोगनिवारक, तू चिरन्तन, हे तू चिरन्तन !

आहवान करता हूँ तेरा, हे सब केसहायक, हे सबके आहवान ! तू परिपूरक, तू रोगनिवारक, तू चिरन्तन, हे तू चिरन्तन !

आहवान करता हूँ तेरा, हे प्रकटकर्ता, हे रूद्र, हे परम सौम्य ! तू परिपूरक, तू रोगनिवारक, तू चिरन्तन, हे तू चिरन्तन !

आहवान करता हूँ तेरा, हे मेरी आत्मा, हे मेरे प्रियमत, हे मेरी आस्था ! तू परिपूरक, तू रोगनिवारक, तू चिरन्तन, हे तू चिरन्तन !

आहवान करता हूँ तेरा, हे प्यास बुझाने वाले, हे भावातीत प्रभु, हे परम अनमोल ! तू परिपूरक, तू रोगनिवारक, तू चिरन्तन, हे तू चिरन्तन !

आहवान करता हूँ तेरा, हे महानतम् स्मरण, हे सर्वोत्तम नाम हे प्रचीनतम् मार्ग ! तू परिपूरक, तू रोगनिवारक, तू चिरन्तन, हे तू चिरन्तन !

आहवान करता हूँ तेरा, हे सर्वाधिक प्रशंसित, हे परम पावन, हे पवित्रम् ! तू परिपूरक, तू रोगनिवारक, तू चिरन्तन, हे तू चिरन्तन !

आहवान करता हूँ तेरा, हे निबंधक हे परामर्शदाता, हे मुक्तिदाता ! तू परिपूरक, तू रोगनिवारक, तू चिरन्तन, हे तू चिरन्तन !

आहवान करता हूँ तेरा, हे बन्धु, हे अरोग्यदाता, हे सम्मोहक ! तू परिपूरक, तू रोगनिवारक, तू चिरन्तन, हे तू चिरन्तन !

आहवान करता हूँ तेरा, हे प्रताप, हे सौन्दर्य, हे परम कृपालु ! तू परिपूरक, तू रोगनिवारक, तू चिरन्तन, हे तू चिरन्तन !

आहवान करता हूँ तेरा, हे परम विश्वासी, हे सर्वोत्तम प्रेमी, हे आदित्य! तू परिपूरक, तू रोगनिवारक, तू चिरन्तन, हे तू चिरन्तन !

आहवान करता हूँ तेरा, हे ज्योतिदाता, हे दिप्तिदाता , हे आनन्द के संवाहक ! तू परिपूरक, तू रोगनिवारक, तू चिरन्तन, हे तू चिरन्तन !

आहवान करता हूँ तेरा, हे कृपालु प्रभु, हे परम करुणामय, हे परम दयालु ! तू परिपूरक, तू रोगनिवारक, तू चिरन्तन, हे तू चिरन्तन !

आहवान करता हूँ तेरा, हे ध्रुव, हे जीवनधार, हे असित्व-मूल ! तू परिपूरक, तू रोगनिवारक, तू चिरन्तन, हे तू चिरन्तन !

#6860
- बहाउल्लाह

 

(आरोग्य के लिये जिन प्रार्थनाओं को प्रकट किया गया है, वे शारीरिक और आध्यात्मिक, दोनो प्रकार से निरोग रहने के लिये हैं। इसलिये, आत्मा और शरीर के स्वास्थ्य लाभ के लिये ये प्राथनाएँ की जानी चाहिये।)

तेरा नाम ही मेरा आरोग्य है, हे मेरे ईश्वर! तेरा स्मरण ही मेरी औषधि है। तेरा सामीप्य ही मेरी आशा, तेरा प्रेम ही मेरा सहचर है। मुझ पर तेरी अनुकम्पा ही मेरी निरोगता है और इहलोक तथा परलोक दोनों में मेरी आपद सहायक है। वस्तुतः, तू ही है सर्वप्रदाता, सर्वज्ञ एवं सर्वप्रज्ञ।

#8286
- बहाउल्लाह

 

स्तुत्य है तू, हे मेरे नाथ! मेरे परमेश्वर! मैं याचना करता हूँ तुझसे, तेरे उस महान नाम के द्वारा जिससे तूने अपने सेवकों को सक्रिय बनाया है और अपने नगरों का निर्माण किया है; तेरी परम श्रेष्ठ उपाधियों के द्वारा और तेरे पावन गुणों के द्वारा मैं याचना करता हूँ तुझसे कि अपने इन सेवकों की सहायता कर ताकि ये तेरी बहुमुखी उदारता की ओर ध्यान केन्द्रित कर तेरी प्रज्ञा के वितानों की ओर उन्मुख हो सकें। उन रोगों को दूर कर जिन्होंने मानवात्माओं को हर दिशा से आक्रांत किया है और सबको अपनी छत्रछाया देने वाले तेरे उस नाम के आश्रय में स्थित स्वर्ग की ओर देखने में बाधा दी है। वह नाम जिसे तूने उस स्वर्ग और इस धरती पर विद्यमान सभी के लिये नामों का सम्राट होने का विधान किया है। तू जैसा चाहे वैसा करने में समर्थ है, तेरे हाथों में सभी नामों का साम्राज्य है, तेरे अतिरिक्त कोई दूसरा परमेश्वर नहीं है, सामर्थ्यशाली, प्रज्ञामय।

मैं एक दीन-हीन प्राणी हूँ। हे मेरे नाथ, मैं तेरी सम्पदाओं से जुड़ा हूँ। मैं रुग्ण हूँ, मैं तेरी आरोग्यदायी शक्ति की डोर को कस कर पकड़े हुए हूँ, मुझे सभी ओर से घेरे हुए इन रोगों से मुक्त कर और मुझे अपनी अनुकम्पा और दया के जल से पूरी तरह से निर्मल कर दे। अपनी क्षमाशीलता और अक्षय सम्पदाओं के द्वारा मुझे अपने अतिरिक्त अन्य सबकी आसक्ति से छुटकारा दे। तेरी जैसी इच्छा हो वैसा करने में और जिससे तुझे प्रसन्नता हो उसे पूरा करने में सहायता दे। तू सत्य ही, इस जीवन का और अगले जीवन का स्वामी है। तू सत्य ही सदा क्षमाशील, परम दयामय है।

#8287
- बहाउल्लाह

 

हे ईश्वर, मेरे परमेश्वर! मैं तुझसे तेरी आरोग्यदायी शक्ति के उस महासिंधु के नाम पर और तेरे अनुग्रह के उस दिवानक्षत्र के प्रभापुंजों के नाम पर और तेरे उस नाम पर जिसके द्वारा तूने अपने सेवकों को अपने अधीन किया है और तेरे उस परमोच्च शब्द की सर्वव्यापी शक्ति के नाम पर, और तेरी इस परम उदात्त लेखनी की शक्ति के नाम पर और तेरी उस दया के नाम पर जो स्वर्ग और धरती पर विद्यमान सब की सृष्टि से पहले उद्भूत हुई थी, तुझसे याचना करता हूँ कि मुझे अपनी कृपा के जल से सभी व्याधियों, रोगों, सभी निर्बलता और दुर्बलता से मुक्त कर दे।

देखता है तू, हे मेरे स्वामिन्, अपने इस आराधक को तेरी अक्षय सम्पदाओं के द्वार पर राह देखते हुए और तेरी उदारता की डोरी थाम आस लगाये हुए। मैं अनुनय करता हूँ तुझसे कि उसे उन वस्तुओं से वंचित मत कर जिन्हें वह तेरी कृपा के महासिंधु और तेरी स्निग्ध कृपालुता के दिवानक्षत्र से मांगता है।

तू जैसा चाहे करने में सशक्त है, तेरे अतिरिक्त अन्य कोई परमेश्वर नहीं है, सदा क्षमाशील, परम उदार।

#8288
- बहाउल्लाह

 

एकता

हे मेरे ईश्वर! मेरे परमेश्वर! अपने सेवकों के हृदयों को मिलाकर एक कर दे और उन पर अपना महान उद्देश्य प्रकट कर। वे तेरी शिक्षाओं पर चलें और तेरे नियमों पर अटल रहें। हे ईश्वर! उनके प्रयास में तू उनकी सहायता कर और उन्हें अपनी सेवा करने की शक्ति प्रदान कर। हे ईश्वर! उन्हें उनके स्वयं के ऊपर न छोड़; उनके पगों का, अपने ज्ञान के प्रकाश द्वारा मार्गदर्शन कर और उनके हृदयों को अपने प्रेम से आनंदित कर दे। सत्य ही, तू उनका सहायक और स्वामी है।

#8292
- बहाउल्लाह

 

हे मेरे ईश्वर! मेरे परमेश्वर! अपने सेवकों के हृदयों को मिलाकर एक कर दे और उन पर अपना महान उद्देश्य प्रकट कर। वे तेरी शिक्षाओं पर चलें और तेरे नियमों पर अटल रहें। हे ईश्वर! उनके प्रयास में तू उनकी सहायता कर और उन्हें अपनी सेवा करने की शक्ति प्रदान कर। हे ईश्वर! उन्हें उनके स्वयं के ऊपर न छोड़; उनके पगों का, अपने ज्ञान के प्रकाश द्वारा मार्गदर्शन कर और उनके हृदयों को अपने प्रेम से आनंदित कर दे। सत्य ही, तू उनका सहायक और स्वामी है।

#8296
- बहाउल्लाह

 

हे परमेश्वर! यह वर दे कि एकता की ज्योति सारी पृथ्वी पर छा जाये और ”साम्राज्य प्रभु का है“ यह मुहर इसके सभी समुदायों एवं राष्ट्रों के ललाट पर अंकित हो जाये।

#8297
- बहाउल्लाह

 

जय हो तेरी हे परमेश्वर, कि तूने मानवजाति के प्रति अपने प्रेम को प्रकट रूप दिया है। हे तू जो हमारा जीवन और हमारी ज्योति है, अपने पथ में अपने सेवकों का मार्गदर्शन कर और हमें तुझमें समृद्ध बना और तेरे अतिरिक्त अन्य सभी से हमें मुक्त रख।

हे परमेश्वर! हमें तेरी एकता की शिक्षा दे और तेरी एकता की हमसे अनुभूति करा जिससे कि हम तेरे अतिरिक्त अन्य कुछ न देखें, तू दयालु और अक्षय सम्पदाओं का दाता है।

हे परमेश्वर! अपने प्रियजनों के हृदयों में अपने प्रेम की ज्वाला प्रज्ज्वलित कर, जिससे कि वे तेरे अतिरिक्त, अन्य सभी विचारों को भस्मसात कर दें।

हे परमेश्वर! हमारे सम्मुख अपने परमोच्च अनन्तता को प्रकट कर, कि तू सदैव रहा है और सदा रहेगा और तेरे अतिरिक्त अन्य कोई परमेश्वर नहीं है। सत्य ही तुझ में सभी विश्रांति और शक्ति पायेंगे।

#8298
- बहाउल्लाह

 

हे तू, जो स्वामियों का स्वामी है! मैं साक्षी देता हूँ कि तू है समस्त सृष्टि का स्वामी और है सभी दृश्य-अदृश्य प्राणियों का शिक्षक। मैं साक्षी देता हूँ कि सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड तेरी शक्ति के अधीन है और पृथ्वी की समस्त शक्तियाँ भी तुझे भयभीत नहीं कर सकतीं और न ही तुम्हारे उद्देश्य को पूरा करने में सम्राटों और राष्ट्रों की प्रभुसत्ता तुम्हें रोक सकती है। मैं स्वीकार करता हूँ कि सम्पूर्ण विश्व को नवजीवन देने और लोगों के बीच एकता की स्थापना करने तथा उनकी मुक्ति के अतिरिक्त तुम्हारी और कोई इच्छा नहीं है।

#8299
- बहाउल्लाह

 

हे मेरे ईश्वर! मेरे परमेश्वर! अपने सेवकों के हृदयों को मिलाकर एक कर दे और उन पर अपना महान उद्देश्य प्रकट कर। वे तेरी शिक्षाओं पर चलें और तेरे नियमों पर अटल रहें। हे ईश्वर! उनके प्रयास में तू उनकी सहायता कर और उन्हें अपनी सेवा करने की शक्ति प्रदान कर। हे ईश्वर! उन्हें उनके स्वयं के ऊपर न छोड़; उनके पगों का, अपने ज्ञान के प्रकाश द्वारा मार्गदर्शन कर और उनके हृदयों को अपने प्रेम से आनंदित कर दे। सत्य ही, तू उनका सहायक और स्वामी है।

#8304
- बहाउल्लाह

 

हे दयालु ईश्वर! तूने समस्त मानवजाति को एक ही मूल कुटुम्ब से उत्पन्न किया है। तूने ऐसा निश्चित किया है कि सभी मनुष्य एक ही कुटुम्बी हैं। तेरे पवित्र सान्निध्य में सब तेरे ही सेवक हैं और समस्त मानवजाति तेरी ही छत्रछाया में आश्रित है। सब तेरी अक्षय सम्पदाओं के सहभोज में एकत्रित हैं। सब तेरे मंगल विधान की ज्योति से प्रकाशित हैं।

हे परमात्मन्! तू सब पर कृपालु है, तूने सबको आजीविका दी है, सबको आश्रय दिया है, सबको जीवन प्रदान किया है; तूने सबको प्रतिभा और गुणों से विभूषित किया है; सब तेरी कृपा के सागर में निमग्न हैं। हे तू दयालु स्वामी ! सबको एक कर दे। सभी धर्मों को सहमत होने दे, सभी राष्ट्रों को एक राष्ट्र बना दे, ताकि वे सब परस्पर एक-दूसरे को, एक ही परिवार के सदस्यों की भाँति देखें और सम्पूर्ण वसुधा को एक ही कुटुम्ब मानें। वे सब मिलकर सद्भाव के वातावरण में रहें। हे ईश्वर! मानवजाति की एकता का ध्वज उन्नत कर दे। हे ईश्वर! परम् महान शांति स्थापित कर। सबके हृदयों को मिलाकर एक कर दे। हे तू दयालु पिता, हे ईश्वर, अपनी स्नेह-सुरभि से हमारे हृदयों को उल्लास से भर दे। अपने मार्गदर्शन के प्रकाश द्वारा हमारे नेत्रों को प्रदीप्त कर। अपने शब्दों के स्वरमाधुर्य से हमारे कानों को झंकृत कर दे और अपने मंगल विधान के संरक्षण के दुर्ग में आश्रय प्रदान कर। तू सर्वसमर्थ है, सर्वशक्तिमान् है, तू क्षमावंत, मानवजाति की त्रुटियों को अनदेखा करने वाला है।

#8303
- अब्दुल-बहा

 

कोष

(प्रभु के सभी मित्रों को.....यथाशक्ति दान देना चाहिये, उनके द्वारा समर्पित राशि, चाहे कितनी भी अल्प क्यों न हो। ईश्वर किसी भी व्यक्ति पर उसकी सामर्थ्य से अधिक बोझ नहीं डालता। ऐसे दान सभी केन्द्रों और सभी अनुयायियों के पास से आने चाहिये।)

”हे प्रभु के मित्रों ! तुम आश्वस्त रहो कि इन दानों के बदले प्रभु-कृपा से स्वर्गिक उपहारस्वरूप तुम्हारी खेती-बाड़ी, तुम्हारे उद्योग-धंधों और व्यापार में कई गुना बढ़ोत्तरी होगी। वह, जो यह सद्कर्म करेगा, निःसंदेह, पुरस्कार में उसका दस गुना पायेगा। इसमें कोई संदेह नहीं कि प्रभु उन्हें भरपूर सम्पुष्टि प्रदान करता है, जो उसके पथ में अपनी सम्पदा व्यय करते हैं।“

#8308
- अब्दुल-बहा

 

हे ईश्वर, मेरे परमेश्वर! अपने सच्चे प्रेमियों के ललाट को तेजस्वी बना और उन्हें निश्चित विजय के देवदूतों का सहारा दे। अपने सुगम पथ पर उनके पगों को अडिग बना और अपने आशीषों के द्वार खोल, अपनी पुरातन सम्पदाओं में से उन्हें अंशदान दे, क्योंकि तेरे धर्म की सुरक्षा प्रदान करते हुए, तेरे स्मरण पर भरोसा रखते हुए, तेरे प्रेम के लिये अपने हृदय समर्पित करते हुए और तेरे सौन्दर्य की आराधना में, तुझे प्रेम करने के उपायों की खोज में, जो भी तूने उन्हें दिया है उसे, उन्होंने अर्पित किया है।

हे मेरे नाथ उनके लिये भरपूर अंशदान का आदेश कर, एक निर्धारित और निश्चित पुरस्कार उन्हें प्रदान कर। वस्तुतः तू पालनहार, उदार, सहायक, कृपालु और सदा क्षमाशील है।

#8309
- अब्दुल-बहा

 

गर्भवती माताओं के लिये

हे सर्वकृपालु की सेविकाओं! बच्चों की प्रारम्भिक अवस्था से ही उन्हें प्रशिक्षित करने का तुम पर उत्तरदायित्व है और इसमें तनिक भी लापरवाही बरतने की अनुमति नहीं है।

#8330
- अब्दुल-बहा

 

हे नाथ! मेरे स्वामी! तुमने अपनी इस समर्पित सेविका पर जो अनुग्रह किया है उसके लिये मैं तेरे प्रति आभार प्रकट करती हूँ। यह तेरी दासी तेरी प्रार्थना और अभ्यर्थना करती है, क्योंकि सत्य ही तूने अपने प्रत्यक्ष साम्राज्य की ओर उसका मार्गदर्शन किया है, इस क्षणभंगुर संसार में अपनी पुकार सुनने के योग्य बनाया है और उन चिन्हांं के दर्शन कराये हैं जो सभी पदार्थों पर तेरे विजयी शासन के प्रमाण प्रकट करते हैं। हे स्वामी! वह जो मेरी कोख में है उसे मैं तुझे समर्पित करती हूँ। अपनी कृपा और उदारता से उसे अपने साम्राज्य में प्रशंसा के योग्य और सौभाग्यशाली शिशु बना, ताकि वह तेरी शिक्षा के अधीन फले-फूले और विकास करे। वस्तुतः तू कृपालु है, वस्तुतः तू महान अनुग्रहों का स्वामी है।

#8331
- अब्दुल-बहा

 

घर से निकलते समय

हे मेरे ईश्वर! मैं तेरी कृपा से इस प्रभात वेला में जाग उठा हूँ, और तुझ में ही मैंने सम्पूर्ण विश्वास अर्पित कर अपना निवास छोड़ा है और स्वयं को तेरे संरक्षण में सौंप दिया है। अपनी दया के स्वर्ग से तू मुझ पर अपना आशीष भेज और मुझे अपने घर सुरक्षित लौटने में वैसे ही समर्थ बना, जैसे तूने मुझे घर से प्रस्थान करते समय, अपनी सुरक्षा में रखकर, अपनी ओर उन्मुख होने के योग्य बनाया है। तेरे अतिरिक्त अन्य कोई ईश्वर नहीं है, एक और केवल एक, अतुलनीय, सर्वज्ञ तथा सर्वप्रज्ञ।

#8351
- बहाउल्लाह

 

दृढ़ता

प्रतापशाली हो तेरा नाम, हे मेरे नाथ, मेरे परमेश्वर! तेरी उस शक्ति के नाम पर, जिसने समस्त सृष्टि को आवृत्त किया है, और तेरी उस सम्प्रभुता के नाम पर, जो सम्पूर्ण सृष्टि से परे है, और तेरे विवेक में लुप्त उस शब्द के नाम पर, जिसके द्वारा तूने स्वर्ग और धरती की सृष्टि की है, मैं याचना करता हूँ, ऐसा वर दे कि तेरे लिये अपने प्रेम में हम दृढ़ रह सकें, तुम्हारी प्रसन्नता के अनुकूल आज्ञा पालन में अडिग बनें, तेरी छवि अपलक नेत्रों से निहार सकें और तेरी महिमा का गुणगान कर सकें।

हे मेरे परमेश्वर ! देश-विदेश में तेरे प्राणियों के बीच तेरे नाम का प्रकाश फैलाने और तेरे साम्राज्य में तेरे धर्म की रक्षा करने की हमें शक्ति दे। सदा रहा है तेरा स्वतंत्र अस्तित्व और तू ऐसा ही रहेगा सदासर्वदा, तुम्हारे प्राणी तुम्हारा स्मरण करें, न करें! तुझको ही मैने अपनी पूरी आस्था समर्पित की है, तेरी ओर ही मैं उन्मुख हुआ हूँ, तेरे प्रेममय विधान की डोर को मैंने दृढ़ता से थाम रखा है, और तेरी कृपा की छत्रछाया की ओर मैंने अपने पाँव बढ़ाये हैं। मुझे अपने द्वार के बाहर रख कर निराश मत कर, हे मेरे परमेश्वर! अपनी दया मुझसे दूर मत रख, क्योंकि मैं केवल तेरी ही कामना करता हूँ। तेरे अतिरिक्त अन्य कोई परमेश्वर नहीं है, सदा क्षमाशील, सर्वकृपालु। स्तुति हो तेरी हे तू, जो उनका प्रियतम है, जिन्होंने तुझे जाना है।

#8310
- बहाउल्लाह

 

हे तू, जिसकी निकटता है मेरी कामना, जिसका सान्निध्य है मेरी आशा, जिसका स्मरण है मेरी आकांक्षा, जिसकी महिमा का दरबार है मेरी मंजिल, जिसका निवास ही है मेरा लक्ष्य, जिसका नाम है मेरा रोग-निवारक, जिसका प्रेम है मेरे हृदय की शक्ति, जिसकी सेवा मेरी है सर्वोच्च अभिलाषा; मैं तेरे उस नाम के द्वारा जिसके द्वारा तूने, तुझे पहचानने वालों को अपने ज्ञान की परम उदात्त ऊँचाइयांं तक उड़ने में समर्थ बनाया है, और भक्तिपूर्वक तेरी आराधना करने वालों को अपने अनुग्रह की परिधि में पहुँचने की शक्ति दी है, तुझसे याचना करता हूँ कि मुझे तेरे मुखारविंद की ओर उन्मुख होने में, तुझ पर अपनी दृष्टि स्थिर रखने में, और तेरी महिमा की बात करने में सहायता दे।

मैं वह हूँ, हे मेरे नाथ! जिसने तेरे अतिरिक्त सब कुछ भुला दिया है और जो तेरी कृपा के दिवास्त्रोत की ओर उन्मुख हो गया है, जिसने तेरे दरबार की निकटता पाने की आशा में, तेरे अतिरिक्त अन्य सब का परित्याग कर दिया है। देख मुझे उस आसन की ओर निहारते हुए जो तेरे मुखारबिंद के प्रकाश की भव्यता से प्रकाशमान है। इसलिये, हमारे प्रियतम, मुझ तक वह भेज जो मुझे तेरे धर्म में दृढ़ रहने के योग्य बनाये, जिससे नास्तिकों के संदेह, मुझे तेरी ओर उन्मुख होने में बाधक न बन सकें। वस्तुतः, तू ही है शक्ति का परमेश्वर, संकटों में सहायक, सर्वप्रतापशाली, सामर्थ्यशाली!

#8311
- बहाउल्लाह

 

हे ईश्वर, मेरे परमेश्वर! मैं पश्चाताप में तेरी ओर मुड़ा हूँ। वस्तुतः तू ही ह क्षमादाता, करुणामय। हे ईश्वर, मेरे परमेश्वर! मैं तेरे पास लौट आया हूँ और सच, तू ही सदा क्षमाशील, कृपालु है। हे ईश्वर, मेरे परमेश्वर! मैं तेरी कृपा की डोर से बंध गया हूँ। तेरे ही पास है स्वर्ग और धरती की सभी सम्पदाओं का अक्षय भ्ांडार। हे ईश्वर, मेरे परमेश्वर! मैंने तेरी ओर आने की शीघ्रता की है और सच, तू ही क्षमा करने वाला और अपार कृपा का स्वामी है। हे ईश्वर, मेरे परमेश्वर! मैं तेरी कृपा की स्वर्गिक मदिरा का प्यासा हूँ। और सच तू ही दाता, कृपालु, सर्वसामर्थ्यवान, सर्वशक्तिशाली है। हे ईश्वर, मेरे परमेश्वर! मैं साक्षी देता हूँ कि तूने अपना धर्म प्रकट किया है, अपना वचन पूरा किया है और अपनी कृपा के स्वर्ग से उसे अवतरित किया है, जिसने तेरे कृपापात्रों के हृदय तेरी ओर खींच लिये हैं। सौभाग्य होगा उसका जिसने तेरी अटूट डोर को दृढ़ता से थाम लिया है और तेरे देदीप्यमान परिधान की छोर से जो दृढ़ता से बंधा है।

हे समस्त अस्तित्व के स्वामी! गोचर और अगोचर के सम्राट! मैं तेरी सामर्थ्य, तेरी भव्यता और तेरी सम्प्रभुता के नाम पर मांगता हूँ कि अपनी महिमा की लेखनी द्वारा मेरा नाम अपने उन श्रद्धालु भक्तों की श्रेणी में अंकित कर दे, जिन्हें पापियों के लम्बे लेख तेरे मुखारबिंद के प्रकाश की ओर उन्मुख होने से रोक नहीं पाये हैं। हे प्रार्थना सुनने वाले और उसका फल देने वाले परमेश्वर!

#8312
- बहाउल्लाह

 

जयघोष हो तेरा, हे मेरे ईश्वर। मेरे परम् प्रियतम! अपने धर्म में मुझे दृढ़ बना और वर दे कि मैं उनमें गिना जाऊँ जिन्होंने तेरी संविदा का उल्लंघन नहीं किया है और न ही अपनी कपोल कल्पना के देवों का अनुसरण किया है। मुझे समर्थ बना कि तेरे सान्निध्य में मैं सच्चाई का दामन थाम सकूँ, अपनी दया का दान दे और मुझे अपने उन सेवकों में शामिल होने दे जो भय नहीं करते, न ही चिन्तातुर होते हैं। मुझें मेरे हाल पर न छोड़, हे ईश्वर, न ही मुझे उसे पहचानने से वंचित कर जो तेरा ही प्रतिरूप है और न ही मुझे उनमें गिन जो तुझसे विमुख हो चुके हैं। हे मेरे प्रभु! मुझे उनमें गिन जिन्होंने तेरे सौन्दर्य को पहचाना है, जिन्होंने अपना सर्वस्व न्यौछावर करने का सौभाग्य प्राप्त किया है और जो अपने समर्पण का एक पल भी सम्पूर्ण सृष्टि के साम्राज्य के बदले देना पसंद नहीं करेंगे। दया कर, हे प्रभु, विशेषरूप से तब जब तेरी धरती के लोग राह भटक गये हैं, घातक दोषों से भर गये हैं। हे मेरे ईश्वर, मुझे वह दे जो तेरी दृष्टि में शुभ और शोभनीय है। तू, सत्य ही, सर्वशक्तिशाली, उदार, करुणामय और सदा क्षमाशील है।

वर दे, हे मेरे प्रभु! कि मैं उनमें न गिना जाऊँ जो कान रहते सुन नहीं पाते, आँख रहते देख नहीं पाते, जिह्वा होते हुए भी मूक बने बैठे हैं और जिनके हृदय कुछ भी समझने में विफल हो गये हैं। हे प्रभु, मुझे अज्ञानता की अग्नि और स्वार्थी इच्छाओं से मुक्त कर, अपनी सर्वोच्च दया के घेरे में रहने दे और मुझे वह दे जो तुमने अपने प्रिय पात्रों के लिये निर्धारित किया है। तू जो चाहे करने में समर्थ है। सत्य ही तू, संकटमोचन, स्वयंजीवी है।

#8313
- बाब

 

स्तुत्य और महिमावंत है तू, हे परमात्मन्! तेरा पावन सान्निध्य प्राप्त करने का दिवस शीघ्र आये, ऐसा वर दे। अपने प्रेम और प्रसन्नता की शक्ति से हमारे हृदय उल्लसित कर दे और हम स्वेच्छा से तेरी इच्छा और आदेश के प्रति समर्पित हो सकें, ऐसी दृढ़ता प्रदान कर। वस्तुतः तेरे ज्ञान के वृत्त में वे सब हैं, जिनकी रचना तूने की है और जिनकी रचना तू करेगा। तेरी स्वर्गिक शक्ति उन सब के अनुभव से परे है, जिनको तूने अस्तित्व दिया है और जिन्हें तू अस्तित्व देगा। तेरे अतिरिक्त अन्य कोई नहीं है, जिसकी आराधना की मेरी कामना है। तेरे अतिरिक्त अन्य नहीं है कोई, जो स्तुत्य है। तेरी सुप्रसन्नता के अतिरिक्त नहीं है कुछ भी जो प्रिय है मुझे। वस्तुतः; तू ही है सर्वोपरि शासक, परम् सत्य, संकटमोचन, स्वयंजीवी।

#8314
- बाब

 

हे नाथ, मेरे परमात्मन्! अपने प्रियजनों को अपने धर्म में अडिग रहने, अपने पथ पर चलने, प्रभुधर्म में दृढ़ रहने में सहायता दे। उन्हें अपनी कृपा प्रदान कर कि वे अहंकार और वासना के आघातों को सह सकें और तेरे दिव्य मार्गदर्शन का अनुसरण कर सकेंं। तू शक्तिशाली, कृपालु, स्वयंजीवी, उदात्त, करुणामय, सर्वसमर्थ, सर्वदयालु है।

#8315
- अब्दुल-बहा

 

दिवंगतों के लिये

दिवंगतों के लिये इस प्रार्थना का पाठ केवल वैसे मृतकों के लिये करें जिनकी उम्र पंद्रह वर्ष से अधिक है। ”यह एकमात्र प्रार्थना है, जो समूह में कही जाती है। यह प्रार्थना एक अनुयायी द्वारा कही जाती है जबकि अन्य सभी जो उस स्थान पर उपस्थित हैं, खड़े रहते हैं। इस प्रार्थना का पाठ करते समय किब्ले की ओर मुँह करना आवश्यक नहीं है।“

#8316
- बहाउल्लाह

 

हे मेरे परमेश्वर! ये तेरा सेवक है और तेरे सेवक का पुत्र है जिसने तुझ पर और तेरे चिन्हों में आस्था रखी है और तेरी ओर उन्मुख हुआ है तथा जो तेरे अतिरिक्त अन्य सब कुछ से अनासक्त हो चुका है। तू सत्य ही उनमें से है जो दया करते हैं, परम दयालु हैं।

हे तू, जो मनुष्यों के पापों को क्षमा करता है और उनके दोषों पर पर्दा डालता है, इसके साथ वैसा ही व्यवहार कर, जैसा कि तेरी अक्षय सम्पदाओं के स्वर्ग और तेरी कृपा के महासागर को शोभा देता है। अपनी उस सर्वातीत दया की परिधि में, जो धरती और स्वर्ग की स्थापना से पहले भी विद्यमान थी, इसे प्रवेश दे। तेरे अतिरिक्त अन्य कोई परमेश्वर नहीं है, तू ही है सदा क्षमाशील; परम उदार !

(तब वह छः बार ’अल्ला-ओ-आभा‘ के पावन नाम का उच्चारण करे और उसके बाद 19 बार नीचे दिये गये छन्दों का पाठ करे।)

हम सब सत्य ही, प्रभु की आराधना करते हैं। हम सब सत्य ही, प्रभु के सम्मुख नमन करते हैं। हम सब सत्य ही, प्रभु के प्रति आस्थावान हैं। हम सब सत्य ही, प्रभु की स्तुति करते हैं। हम सब सत्य ही, प्रभु को धन्यवाद देते हैं। हम सब सत्य ही, प्रभु की इच्छा के प्रति धैर्यवान हैं ।

(यदि दिवंगत आत्मा नारी है, तो प्रार्थना करने वाला कहे ”यह तेरी सेविका और तेरी सेविका की पुत्री है“ इत्यादि!)

#8317
- बहाउल्लाह

 

महिमा हो तेरी, हे ईश्वर, मेरे परमेश्वर! अपनी अनन्त प्रभुसत्ता की शक्ति के सहारे जिसे तूने ऊपर उठाया है उसे गिरने न दे और जिसे तूने अपनी अनन्तता के मंडप तले प्रवेश के योग्य बनाया है उसे अपने से दूर न रख। हे मेरे प्रभु! क्या तू उसे अपने से दूर रखेगा, जिसे तूने अपनी प्रभुता की छांव दी है? हे मेरी आकांक्षा! क्या तू उसे अपने से दूर कर देगा जिसके लिये तू शरण रहा है। जिसे तूने ऊपर उठाया है उसे तू नीचे नहीं गिरा सकता, जो तुझे याद करता रहा, क्या तू उसे भुला सकता है?

महिमा हो, चतुर्दिक महिमा फैले तेरी! तू वह है जो अनन्तकाल से सम्पूर्ण सृष्टि का सम्राट रहा है और रहा है इसका गतिदाता और तू ही सदा रहेगा सभी सृजित वस्तुओं का स्वामी तथा नियंता। तू महिमावंत है, हे मेरे ईश्वर! यदि तू अपने सेवकों पर कृपा करना छोड़ देगा तो कौन उन पर कृपा करेगा? यदि तू अपने प्रियजनों को सहायता देना बंद कर देगा तो कौन है दूसरा जो सहायता दे सकेगा?

महिमा हो, चतुर्दिक महिमा फैले तेरी। तू अपने सत्य से सुशोभित है और सत्य ही, हम सभी तेरी आराधना करते हैं, तू अपने न्याय में मूर्तिमान है औैर सत्य ही, तू अपनी अनुकम्पाओं में प्रिय है। तेरे अतिरिक्त अन्य कोई ईश्वर नहीं, संकटों में सहायक, स्वयंजीवी।

#8318
- बहाउल्लाह

 

हे मेरे परमेश्वर! ये तेरा सेवक है और तेरे सेवक का पुत्र है जिसने तुझ पर और तेरे चिन्हों में आस्था रखी है और तेरी ओर उन्मुख हुआ है तथा जो तेरे अतिरिक्त अन्य सब कुछ से अनासक्त हो चुका है। तू सत्य ही उनमें से है जो दया करते हैं, परम दयालु हैं।

हे तू, जो मनुष्यों के पापों को क्षमा करता है और उनके दोषों पर पर्दा डालता है, इसके साथ वैसा ही व्यवहार कर, जैसा कि तेरी अक्षय सम्पदाओं के स्वर्ग और तेरी कृपा के महासागर को शोभा देता है। अपनी उस सर्वातीत दया की परिधि में, जो धरती और स्वर्ग की स्थापना से पहले भी विद्यमान थी, इसे प्रवेश दे। तेरे अतिरिक्त अन्य कोई परमेश्वर नहीं है, तू ही है सदा क्षमाशील; परम उदार !

(तब वह छः बार ’अल्ला-ओ-आभा‘ के पावन नाम का उच्चारण करे और उसके बाद 19 बार नीचे दिये गये छन्दों का पाठ करे।)

हम सब सत्य ही, प्रभु की आराधना करते हैं। हम सब सत्य ही, प्रभु के सम्मुख नमन करते हैं। हम सब सत्य ही, प्रभु के प्रति आस्थावान हैं। हम सब सत्य ही, प्रभु की स्तुति करते हैं। हम सब सत्य ही, प्रभु को धन्यवाद देते हैं। हम सब सत्य ही, प्रभु की इच्छा के प्रति धैर्यवान हैं ।

(यदि दिवंगत आत्मा नारी है, तो प्रार्थना करने वाला कहे ”यह तेरी सेविका और तेरी सेविका की पुत्री है“ इत्यादि!)

#8319
- बहाउल्लाह

 

हे मेरे परमेश्वर! ये तेरा सेवक है और तेरे सेवक का पुत्र है जिसने तुझ पर और तेरे चिन्हों में आस्था रखी है और तेरी ओर उन्मुख हुआ है तथा जो तेरे अतिरिक्त अन्य सब कुछ से अनासक्त हो चुका है। तू सत्य ही उनमें से है जो दया करते हैं, परम दयालु हैं।

हे तू, जो मनुष्यों के पापों को क्षमा करता है और उनके दोषों पर पर्दा डालता है, इसके साथ वैसा ही व्यवहार कर, जैसा कि तेरी अक्षय सम्पदाओं के स्वर्ग और तेरी कृपा के महासागर को शोभा देता है। अपनी उस सर्वातीत दया की परिधि में, जो धरती और स्वर्ग की स्थापना से पहले भी विद्यमान थी, इसे प्रवेश दे। तेरे अतिरिक्त अन्य कोई परमेश्वर नहीं है, तू ही है सदा क्षमाशील; परम उदार !

(तब वह छः बार ’अल्ला-ओ-आभा‘ के पावन नाम का उच्चारण करे और उसके बाद 19 बार नीचे दिये गये छन्दों का पाठ करे।)

हम सब सत्य ही, प्रभु की आराधना करते हैं। हम सब सत्य ही, प्रभु के सम्मुख नमन करते हैं। हम सब सत्य ही, प्रभु के प्रति आस्थावान हैं। हम सब सत्य ही, प्रभु की स्तुति करते हैं। हम सब सत्य ही, प्रभु को धन्यवाद देते हैं। हम सब सत्य ही, प्रभु की इच्छा के प्रति धैर्यवान हैं ।

(यदि दिवंगत आत्मा नारी है, तो प्रार्थना करने वाला कहे ”यह तेरी सेविका और तेरी सेविका की पुत्री है“ इत्यादि!)

#8321
- बहाउल्लाह

 

हे मेरे परमेश्वर! ये तेरा सेवक है और तेरे सेवक का पुत्र है जिसने तुझ पर और तेरे चिन्हों में आस्था रखी है और तेरी ओर उन्मुख हुआ है तथा जो तेरे अतिरिक्त अन्य सब कुछ से अनासक्त हो चुका है। तू सत्य ही उनमें से है जो दया करते हैं, परम दयालु हैं।

हे तू, जो मनुष्यों के पापों को क्षमा करता है और उनके दोषों पर पर्दा डालता है, इसके साथ वैसा ही व्यवहार कर, जैसा कि तेरी अक्षय सम्पदाओं के स्वर्ग और तेरी कृपा के महासागर को शोभा देता है। अपनी उस सर्वातीत दया की परिधि में, जो धरती और स्वर्ग की स्थापना से पहले भी विद्यमान थी, इसे प्रवेश दे। तेरे अतिरिक्त अन्य कोई परमेश्वर नहीं है, तू ही है सदा क्षमाशील; परम उदार !

(तब वह छः बार ’अल्ला-ओ-आभा‘ के पावन नाम का उच्चारण करे और उसके बाद 19 बार नीचे दिये गये छन्दों का पाठ करे।)

हम सब सत्य ही, प्रभु की आराधना करते हैं। हम सब सत्य ही, प्रभु के सम्मुख नमन करते हैं। हम सब सत्य ही, प्रभु के प्रति आस्थावान हैं। हम सब सत्य ही, प्रभु की स्तुति करते हैं। हम सब सत्य ही, प्रभु को धन्यवाद देते हैं। हम सब सत्य ही, प्रभु की इच्छा के प्रति धैर्यवान हैं ।

(यदि दिवंगत आत्मा नारी है, तो प्रार्थना करने वाला कहे ”यह तेरी सेविका और तेरी सेविका की पुत्री है“ इत्यादि!)

#8323
- बहाउल्लाह

 

हे मेरे परमेश्वर! ये तेरा सेवक है और तेरे सेवक का पुत्र है जिसने तुझ पर और तेरे चिन्हों में आस्था रखी है और तेरी ओर उन्मुख हुआ है तथा जो तेरे अतिरिक्त अन्य सब कुछ से अनासक्त हो चुका है। तू सत्य ही उनमें से है जो दया करते हैं, परम दयालु हैं।

हे तू, जो मनुष्यों के पापों को क्षमा करता है और उनके दोषों पर पर्दा डालता है, इसके साथ वैसा ही व्यवहार कर, जैसा कि तेरी अक्षय सम्पदाओं के स्वर्ग और तेरी कृपा के महासागर को शोभा देता है। अपनी उस सर्वातीत दया की परिधि में, जो धरती और स्वर्ग की स्थापना से पहले भी विद्यमान थी, इसे प्रवेश दे। तेरे अतिरिक्त अन्य कोई परमेश्वर नहीं है, तू ही है सदा क्षमाशील; परम उदार !

(तब वह छः बार ’अल्ला-ओ-आभा‘ के पावन नाम का उच्चारण करे और उसके बाद 19 बार नीचे दिये गये छन्दों का पाठ करे।)

हम सब सत्य ही, प्रभु की आराधना करते हैं। हम सब सत्य ही, प्रभु के सम्मुख नमन करते हैं। हम सब सत्य ही, प्रभु के प्रति आस्थावान हैं। हम सब सत्य ही, प्रभु की स्तुति करते हैं। हम सब सत्य ही, प्रभु को धन्यवाद देते हैं। हम सब सत्य ही, प्रभु की इच्छा के प्रति धैर्यवान हैं ।

(यदि दिवंगत आत्मा नारी है, तो प्रार्थना करने वाला कहे ”यह तेरी सेविका और तेरी सेविका की पुत्री है“ इत्यादि!)

#8325
- बहाउल्लाह

 

हे मेरे परमेश्वर! ये तेरा सेवक है और तेरे सेवक का पुत्र है जिसने तुझ पर और तेरे चिन्हों में आस्था रखी है और तेरी ओर उन्मुख हुआ है तथा जो तेरे अतिरिक्त अन्य सब कुछ से अनासक्त हो चुका है। तू सत्य ही उनमें से है जो दया करते हैं, परम दयालु हैं।

हे तू, जो मनुष्यों के पापों को क्षमा करता है और उनके दोषों पर पर्दा डालता है, इसके साथ वैसा ही व्यवहार कर, जैसा कि तेरी अक्षय सम्पदाओं के स्वर्ग और तेरी कृपा के महासागर को शोभा देता है। अपनी उस सर्वातीत दया की परिधि में, जो धरती और स्वर्ग की स्थापना से पहले भी विद्यमान थी, इसे प्रवेश दे। तेरे अतिरिक्त अन्य कोई परमेश्वर नहीं है, तू ही है सदा क्षमाशील; परम उदार !

(तब वह छः बार ’अल्ला-ओ-आभा‘ के पावन नाम का उच्चारण करे और उसके बाद 19 बार नीचे दिये गये छन्दों का पाठ करे।)

हम सब सत्य ही, प्रभु की आराधना करते हैं। हम सब सत्य ही, प्रभु के सम्मुख नमन करते हैं। हम सब सत्य ही, प्रभु के प्रति आस्थावान हैं। हम सब सत्य ही, प्रभु की स्तुति करते हैं। हम सब सत्य ही, प्रभु को धन्यवाद देते हैं। हम सब सत्य ही, प्रभु की इच्छा के प्रति धैर्यवान हैं ।

(यदि दिवंगत आत्मा नारी है, तो प्रार्थना करने वाला कहे ”यह तेरी सेविका और तेरी सेविका की पुत्री है“ इत्यादि!)

#8327
- बहाउल्लाह

 

हे मेरे परमेश्वर! ये तेरा सेवक है और तेरे सेवक का पुत्र है जिसने तुझ पर और तेरे चिन्हों में आस्था रखी है और तेरी ओर उन्मुख हुआ है तथा जो तेरे अतिरिक्त अन्य सब कुछ से अनासक्त हो चुका है। तू सत्य ही उनमें से है जो दया करते हैं, परम दयालु हैं।

हे तू, जो मनुष्यों के पापों को क्षमा करता है और उनके दोषों पर पर्दा डालता है, इसके साथ वैसा ही व्यवहार कर, जैसा कि तेरी अक्षय सम्पदाओं के स्वर्ग और तेरी कृपा के महासागर को शोभा देता है। अपनी उस सर्वातीत दया की परिधि में, जो धरती और स्वर्ग की स्थापना से पहले भी विद्यमान थी, इसे प्रवेश दे। तेरे अतिरिक्त अन्य कोई परमेश्वर नहीं है, तू ही है सदा क्षमाशील; परम उदार !

(तब वह छः बार ’अल्ला-ओ-आभा‘ के पावन नाम का उच्चारण करे और उसके बाद 19 बार नीचे दिये गये छन्दों का पाठ करे।)

हम सब सत्य ही, प्रभु की आराधना करते हैं। हम सब सत्य ही, प्रभु के सम्मुख नमन करते हैं। हम सब सत्य ही, प्रभु के प्रति आस्थावान हैं। हम सब सत्य ही, प्रभु की स्तुति करते हैं। हम सब सत्य ही, प्रभु को धन्यवाद देते हैं। हम सब सत्य ही, प्रभु की इच्छा के प्रति धैर्यवान हैं ।

(यदि दिवंगत आत्मा नारी है, तो प्रार्थना करने वाला कहे ”यह तेरी सेविका और तेरी सेविका की पुत्री है“ इत्यादि!)

#8329
- बहाउल्लाह

 

हे मेरे परमेश्वर! ये तेरा सेवक है और तेरे सेवक का पुत्र है जिसने तुझ पर और तेरे चिन्हों में आस्था रखी है और तेरी ओर उन्मुख हुआ है तथा जो तेरे अतिरिक्त अन्य सब कुछ से अनासक्त हो चुका है। तू सत्य ही उनमें से है जो दया करते हैं, परम दयालु हैं।

हे तू, जो मनुष्यों के पापों को क्षमा करता है और उनके दोषों पर पर्दा डालता है, इसके साथ वैसा ही व्यवहार कर, जैसा कि तेरी अक्षय सम्पदाओं के स्वर्ग और तेरी कृपा के महासागर को शोभा देता है। अपनी उस सर्वातीत दया की परिधि में, जो धरती और स्वर्ग की स्थापना से पहले भी विद्यमान थी, इसे प्रवेश दे। तेरे अतिरिक्त अन्य कोई परमेश्वर नहीं है, तू ही है सदा क्षमाशील; परम उदार !

(तब वह छः बार ’अल्ला-ओ-आभा‘ के पावन नाम का उच्चारण करे और उसके बाद 19 बार नीचे दिये गये छन्दों का पाठ करे।)

हम सब सत्य ही, प्रभु की आराधना करते हैं। हम सब सत्य ही, प्रभु के सम्मुख नमन करते हैं। हम सब सत्य ही, प्रभु के प्रति आस्थावान हैं। हम सब सत्य ही, प्रभु की स्तुति करते हैं। हम सब सत्य ही, प्रभु को धन्यवाद देते हैं। हम सब सत्य ही, प्रभु की इच्छा के प्रति धैर्यवान हैं ।

(यदि दिवंगत आत्मा नारी है, तो प्रार्थना करने वाला कहे ”यह तेरी सेविका और तेरी सेविका की पुत्री है“ इत्यादि!)

#8332
- बहाउल्लाह

 

हे मेरे परमेश्वर! ये तेरा सेवक है और तेरे सेवक का पुत्र है जिसने तुझ पर और तेरे चिन्हों में आस्था रखी है और तेरी ओर उन्मुख हुआ है तथा जो तेरे अतिरिक्त अन्य सब कुछ से अनासक्त हो चुका है। तू सत्य ही उनमें से है जो दया करते हैं, परम दयालु हैं।

हे तू, जो मनुष्यों के पापों को क्षमा करता है और उनके दोषों पर पर्दा डालता है, इसके साथ वैसा ही व्यवहार कर, जैसा कि तेरी अक्षय सम्पदाओं के स्वर्ग और तेरी कृपा के महासागर को शोभा देता है। अपनी उस सर्वातीत दया की परिधि में, जो धरती और स्वर्ग की स्थापना से पहले भी विद्यमान थी, इसे प्रवेश दे। तेरे अतिरिक्त अन्य कोई परमेश्वर नहीं है, तू ही है सदा क्षमाशील; परम उदार !

(तब वह छः बार ’अल्ला-ओ-आभा‘ के पावन नाम का उच्चारण करे और उसके बाद 19 बार नीचे दिये गये छन्दों का पाठ करे।)

हम सब सत्य ही, प्रभु की आराधना करते हैं। हम सब सत्य ही, प्रभु के सम्मुख नमन करते हैं। हम सब सत्य ही, प्रभु के प्रति आस्थावान हैं। हम सब सत्य ही, प्रभु की स्तुति करते हैं। हम सब सत्य ही, प्रभु को धन्यवाद देते हैं। हम सब सत्य ही, प्रभु की इच्छा के प्रति धैर्यवान हैं ।

(यदि दिवंगत आत्मा नारी है, तो प्रार्थना करने वाला कहे ”यह तेरी सेविका और तेरी सेविका की पुत्री है“ इत्यादि!)

#8334
- बहाउल्लाह

 

हे मेरे परमेश्वर! ये तेरा सेवक है और तेरे सेवक का पुत्र है जिसने तुझ पर और तेरे चिन्हों में आस्था रखी है और तेरी ओर उन्मुख हुआ है तथा जो तेरे अतिरिक्त अन्य सब कुछ से अनासक्त हो चुका है। तू सत्य ही उनमें से है जो दया करते हैं, परम दयालु हैं।

हे तू, जो मनुष्यों के पापों को क्षमा करता है और उनके दोषों पर पर्दा डालता है, इसके साथ वैसा ही व्यवहार कर, जैसा कि तेरी अक्षय सम्पदाओं के स्वर्ग और तेरी कृपा के महासागर को शोभा देता है। अपनी उस सर्वातीत दया की परिधि में, जो धरती और स्वर्ग की स्थापना से पहले भी विद्यमान थी, इसे प्रवेश दे। तेरे अतिरिक्त अन्य कोई परमेश्वर नहीं है, तू ही है सदा क्षमाशील; परम उदार !

(तब वह छः बार ’अल्ला-ओ-आभा‘ के पावन नाम का उच्चारण करे और उसके बाद 19 बार नीचे दिये गये छन्दों का पाठ करे।)

हम सब सत्य ही, प्रभु की आराधना करते हैं। हम सब सत्य ही, प्रभु के सम्मुख नमन करते हैं। हम सब सत्य ही, प्रभु के प्रति आस्थावान हैं। हम सब सत्य ही, प्रभु की स्तुति करते हैं। हम सब सत्य ही, प्रभु को धन्यवाद देते हैं। हम सब सत्य ही, प्रभु की इच्छा के प्रति धैर्यवान हैं ।

(यदि दिवंगत आत्मा नारी है, तो प्रार्थना करने वाला कहे ”यह तेरी सेविका और तेरी सेविका की पुत्री है“ इत्यादि!)

#8339
- बहाउल्लाह

 

हे ईश्वर! मेरे परमेश्वर! निश्चय ही तेरा यह सेवक तेरी दिव्य सर्वोच्चता के सम्मुख विनीत, तेरी एकता के द्वार पर विनम्र है; इसने तुझमें और तेरे श्लोकों में विश्वास किया, तेरे पावन शब्दों का साक्ष्य दिया, तेरे प्रेम के प्रकाश से इसका पथ आलोकित हुआ, तेरे ज्ञान के महासागर की अतल गहराइयों में जो खोया रहा, जो तेरे पवन-झकोरों की ओर बढ़ा, जिसने तुझ पर भरोसा किया, जो तेरी ओर उन्मुख हुआ, जिसने तेरी आराधना की और जो तेरी क्षमा के लिये आश्वस्त है।

इसने अपना भौतिक चोला छोड़ दिया है और इस चाह के साथ कि तुझसे मिलन होगा, अमरता के साम्राज्य की ओर उड़ चला है।

दिवंगतों के लिये ईश्वर! इसे महिमामंडित कर, अपनी सर्वोच्च दया के मंडप तले इसे आश्रय दे, अपने महिमाशाली स्वर्ग में प्रवेश करा और अपनी गुलाब वाटिका में इसके अस्तित्व को सुनिश्चित कर, ताकि रहस्यों के लोक में यह प्रकाश-सिंधु में निमग्न हो जाये। सत्य ही तू है उदार, शक्तिशाली, क्षमादाता और दानी।

हे मेरे परमेश्वर! हे तू पापों को क्षमा करने वाले ! वरदाता ! व्याधियों को दूर करने वाले ! सत्य ही, मैं तुझसे याचना करता हूँ कि जो इस भौतिक देहरूपी चोले को छोड़कर उस आध्यात्मिक लोक में आरोहण कर गये हैं उनके पापों को क्षमा कर, हे मेरे प्रभु!

हे मेरे प्रभु! उन्हें भूलों से मुक्त करके पवित्र कर दे, उनके शोक का निवारण कर और उनके अंधकार को ज्योति का रूप दे दे। उन्हें आनन्द उद्यान में प्रवेश दे, परम पावन जल से उन्हें स्वच्छ कर दे और उन्हें वरदान दे कि वे उस पर्वत शिखर पर तेरे वैभव के दर्शन कर सकें।

#8320
- अब्दुल-बहा

 

पति के लिये

हे मेरे ईश्वर! मेरे परमेश्वर! तेरी यह सेविका, अपना भरोसा तुझ पर रखकर, तेरी ओर उन्मुख हो कर, तुझसे याचना करती हुई तुझे पुकार रही है कि अपनी स्वर्गिक कृपा उस पर बरसा दे, उसके समकक्ष अपने आध्यात्मिक रहस्यों को प्रकट कर दे और उस पर अपना परमात्म प्रकाश डाल। हे मेरे स्वामिन्! मेरे पति की आँखों को देखने की शक्ति प्रदान कर। तू उसके हृदय को अपने ज्ञान के प्रकाश से आनन्दित कर दे, तू उसका मन अपने ज्योतिर्मय सौन्दर्य की ओर आकर्षित कर ले, उसकी चेतना को अपनी भव्यता के दर्शन करा उसे उल्लसित कर दे। हे प्रभु! उसकी आँखों के सामने से परदा हटा दे, उस पर अपनी भरपूर कृपा की वर्षा कर, अपने प्रेम की मदिरा से उसे दीवाना बना दे, उसे अपने देवदूतों में से एक बना दे जो चलते तो धरा पर हैं लेकिन जिनकी आत्माएँ परमोच्च स्वर्गों मेंं उड़ती हैं। उसे तेरे जनो के मध्य तेरी प्रज्ञा के प्रकाश से चमकता हुआ देदीप्यमान दीपक बना दे। वस्तुतः तू अनमोल, सदा कृपालु, मुक्तहस्त दाता है।

#8322
- अब्दुल-बहा

 

प्रभुधर्म की विजय

जयघोष हो तेरे नाम का, हे नाथ, मेरे परमेश्वर! अंधियारा छा गया है समस्त भू पर और दुष्ट शक्तियों ने घेर लिया है सभी राष्ट्रो को। इसमें भी मैं देखता हूँ तेरे ही विवेक को और पाता हूँ तेरे विधान की चमक।

वे जो तुझसे दूर आवरण में लिपटे हैं, समझ लिया है उन्होंने कि शक्ति है उनमें तेरे प्रकाश को बुझा देने की और तेरी अग्नि को मिटा देने की और तेरी कृपा के पवन झकोरों को रोक लेने की। किन्तु नहीं, तेरी प्रभुता मेरी साक्षी है यदि प्रत्येक विपदा तेरे विवेक और प्रत्येक अग्नि-परीक्षा तेरे मंगल-विधान का संवाहक नहीं बनाई गई होती तो हमारा विरोध करने का साहस कोई भी नहीं दिखाता, भले ही धरती तथा स्वर्ग की समस्त शक्तियाँ हमारे विरोध में खड़ी हो जातीं। यदि मैं तेरे विवेक के अद्भुत रहस्यों को, जो खुले पड़े हैं सम्मुख मेरे, प्रकट कर देता तो तेरे शत्रुओं के साम्राज्य विदीर्ण जाते। अतः, महिमा हो तेरे नाम की, हे मेरे परमेश्वर! याचना करता हूँ मैं तुझसे, तेरे परम महान नाम के द्वारा कि जो तुझसे प्रेम करते हैं, उन्हें अपने उस विधान के चारो ओर एकत्र कर जो तेरी इच्छा की सद्कृपा से प्रवाहित है, और उनके लिये वह भेज जो उनके हृदयों को आश्वस्त करे।

तू जो भी चाहता है वह करने में समर्थ है। तू ही वस्तुतः, संकट में सहायक, स्वयंजीवी है।

#8355
- बहाउल्लाह

 

जयघोष हो तेरे नाम का, हे नाथ, मेरे परमेश्वर! अंधियारा छा गया है समस्त भू पर और दुष्ट शक्तियों ने घेर लिया है सभी राष्ट्रो को। इसमें भी मैं देखता हूँ तेरे ही विवेक को और पाता हूँ तेरे विधान की चमक।

वे जो तुझसे दूर आवरण में लिपटे हैं, समझ लिया है उन्होंने कि शक्ति है उनमें तेरे प्रकाश को बुझा देने की और तेरी अग्नि को मिटा देने की और तेरी कृपा के पवन झकोरों को रोक लेने की। किन्तु नहीं, तेरी प्रभुता मेरी साक्षी है यदि प्रत्येक विपदा तेरे विवेक और प्रत्येक अग्नि-परीक्षा तेरे मंगल-विधान का संवाहक नहीं बनाई गई होती तो हमारा विरोध करने का साहस कोई भी नहीं दिखाता, भले ही धरती तथा स्वर्ग की समस्त शक्तियाँ हमारे विरोध में खड़ी हो जातीं। यदि मैं तेरे विवेक के अद्भुत रहस्यों को, जो खुले पड़े हैं सम्मुख मेरे, प्रकट कर देता तो तेरे शत्रुओं के साम्राज्य विदीर्ण जाते। अतः, महिमा हो तेरे नाम की, हे मेरे परमेश्वर! याचना करता हूँ मैं तुझसे, तेरे परम महान नाम के द्वारा कि जो तुझसे प्रेम करते हैं, उन्हें अपने उस विधान के चारो ओर एकत्र कर जो तेरी इच्छा की सद्कृपा से प्रवाहित है, और उनके लिये वह भेज जो उनके हृदयों को आश्वस्त करे।

तू जो भी चाहता है वह करने में समर्थ है। तू ही वस्तुतः, संकट में सहायक, स्वयंजीवी है।

#8361
- बहाउल्लाह

 

जयघोष हो तेरे नाम का, हे नाथ, मेरे परमेश्वर! अंधियारा छा गया है समस्त भू पर और दुष्ट शक्तियों ने घेर लिया है सभी राष्ट्रो को। इसमें भी मैं देखता हूँ तेरे ही विवेक को और पाता हूँ तेरे विधान की चमक।

वे जो तुझसे दूर आवरण में लिपटे हैं, समझ लिया है उन्होंने कि शक्ति है उनमें तेरे प्रकाश को बुझा देने की और तेरी अग्नि को मिटा देने की और तेरी कृपा के पवन झकोरों को रोक लेने की। किन्तु नहीं, तेरी प्रभुता मेरी साक्षी है यदि प्रत्येक विपदा तेरे विवेक और प्रत्येक अग्नि-परीक्षा तेरे मंगल-विधान का संवाहक नहीं बनाई गई होती तो हमारा विरोध करने का साहस कोई भी नहीं दिखाता, भले ही धरती तथा स्वर्ग की समस्त शक्तियाँ हमारे विरोध में खड़ी हो जातीं। यदि मैं तेरे विवेक के अद्भुत रहस्यों को, जो खुले पड़े हैं सम्मुख मेरे, प्रकट कर देता तो तेरे शत्रुओं के साम्राज्य विदीर्ण जाते। अतः, महिमा हो तेरे नाम की, हे मेरे परमेश्वर! याचना करता हूँ मैं तुझसे, तेरे परम महान नाम के द्वारा कि जो तुझसे प्रेम करते हैं, उन्हें अपने उस विधान के चारो ओर एकत्र कर जो तेरी इच्छा की सद्कृपा से प्रवाहित है, और उनके लिये वह भेज जो उनके हृदयों को आश्वस्त करे।

तू जो भी चाहता है वह करने में समर्थ है। तू ही वस्तुतः, संकट में सहायक, स्वयंजीवी है।

#8367
- बहाउल्लाह

 

महिमा हो तेरी, हे स्वामी, तू जिसने अपने आदेश की शक्ति से सभी सृजित वस्तुओं को अस्तित्व में लाया है।

हे स्वामी! जिन्हांने तेरे अतिरिक्त अन्य सब कुछ त्याग दिया है, उनकी सहायता कर और उन्हें महान विजय प्रदान कर। हे स्वामी, अपने सेवकों की सहायता करने के लिये, उन्हें सहयोग और सहायता प्रदान करने के लिये, उन्हें महिमा से आच्छादित करने के लिये, उन्हें सम्मान एवं उच्चता प्रदान करने के लिये, उन्हें समृद्ध बनाने के लिये और अद्भुत विजय के द्वारा उन्हें विजयी बनाने के लिये, ऐसे देवदूतां को नीचे भेज जो स्वर्ग में और धरती पर तथा जो कुछ भी इनके मध्य है, में है।

तू उनका स्वामी है, स्वर्ग और धरती का स्वामी है और स्वामी है समस्त लोकों का। हे प्रभु, इन सेवकां की शक्ति के माध्यम से इस धर्म को बल प्रदान कर और संसार के सभी लोगों पर प्रभावी होने में इनकी सहायता कर; क्यांकि, वे सत्य ही, तेरे ऐसे सेवक हैं जिन्होंने स्वयं को तेरे अतिरिक्त अन्य सभी से अनासक्त कर लिया है और वस्तुतः तू सच्चे अनुयायियों का रक्षक है।

हे स्वामी, अनुदान दे कि तेरे इस अलंघनीय धर्म के प्रति अपनी निष्ठा के माध्यम से उनके हृदय, उन सभी वस्तुओं से अधिक शक्तिशाली बन जायें, जो स्वर्ग में और धरती पर, तथा जो कुछ भी इनके मध्य है, में है; और हे स्वामी, अपनी अद्भुत शक्ति के चिन्हां से उनके हाथों को बलशाली बना ताकि वे समस्त मानवजाति के समक्ष तेरी शक्ति प्रकट कर सकें।

#8360
- बाब

 

हे नाथ अपनी दिव्य एकता के वृक्ष के शीघ्र विकास का विधान कर। हे स्वामी, अपनी सुप्रसन्नता की जलधार से इसे सींच और अपने दिव्य आश्वासन के प्रकटीकरण से इससे ऐसे फल उपजा जैसा तू अपने यशगान और महिमागान के लिये, अपनी स्तुति और आभार के लिये, अपने नाम के जयघोष के लिये, अपने सार तत्व की एकता के गुणगान के लिये और अपनी आराधना के समर्पण के लिये चाहता है! सब कुछ केवल तेरी मुट्ठी में है। परम सौभाग्यशाली हैं वे जिनके रक्त का तूने अपने अस्तित्व के वृक्ष को सींचने के लिये और अपनी पावन और अखण्ड वाणी को यशस्वी बनाने के लिये चुना है।

#8363
- बाब

 

हे नाथ! धरती के सभी लोगां को अपने धर्म के स्वर्ग में प्रवेश पाने में सहायता कर, ताकि अस्तित्व में लाया गया कोई भी प्राणी, तेरी सुप्रसन्नता की सीमाओं से बाहर न रह पाये। अनन्तकाल से, तू वह करने में समर्थ रहा है जो तुझे प्रिय है और जो तेरी इच्छा है।

#8365
- बाब

 

हे नाथ! धरती के सभी लोगां को अपने धर्म के स्वर्ग में प्रवेश पाने में सहायता कर, ताकि अस्तित्व में लाया गया कोई भी प्राणी, तेरी सुप्रसन्नता की सीमाओं से बाहर न रह पाये। अनन्तकाल से, तू वह करने में समर्थ रहा है जो तुझे प्रिय है और जो तेरी इच्छा है।

#8370
- बाब

 

वह परमेश्वर है! हे नाथ मेरे ईश्वर, मेरे परम प्रियतम! ये वे सेवक हैं जिन्होंने तेरी पुकार सुनी है, तेरी वाणी, तेरे आह्वान पर ध्यान दिया है और विश्वास किया है तुझमें; ये साक्षी रहे हैं तेरी अद्भुत लीला के, स्वीकारा है इन्होंने तेरे प्रमाणों को और पुष्ट किया है तेरे साक्ष्यों को; राह पकड़ी है तेरी, अनुसरण किया है तेरे मार्गदर्शन का, पाये हैं रहस्य तेरे और जाना है मंत्र तेरे ग्रंथ का; पाया है स्रोत तेरी पातियों का, भाव तेरे संदेशों का और तेरे प्रकाशन और भव्यता के वस्त्र का आंचल दृढ़ता से जिन्होंने थाम लिया है; जिनके पग अडिग हैं तेरी संविदा में और हृदय दृढ़ हैं तेरे प्रमाण में।

नाथ! तू उनके हृदय में अपने दिव्य आकर्षण की लौ जला दे और वर दे कि प्रेम और ज्ञान का पंछी उनके हृदय में चहके। वर दे कि वे तेरे ऐसे समर्थ चिन्ह बनें, ऐसी जगमगाती ध्वजायें बनें और परिपूर्णता को प्राप्त हों जैसे तेरे शब्द परिपूर्ण हैं। उन्नत कर तू अपना धर्म उनके माध्यम से, फहरा अपनी धर्म-ध्वजा और दूर-दूर तक अपनी अद्भुत लीला का विस्तार कर। बना अपनी वाणी को विजयी उनके माध्यम से और अपने प्रियजनों के मेरूदंड सशक्त कर। मुक्त कर उनकी वाणी को तेरे यशगान के लिये, प्रेरित कर उन्हें तू अपनी पावन इच्छा के पालन के लिये। अपने पावन साम्राज्य में उनके मुखड़ों को आलोकित कर और अपने धर्म की विजय के लिये उठ खड़े होने में उनकी सहायता करके उनका आनन्द सार्थक कर। स्वामिन्, हम दुर्बल हैं, हमें अपनी पावनता की सुरभि का प्रसार करने की शक्ति दे; दरिद्र हैं हम, अपनी दिव्य एकता के कोष से हमें समृद्ध बना; निर्वस्त्र हैं हम, अपनी कृपा के वस्त्र हमें पहना; पापी हैं हम, अपनी कृपालुता, अपने अनुग्रह और अपनी क्षमाशीलता से हमारे पापों को क्षमा कर। तू ही वस्तुतः; सम्बल देने वाला, सहायक, कृपालु, सामर्थ्यशाली और शक्तिशाली है। महिमाओं की महिमा उन पर विराजती है, जो हैं दृढ़ और अटल।

#8368
- अब्दुल-बहा

 

प्रभात

मैं तेरी शरण में जाग उठा हूँ, हे मेरे ईश्वर! और जो उस शरण की कामना करे उसके लिये उचित है कि वह तेरे संरक्षण के अभय स्थल और तेरी सुरक्षा के दुर्ग में निवास करे। मेरे अन्तर्मन को भी, हे मेरे नाथ! अपने प्राकट्य के अरुणोदय की आभाओं द्वारा वैसे ही आलोकित कर दे जिस प्रकार तूने मेरे बाह्य अस्तित्व को अपनी कृपा के प्रभात-प्रकाश द्वारा प्रकाशित किया है।

#8348
- बहाउल्लाह

 

हे मेरे परमेश्वर और मेरे नाथ! मैं तेरा सेवक और तेरे सेवक का पुत्र हूँ। इस अरुणोदय बेला में मैं अपनी शय्या से जाग उठा हूँ, जब तेरे आदेश की पुस्तक में विहित विधान के अनुसार ही तेरी एकमेवता का सूर्य तेरी इच्छा के क्षितिज से प्रकट होकर जगमगाया है और उसने सम्पूर्ण विश्व पर अपनी आभा बिखेर दी है।

स्तुति हो तेरी, हे मेरे परमेश्वर, कि हम तेरे ज्ञान के आलोकपुंज के प्रति जाग उठे हैं। हमारी लिये वह भेज, हे मेरे नाथ! जो हमें इस योग्य बना दे कि हम तेरे सिवा अन्य सभी से अनासक्त हो सकें, जो हमें तेरे सिवा सभी आसक्तियों से मुक्त होने में समर्थ बनाये। मेरे लिये और जो मेरे प्रिय हैं, स्त्री-पुरुष सबके लिये समान रूप से, इस लोक और आने वाले लोक के शुभ और कल्याण का विधान कर। अपने अचूक संरक्षण के द्वारा हमें सुरक्षित रख उन सबसे जिन्हें तूने ही आसुरी प्रवृत्तियों का मूर्त्तरूप बनाया है, हे तू सम्पूर्ण सृष्टि के परमप्रिय और सम्पूर्ण विश्व की कामना! तू जो चाहे करने में समर्थ है। तू सत्य ही, सर्वशक्तिशाली, संकटमोचन स्वयमाधार है।

उसे आशीष दे हे ईश्वर, मेरे परमेश्वर! जिसे तूने अपनी परम श्रेष्ठ उपाधियों का अधिष्ठाता बनाया है और जिसके द्वारा तूने पुण्यात्मा और दुष्टों के बीच का भेद प्रकट किया है। अनुग्रहपूर्वक मुझे सहायता प्रदान कर कि हम तेरी इच्छा पर चलें, तेरे प्रेम में ढलें। हे मेरे प्रभु, उन्हें आशीष दे जो तेरे शब्द और तेरे अक्षर हैं और उन्हें भी जो तेरी ओर उन्मुख हुए हैं, जिन्होंने तुझमें आस लगाई है और तेरा आह्वान सुना है। तू सत्य ही, सभी वस्तुओं का स्वामी और सम्राट है, और है सर्वोपरि।

#8349
- बहाउल्लाह

 

मैं तेरी शरण में जाग उठा हूँ, हे मेरे ईश्वर! और जो उस शरण की कामना करे उसके लिये उचित है कि वह तेरे संरक्षण के अभय स्थल और तेरी सुरक्षा के दुर्ग में निवास करे। मेरे अन्तर्मन को भी, हे मेरे नाथ! अपने प्राकट्य के अरुणोदय की आभाओं द्वारा वैसे ही आलोकित कर दे जिस प्रकार तूने मेरे बाह्य अस्तित्व को अपनी कृपा के प्रभात-प्रकाश द्वारा प्रकाशित किया है।

#8352
- बहाउल्लाह

 

हे मेरे परमेश्वर और मेरे नाथ! मैं तेरा सेवक और तेरे सेवक का पुत्र हूँ। इस अरुणोदय बेला में मैं अपनी शय्या से जाग उठा हूँ, जब तेरे आदेश की पुस्तक में विहित विधान के अनुसार ही तेरी एकमेवता का सूर्य तेरी इच्छा के क्षितिज से प्रकट होकर जगमगाया है और उसने सम्पूर्ण विश्व पर अपनी आभा बिखेर दी है।

स्तुति हो तेरी, हे मेरे परमेश्वर, कि हम तेरे ज्ञान के आलोकपुंज के प्रति जाग उठे हैं। हमारी लिये वह भेज, हे मेरे नाथ! जो हमें इस योग्य बना दे कि हम तेरे सिवा अन्य सभी से अनासक्त हो सकें, जो हमें तेरे सिवा सभी आसक्तियों से मुक्त होने में समर्थ बनाये। मेरे लिये और जो मेरे प्रिय हैं, स्त्री-पुरुष सबके लिये समान रूप से, इस लोक और आने वाले लोक के शुभ और कल्याण का विधान कर। अपने अचूक संरक्षण के द्वारा हमें सुरक्षित रख उन सबसे जिन्हें तूने ही आसुरी प्रवृत्तियों का मूर्त्तरूप बनाया है, हे तू सम्पूर्ण सृष्टि के परमप्रिय और सम्पूर्ण विश्व की कामना! तू जो चाहे करने में समर्थ है। तू सत्य ही, सर्वशक्तिशाली, संकटमोचन स्वयमाधार है।

उसे आशीष दे हे ईश्वर, मेरे परमेश्वर! जिसे तूने अपनी परम श्रेष्ठ उपाधियों का अधिष्ठाता बनाया है और जिसके द्वारा तूने पुण्यात्मा और दुष्टों के बीच का भेद प्रकट किया है। अनुग्रहपूर्वक मुझे सहायता प्रदान कर कि हम तेरी इच्छा पर चलें, तेरे प्रेम में ढलें। हे मेरे प्रभु, उन्हें आशीष दे जो तेरे शब्द और तेरे अक्षर हैं और उन्हें भी जो तेरी ओर उन्मुख हुए हैं, जिन्होंने तुझमें आस लगाई है और तेरा आह्वान सुना है। तू सत्य ही, सभी वस्तुओं का स्वामी और सम्राट है, और है सर्वोपरि।

#8353
- बहाउल्लाह

 

मैं तेरी शरण में जाग उठा हूँ, हे मेरे ईश्वर! और जो उस शरण की कामना करे उसके लिये उचित है कि वह तेरे संरक्षण के अभय स्थल और तेरी सुरक्षा के दुर्ग में निवास करे। मेरे अन्तर्मन को भी, हे मेरे नाथ! अपने प्राकट्य के अरुणोदय की आभाओं द्वारा वैसे ही आलोकित कर दे जिस प्रकार तूने मेरे बाह्य अस्तित्व को अपनी कृपा के प्रभात-प्रकाश द्वारा प्रकाशित किया है।

#8357
- बहाउल्लाह

 

हे मेरे परमेश्वर और मेरे नाथ! मैं तेरा सेवक और तेरे सेवक का पुत्र हूँ। इस अरुणोदय बेला में मैं अपनी शय्या से जाग उठा हूँ, जब तेरे आदेश की पुस्तक में विहित विधान के अनुसार ही तेरी एकमेवता का सूर्य तेरी इच्छा के क्षितिज से प्रकट होकर जगमगाया है और उसने सम्पूर्ण विश्व पर अपनी आभा बिखेर दी है।

स्तुति हो तेरी, हे मेरे परमेश्वर, कि हम तेरे ज्ञान के आलोकपुंज के प्रति जाग उठे हैं। हमारी लिये वह भेज, हे मेरे नाथ! जो हमें इस योग्य बना दे कि हम तेरे सिवा अन्य सभी से अनासक्त हो सकें, जो हमें तेरे सिवा सभी आसक्तियों से मुक्त होने में समर्थ बनाये। मेरे लिये और जो मेरे प्रिय हैं, स्त्री-पुरुष सबके लिये समान रूप से, इस लोक और आने वाले लोक के शुभ और कल्याण का विधान कर। अपने अचूक संरक्षण के द्वारा हमें सुरक्षित रख उन सबसे जिन्हें तूने ही आसुरी प्रवृत्तियों का मूर्त्तरूप बनाया है, हे तू सम्पूर्ण सृष्टि के परमप्रिय और सम्पूर्ण विश्व की कामना! तू जो चाहे करने में समर्थ है। तू सत्य ही, सर्वशक्तिशाली, संकटमोचन स्वयमाधार है।

उसे आशीष दे हे ईश्वर, मेरे परमेश्वर! जिसे तूने अपनी परम श्रेष्ठ उपाधियों का अधिष्ठाता बनाया है और जिसके द्वारा तूने पुण्यात्मा और दुष्टों के बीच का भेद प्रकट किया है। अनुग्रहपूर्वक मुझे सहायता प्रदान कर कि हम तेरी इच्छा पर चलें, तेरे प्रेम में ढलें। हे मेरे प्रभु, उन्हें आशीष दे जो तेरे शब्द और तेरे अक्षर हैं और उन्हें भी जो तेरी ओर उन्मुख हुए हैं, जिन्होंने तुझमें आस लगाई है और तेरा आह्वान सुना है। तू सत्य ही, सभी वस्तुओं का स्वामी और सम्राट है, और है सर्वोपरि।

#8358
- बहाउल्लाह

 

मैं तेरी शरण में जाग उठा हूँ, हे मेरे ईश्वर! और जो उस शरण की कामना करे उसके लिये उचित है कि वह तेरे संरक्षण के अभय स्थल और तेरी सुरक्षा के दुर्ग में निवास करे। मेरे अन्तर्मन को भी, हे मेरे नाथ! अपने प्राकट्य के अरुणोदय की आभाओं द्वारा वैसे ही आलोकित कर दे जिस प्रकार तूने मेरे बाह्य अस्तित्व को अपनी कृपा के प्रभात-प्रकाश द्वारा प्रकाशित किया है।

#8359
- बहाउल्लाह

 

हे मेरे परमेश्वर और मेरे नाथ! मैं तेरा सेवक और तेरे सेवक का पुत्र हूँ। इस अरुणोदय बेला में मैं अपनी शय्या से जाग उठा हूँ, जब तेरे आदेश की पुस्तक में विहित विधान के अनुसार ही तेरी एकमेवता का सूर्य तेरी इच्छा के क्षितिज से प्रकट होकर जगमगाया है और उसने सम्पूर्ण विश्व पर अपनी आभा बिखेर दी है।

स्तुति हो तेरी, हे मेरे परमेश्वर, कि हम तेरे ज्ञान के आलोकपुंज के प्रति जाग उठे हैं। हमारी लिये वह भेज, हे मेरे नाथ! जो हमें इस योग्य बना दे कि हम तेरे सिवा अन्य सभी से अनासक्त हो सकें, जो हमें तेरे सिवा सभी आसक्तियों से मुक्त होने में समर्थ बनाये। मेरे लिये और जो मेरे प्रिय हैं, स्त्री-पुरुष सबके लिये समान रूप से, इस लोक और आने वाले लोक के शुभ और कल्याण का विधान कर। अपने अचूक संरक्षण के द्वारा हमें सुरक्षित रख उन सबसे जिन्हें तूने ही आसुरी प्रवृत्तियों का मूर्त्तरूप बनाया है, हे तू सम्पूर्ण सृष्टि के परमप्रिय और सम्पूर्ण विश्व की कामना! तू जो चाहे करने में समर्थ है। तू सत्य ही, सर्वशक्तिशाली, संकटमोचन स्वयमाधार है।

उसे आशीष दे हे ईश्वर, मेरे परमेश्वर! जिसे तूने अपनी परम श्रेष्ठ उपाधियों का अधिष्ठाता बनाया है और जिसके द्वारा तूने पुण्यात्मा और दुष्टों के बीच का भेद प्रकट किया है। अनुग्रहपूर्वक मुझे सहायता प्रदान कर कि हम तेरी इच्छा पर चलें, तेरे प्रेम में ढलें। हे मेरे प्रभु, उन्हें आशीष दे जो तेरे शब्द और तेरे अक्षर हैं और उन्हें भी जो तेरी ओर उन्मुख हुए हैं, जिन्होंने तुझमें आस लगाई है और तेरा आह्वान सुना है। तू सत्य ही, सभी वस्तुओं का स्वामी और सम्राट है, और है सर्वोपरि।

#8362
- बहाउल्लाह

 

मैं तेरी शरण में जाग उठा हूँ, हे मेरे ईश्वर! और जो उस शरण की कामना करे उसके लिये उचित है कि वह तेरे संरक्षण के अभय स्थल और तेरी सुरक्षा के दुर्ग में निवास करे। मेरे अन्तर्मन को भी, हे मेरे नाथ! अपने प्राकट्य के अरुणोदय की आभाओं द्वारा वैसे ही आलोकित कर दे जिस प्रकार तूने मेरे बाह्य अस्तित्व को अपनी कृपा के प्रभात-प्रकाश द्वारा प्रकाशित किया है।

#8366
- बहाउल्लाह

 

हे मेरे परमेश्वर और मेरे नाथ! मैं तेरा सेवक और तेरे सेवक का पुत्र हूँ। इस अरुणोदय बेला में मैं अपनी शय्या से जाग उठा हूँ, जब तेरे आदेश की पुस्तक में विहित विधान के अनुसार ही तेरी एकमेवता का सूर्य तेरी इच्छा के क्षितिज से प्रकट होकर जगमगाया है और उसने सम्पूर्ण विश्व पर अपनी आभा बिखेर दी है।

स्तुति हो तेरी, हे मेरे परमेश्वर, कि हम तेरे ज्ञान के आलोकपुंज के प्रति जाग उठे हैं। हमारी लिये वह भेज, हे मेरे नाथ! जो हमें इस योग्य बना दे कि हम तेरे सिवा अन्य सभी से अनासक्त हो सकें, जो हमें तेरे सिवा सभी आसक्तियों से मुक्त होने में समर्थ बनाये। मेरे लिये और जो मेरे प्रिय हैं, स्त्री-पुरुष सबके लिये समान रूप से, इस लोक और आने वाले लोक के शुभ और कल्याण का विधान कर। अपने अचूक संरक्षण के द्वारा हमें सुरक्षित रख उन सबसे जिन्हें तूने ही आसुरी प्रवृत्तियों का मूर्त्तरूप बनाया है, हे तू सम्पूर्ण सृष्टि के परमप्रिय और सम्पूर्ण विश्व की कामना! तू जो चाहे करने में समर्थ है। तू सत्य ही, सर्वशक्तिशाली, संकटमोचन स्वयमाधार है।

उसे आशीष दे हे ईश्वर, मेरे परमेश्वर! जिसे तूने अपनी परम श्रेष्ठ उपाधियों का अधिष्ठाता बनाया है और जिसके द्वारा तूने पुण्यात्मा और दुष्टों के बीच का भेद प्रकट किया है। अनुग्रहपूर्वक मुझे सहायता प्रदान कर कि हम तेरी इच्छा पर चलें, तेरे प्रेम में ढलें। हे मेरे प्रभु, उन्हें आशीष दे जो तेरे शब्द और तेरे अक्षर हैं और उन्हें भी जो तेरी ओर उन्मुख हुए हैं, जिन्होंने तुझमें आस लगाई है और तेरा आह्वान सुना है। तू सत्य ही, सभी वस्तुओं का स्वामी और सम्राट है, और है सर्वोपरि।

#8369
- बहाउल्लाह

 

परीक्षा और सहायता

हे ईश्वर, मेरे परमेश्वर! अपनी कृपा और उदारता से मुझे शोक-मुक्त कर दे और अपनी सत्ता और शक्ति से मेरी वेदना को दूर कर दे। हे मेरे परमेश्वर! देख रहा है तू कि मैं ऐसे समय में तेरी ओर उन्मुख हुआ हूँ जब दुःखों ने मुझे चारों ओर से घेर लिया है। तू स्वामी है समस्त अस्तित्व का, सभी गोचर अगोचर पदार्थों पर तेरी छत्रछाया है। मैं याचना करता हूँ तुझसे, तेरे उस नाम पर, जिसके द्वारा तूने मानव-हृदय और आत्माओं को अपने अधीन किया है। मैं याचना करता हूँ तेरी दया के महासागर की उन तरंगों के नाम पर और तेरी असीम कृपालुता के दिवानक्षत्र की प्रभा के नाम पर, कि तू मेरी गिनती उनमें कर जिन्हें कोई भी वस्तु तेरी ओर उन्मुख होने से रोक नहीं पाई है। हे तू जो सभी नामों का स्वामी, रचयिता है सभी स्वर्गों का। हे मेरे स्वामी तू वह सब देख रहा है जो तेरे दिवसों में मुझ पर टूट पड़ा है। उसके द्वारा मैं तुझसे प्रार्थना करता हूँ जो तेरे नामों का अरुणोदय और तेरे गुणों का उद्गम स्थल है, कि मेरे लिये उसका विधान कर जो मुझे तेरी सेवा में उठ खड़े होने और तेरी महिमा का गान करने के योग्य बना दे। वस्तुतः, तू ही है सर्वसामर्थ्यवान, सर्वशक्तिशाली, जो सब की प्रार्थना सुनता है। तेरे मुखारविन्द के प्रकाश के नाम पर मैं तुझसे याचना करता हूँ कि मुझे मेरे कार्यों में सिद्धि दे, मुझे ऋण-मुक्त कर और मेरी आवश्यकताओं को पूरा कर। तू वह है, जिसकी शक्ति और जिसकी सत्ता का प्रमाण प्रत्येक वाणी ने दिया है, जिसकी विभूति और जिसकी प्रभुसत्ता को हर विवेकयुक्त हृदय ने स्वीकारा है। तेरे अतिरिक्त अन्य कोई ईश्वर नहीं, जो सब की सुनता है, सब का दुःख हरता है।

#8333
- बहाउल्लाह

 

क्या ईश्वर के अतिरिक्त कठिनाइयां को दूर करने वाला अन्य कोई है? कह दो, ईश्वर का गुणगान हो! वही ईश्वर है! सभी उसके सेवक हैं तथा सभी उसके आदेश से प्रतिबन्धित हैं।

#8335
- बाब

 

हे मेरे परमेश्वर! मैं तुझे तेरी शक्ति की सौगंध देता हूँ कि परीक्षाओं की घड़ी में मुझको कोई क्षति न होने दे और असावधानी के पलों में अपनी प्रेरणा से मेरे पगों को तू सही राह दिखा। तू ही है परमेश्वर, जैसा चाहे वैसा करने में समर्थ; तेरी इच्छा की राह में कोई बाधा नहीं बन सकता है।

#8336
- बाब

 

हे स्वामी! तू प्रत्येक वेदना का हर्ता है और प्रत्येक व्याधि को दूर करने वाला है। तू वह है जो प्रत्येक शोक को दूर करता है, प्रत्येक दास को मुक्त करता है और प्रत्येक आत्मा का उद्धारकर्ता है। हे स्वामी! अपनी दया के द्वारा मुझे मुक्ति प्रदान कर और अपने ऐसे सेवकां में गिन जिन्हांने मोक्ष पा लिया है।

#8337
- बाब

 

कहो, परमेश्वर सर्वोपरि परिपूरक है, समस्त स्वर्गों में और धरती पर ऐसा कुछ भी नहीं, जिसे नहीं कर सकता हो वह पूरा। वस्तुतः वह स्वयं में ज्ञाता, अवलम्बनदाता, सर्वशक्तिशाली है।

#8338
- बाब

 

हे मेरे नाथ, मेरे परमात्मन्! विपत्ति में मेरा आश्रय, आपदा में मेरे रक्षक और विश्वास, एकाकीपन में मेरे सहचर, वेदना में मेरी सांत्वना और अकेलेपन में मेरे एक स्नेहिल सखा, मेरे दुःखों की पीड़ा को हरने वाले और मेरे पापों को क्षमा करने वाले!

मैं पूरी तरह तेरी ओर उन्मुख हूँ और अपने समर्पित हृदय से, अपने मन में और अपनी वाणी से तुझसे अत्यन्त भावभीने शब्दों में याचना करता हूँ कि मुझे उन सबसे बचा जो तेरी दिव्य एकता के इस युगचक्र में तेरी इच्छा के विपरीत हैं, मुझे उन सभी कलुषों से निर्मल कर जो तेरे कृपावृक्ष की छाँव पा सकने में बाधक हैं ताकि मैं निष्कलुष, निष्पाप रह सकूँ।

दया कर, हे स्वामी! निर्बल पर, स्वस्थ कर रोगी को और तृप्त कर जलती तृषा को। हर्षित कर उस वक्ष को जिसमें तेरे प्रेम की ज्वाला सुलगती हो, उसे अपने स्वर्गिक प्रेम की लौ और चेतना से प्रज्ज्वलित कर।

दिव्य एकता के इन वितानों को अपनी पावनता के वस्त्रों से सजा और अपनी अनुकम्पा का ताज मुझे पहना दे।

मेरे मुखड़े को अपनी कृपा के प्रभामंडल से उद्भासित कर और अपनी इस पावन देहरी की सेवा करने में कृपापूर्वक मेरी सहायता कर।

मेरे हृदय को अपने प्रणियों के प्रेम से आप्लावित कर दे ताकि मैं तेरी दया का चिन्ह, तेरे अनुग्रह का प्रतीक और तेरे प्रियजनों में स्नेह-भावना बढ़ाने वाला बन जाऊँ, तेरे प्रति समर्पित हो तेरा ही स्मरण करूँ, अपने अहम् को भूलकर जो कुछ तेरा है उसके प्रति सदा सजग रहूँ।

हे ईश्वर, मेरे परमेश्वर ! अपनी क्षमा और अपने अनुग्रह के पवन-झकोरों को मुझ तक आने से न रोक और मुझे अपनी सहायता और कृपा के स्रोतों से वंचित मत कर।

अपनी सुरक्षा के पंखों की छाया में मुझे नीड़ बनाने दे और मुझ पर अपने सर्वरक्षक नेत्र की कृपादृष्टि डाल। मेरी वाणी को जड़ता से मुक्त कर कि तेरे नाम की महिमा गा सकूँ, ताकि मेरी वाणी विराट सभाओं में उच्च स्वर में निनादित हो और मेरे होठों से तेरी स्तुति का प्रबल प्रवाह बह निकले।

तू सत्य ही अनुकम्पाशाली, महिमावान, समर्थ और सर्वशक्तिमान है।

#8340
- अब्दुल-बहा

 

वह करुणामय, सर्वकृपालु है! हे ईश्वर, मेरे परमेश्वर! तू मुझे देखता है, तू मुझे जानता है, तू ही मेरी शरण और मेरा आश्रय है, मैने तेरे अतिरिक्ति किसी और की न कामना की है, न करूंगा। तेरे प्रेम-पथ के सिवा मैंने अन्य किसी पथ पर न पाँव रखा है न रखूँगा। निराशा की अंधियारी रात में मेरी आँखें, अपेक्षा और आशा से भरी हुई, तेरे असीम अनुग्रह के प्रभात की ओर लगी हैं और अरुणोदय की बेला में मेरी मुरझाई हुई आत्मा तेरे सौन्दर्य और तेरी परिपूर्णता के स्मरण से नवस्फूर्ति और शक्ति प्राप्त करती है। जिसे तेरी दया का सहारा है वह एक बूंद भी हो तो असीम सिंधु बन जायेगा और जिस पर तेरी स्नेहिल कृपालुता का उमड़ता प्रवाह सहायक हो वह तुच्छ धूलकण होकर भी तेजस्वी नक्षत्र सा जगमगायेगा।

हे तू विशुद्धता की चेतना ! हे तू जो असीम आशीषों का दाता है। अपने इस सम्मोहित, प्रकाशित सेवक को अपनी सुरक्षा में आश्रय दे।

इस अस्तित्व के लोक से उसे निज प्रेम में दृढ़ और अडिग रहने में सहायता दे और वर दे कि इस पंख टूटे पंछी को स्वर्गिक वृक्ष पर स्थित तेरे दिव्य नीड़ में शरण और आश्रय मिले।

#8341
- अब्दुल-बहा

 

वह करुणामय, सर्वकृपालु है! हे ईश्वर, मेरे परमेश्वर! तू मुझे देखता है, तू मुझे जानता है, तू ही मेरी शरण और मेरा आश्रय है, मैने तेरे अतिरिक्ति किसी और की न कामना की है, न करूंगा। तेरे प्रेम-पथ के सिवा मैंने अन्य किसी पथ पर न पाँव रखा है न रखूँगा। निराशा की अंधियारी रात में मेरी आँखें, अपेक्षा और आशा से भरी हुई, तेरे असीम अनुग्रह के प्रभात की ओर लगी हैं और अरुणोदय की बेला में मेरी मुरझाई हुई आत्मा तेरे सौन्दर्य और तेरी परिपूर्णता के स्मरण से नवस्फूर्ति और शक्ति प्राप्त करती है। जिसे तेरी दया का सहारा है वह एक बूंद भी हो तो असीम सिंधु बन जायेगा और जिस पर तेरी स्नेहिल कृपालुता का उमड़ता प्रवाह सहायक हो वह तुच्छ धूलकण होकर भी तेजस्वी नक्षत्र सा जगमगायेगा।

हे तू विशुद्धता की चेतना ! हे तू जो असीम आशीषों का दाता है। अपने इस सम्मोहित, प्रकाशित सेवक को अपनी सुरक्षा में आश्रय दे।

इस अस्तित्व के लोक से उसे निज प्रेम में दृढ़ और अडिग रहने में सहायता दे और वर दे कि इस पंख टूटे पंछी को स्वर्गिक वृक्ष पर स्थित तेरे दिव्य नीड़ में शरण और आश्रय मिले।

#8343
- अब्दुल-बहा

 

वह करुणामय, सर्वकृपालु है! हे ईश्वर, मेरे परमेश्वर! तू मुझे देखता है, तू मुझे जानता है, तू ही मेरी शरण और मेरा आश्रय है, मैने तेरे अतिरिक्ति किसी और की न कामना की है, न करूंगा। तेरे प्रेम-पथ के सिवा मैंने अन्य किसी पथ पर न पाँव रखा है न रखूँगा। निराशा की अंधियारी रात में मेरी आँखें, अपेक्षा और आशा से भरी हुई, तेरे असीम अनुग्रह के प्रभात की ओर लगी हैं और अरुणोदय की बेला में मेरी मुरझाई हुई आत्मा तेरे सौन्दर्य और तेरी परिपूर्णता के स्मरण से नवस्फूर्ति और शक्ति प्राप्त करती है। जिसे तेरी दया का सहारा है वह एक बूंद भी हो तो असीम सिंधु बन जायेगा और जिस पर तेरी स्नेहिल कृपालुता का उमड़ता प्रवाह सहायक हो वह तुच्छ धूलकण होकर भी तेजस्वी नक्षत्र सा जगमगायेगा।

हे तू विशुद्धता की चेतना ! हे तू जो असीम आशीषों का दाता है। अपने इस सम्मोहित, प्रकाशित सेवक को अपनी सुरक्षा में आश्रय दे।

इस अस्तित्व के लोक से उसे निज प्रेम में दृढ़ और अडिग रहने में सहायता दे और वर दे कि इस पंख टूटे पंछी को स्वर्गिक वृक्ष पर स्थित तेरे दिव्य नीड़ में शरण और आश्रय मिले।

#8347
- अब्दुल-बहा

 

वह करुणामय, सर्वकृपालु है! हे ईश्वर, मेरे परमेश्वर! तू मुझे देखता है, तू मुझे जानता है, तू ही मेरी शरण और मेरा आश्रय है, मैने तेरे अतिरिक्ति किसी और की न कामना की है, न करूंगा। तेरे प्रेम-पथ के सिवा मैंने अन्य किसी पथ पर न पाँव रखा है न रखूँगा। निराशा की अंधियारी रात में मेरी आँखें, अपेक्षा और आशा से भरी हुई, तेरे असीम अनुग्रह के प्रभात की ओर लगी हैं और अरुणोदय की बेला में मेरी मुरझाई हुई आत्मा तेरे सौन्दर्य और तेरी परिपूर्णता के स्मरण से नवस्फूर्ति और शक्ति प्राप्त करती है। जिसे तेरी दया का सहारा है वह एक बूंद भी हो तो असीम सिंधु बन जायेगा और जिस पर तेरी स्नेहिल कृपालुता का उमड़ता प्रवाह सहायक हो वह तुच्छ धूलकण होकर भी तेजस्वी नक्षत्र सा जगमगायेगा।

हे तू विशुद्धता की चेतना ! हे तू जो असीम आशीषों का दाता है। अपने इस सम्मोहित, प्रकाशित सेवक को अपनी सुरक्षा में आश्रय दे।

इस अस्तित्व के लोक से उसे निज प्रेम में दृढ़ और अडिग रहने में सहायता दे और वर दे कि इस पंख टूटे पंछी को स्वर्गिक वृक्ष पर स्थित तेरे दिव्य नीड़ में शरण और आश्रय मिले।

#8350
- अब्दुल-बहा

 

वह करुणामय, सर्वकृपालु है! हे ईश्वर, मेरे परमेश्वर! तू मुझे देखता है, तू मुझे जानता है, तू ही मेरी शरण और मेरा आश्रय है, मैने तेरे अतिरिक्ति किसी और की न कामना की है, न करूंगा। तेरे प्रेम-पथ के सिवा मैंने अन्य किसी पथ पर न पाँव रखा है न रखूँगा। निराशा की अंधियारी रात में मेरी आँखें, अपेक्षा और आशा से भरी हुई, तेरे असीम अनुग्रह के प्रभात की ओर लगी हैं और अरुणोदय की बेला में मेरी मुरझाई हुई आत्मा तेरे सौन्दर्य और तेरी परिपूर्णता के स्मरण से नवस्फूर्ति और शक्ति प्राप्त करती है। जिसे तेरी दया का सहारा है वह एक बूंद भी हो तो असीम सिंधु बन जायेगा और जिस पर तेरी स्नेहिल कृपालुता का उमड़ता प्रवाह सहायक हो वह तुच्छ धूलकण होकर भी तेजस्वी नक्षत्र सा जगमगायेगा।

हे तू विशुद्धता की चेतना ! हे तू जो असीम आशीषों का दाता है। अपने इस सम्मोहित, प्रकाशित सेवक को अपनी सुरक्षा में आश्रय दे।

इस अस्तित्व के लोक से उसे निज प्रेम में दृढ़ और अडिग रहने में सहायता दे और वर दे कि इस पंख टूटे पंछी को स्वर्गिक वृक्ष पर स्थित तेरे दिव्य नीड़ में शरण और आश्रय मिले।

#8354
- अब्दुल-बहा

 

वह करुणामय, सर्वकृपालु है! हे ईश्वर, मेरे परमेश्वर! तू मुझे देखता है, तू मुझे जानता है, तू ही मेरी शरण और मेरा आश्रय है, मैने तेरे अतिरिक्ति किसी और की न कामना की है, न करूंगा। तेरे प्रेम-पथ के सिवा मैंने अन्य किसी पथ पर न पाँव रखा है न रखूँगा। निराशा की अंधियारी रात में मेरी आँखें, अपेक्षा और आशा से भरी हुई, तेरे असीम अनुग्रह के प्रभात की ओर लगी हैं और अरुणोदय की बेला में मेरी मुरझाई हुई आत्मा तेरे सौन्दर्य और तेरी परिपूर्णता के स्मरण से नवस्फूर्ति और शक्ति प्राप्त करती है। जिसे तेरी दया का सहारा है वह एक बूंद भी हो तो असीम सिंधु बन जायेगा और जिस पर तेरी स्नेहिल कृपालुता का उमड़ता प्रवाह सहायक हो वह तुच्छ धूलकण होकर भी तेजस्वी नक्षत्र सा जगमगायेगा।

हे तू विशुद्धता की चेतना ! हे तू जो असीम आशीषों का दाता है। अपने इस सम्मोहित, प्रकाशित सेवक को अपनी सुरक्षा में आश्रय दे।

इस अस्तित्व के लोक से उसे निज प्रेम में दृढ़ और अडिग रहने में सहायता दे और वर दे कि इस पंख टूटे पंछी को स्वर्गिक वृक्ष पर स्थित तेरे दिव्य नीड़ में शरण और आश्रय मिले।

#8356
- अब्दुल-बहा

 

वह करुणामय, सर्वकृपालु है! हे ईश्वर, मेरे परमेश्वर! तू मुझे देखता है, तू मुझे जानता है, तू ही मेरी शरण और मेरा आश्रय है, मैने तेरे अतिरिक्ति किसी और की न कामना की है, न करूंगा। तेरे प्रेम-पथ के सिवा मैंने अन्य किसी पथ पर न पाँव रखा है न रखूँगा। निराशा की अंधियारी रात में मेरी आँखें, अपेक्षा और आशा से भरी हुई, तेरे असीम अनुग्रह के प्रभात की ओर लगी हैं और अरुणोदय की बेला में मेरी मुरझाई हुई आत्मा तेरे सौन्दर्य और तेरी परिपूर्णता के स्मरण से नवस्फूर्ति और शक्ति प्राप्त करती है। जिसे तेरी दया का सहारा है वह एक बूंद भी हो तो असीम सिंधु बन जायेगा और जिस पर तेरी स्नेहिल कृपालुता का उमड़ता प्रवाह सहायक हो वह तुच्छ धूलकण होकर भी तेजस्वी नक्षत्र सा जगमगायेगा।

हे तू विशुद्धता की चेतना ! हे तू जो असीम आशीषों का दाता है। अपने इस सम्मोहित, प्रकाशित सेवक को अपनी सुरक्षा में आश्रय दे।

इस अस्तित्व के लोक से उसे निज प्रेम में दृढ़ और अडिग रहने में सहायता दे और वर दे कि इस पंख टूटे पंछी को स्वर्गिक वृक्ष पर स्थित तेरे दिव्य नीड़ में शरण और आश्रय मिले।

#8364
- अब्दुल-बहा

 

वह करुणामय, सर्वकृपालु है! हे ईश्वर, मेरे परमेश्वर! तू मुझे देखता है, तू मुझे जानता है, तू ही मेरी शरण और मेरा आश्रय है, मैने तेरे अतिरिक्ति किसी और की न कामना की है, न करूंगा। तेरे प्रेम-पथ के सिवा मैंने अन्य किसी पथ पर न पाँव रखा है न रखूँगा। निराशा की अंधियारी रात में मेरी आँखें, अपेक्षा और आशा से भरी हुई, तेरे असीम अनुग्रह के प्रभात की ओर लगी हैं और अरुणोदय की बेला में मेरी मुरझाई हुई आत्मा तेरे सौन्दर्य और तेरी परिपूर्णता के स्मरण से नवस्फूर्ति और शक्ति प्राप्त करती है। जिसे तेरी दया का सहारा है वह एक बूंद भी हो तो असीम सिंधु बन जायेगा और जिस पर तेरी स्नेहिल कृपालुता का उमड़ता प्रवाह सहायक हो वह तुच्छ धूलकण होकर भी तेजस्वी नक्षत्र सा जगमगायेगा।

हे तू विशुद्धता की चेतना ! हे तू जो असीम आशीषों का दाता है। अपने इस सम्मोहित, प्रकाशित सेवक को अपनी सुरक्षा में आश्रय दे।

इस अस्तित्व के लोक से उसे निज प्रेम में दृढ़ और अडिग रहने में सहायता दे और वर दे कि इस पंख टूटे पंछी को स्वर्गिक वृक्ष पर स्थित तेरे दिव्य नीड़ में शरण और आश्रय मिले।

#8371
- अब्दुल-बहा

 

परीक्षाएँ और कठिनाइयाँ

जो तेरे समीप हैं उनके लिये कठिनाइयाँ रोग-निवारक औषधि हैं, जो तुझे चाहते हैं उनकी बस यही एक कामना है कि तू उन्हें मुक्ति दे, जो तुझे पाना चाहते हैं उनके हृदय तेरी परीक्षाओं के लिये तरसते हैं, जिन्होंने तेरे सत्य को जान लिया है उनके लिये आशा की बस एक किरण है तेरा निर्णय। तेरा दिव्य माधुर्य और तेरे मुखमंडल की महिमा के नाम पर मैं तुझसे याचना करता हूँ कि अपने उच्च साम्राज्य से हमारे लिये वह भेज जो तेरे समीप आने में हमें समर्थ बनाये। हे मेरे ईश्वर, अपने धर्म में मुझे दृढ बना, अपने ज्ञान के प्रकाश से हमारे हृदयों को आलोकित कर दे और अपने नाम की चमक से हमारे मन-प्राण दीप्त कर दे।

#8342
- बहाउल्लाह

 

महिमा हो तेरी, मेरे परमेश्वर! यदि वे दुःख न होते जो तेरे पथ में सहने पड़ते हैं तो तेरे सच्चे प्रेमी पहचाने जाते, और यदि वे संकट न होते जो तेरे प्रेम के कारण उठाने पड़ते हैं तो, तेरी चाह रखने वालों के पद कैसे प्रकट होते? तेरी सामर्थ्य मेरी साक्षी है कि जो भी तेरी आराधना करते हैं, उन सबके सहचर, उनके बहाए हुए आँसू हैं और तेरी आकांक्षा करने वालों को दिलासा देने वाली हैं उनके मुख से निकली आहें। जो तुझसे मिलने की शीघ्रता करते हैं, उनका आहार उनके टूटे हुए दिल के टुकड़े हैं।

कितना मधुर स्वाद देती है मुझको तेरे पथ में भोगी गई मृत्यु की कटुता और कितने अनमोल हैं मेरी दृष्टि में तेरी वाणी के यशोगान के बदले लगने वाले तेरे शत्रुओं के तीर। अपने धर्म की राह में तू जो चाहे वह सब गरल मुझको पीने दे। अपने प्रेम में वह सब सहने दे मुझको, जिसका तूने आदेश दिया है। तेरी महिमा की सौगंध! जो तू चाहे बस वही मेरी भी इच्छा है और प्रिय है मुझको बस वही जो तुझको प्रिय है। हर समय बस तुझमें ही रखी है मैंने अपनी सम्पूर्ण आस्था।

मैं तुझसे याचना करता हूँ, हे मेरे परमेश्वर, कि तू इस धर्म के ऐसे सहायकों को उत्पन्न कर जो तेरे नाम और सम्प्रभुता के योग्य हों, ताकि वे तेरे प्राणियों के बीच मुझे स्मरण कर सकें और तेरी पृथ्वी पर विजय-पताका फहरा सकें। जैसा तुझे अच्छा लगे वैसा करने में तू समर्थ है। तेरे अतिरिक्त अन्य कोई ईश्वर नहीं है, संकट में सहायक, स्वयंजीवी।

#8344
- बहाउल्लाह

 

प्रतापशाली है तू, हे नाथ, हे मेरे परमेश्वर! अंतर्दृष्टि से सम्पन्न हर व्यक्ति तेरी सम्प्रभुता और तेरे अधिराज्य को करता है स्वीकार और देख पाता है प्रत्येक विवेकशील नेत्र तेरे वैभव की महानता और सामर्थ्य की बाध्यकारी शक्ति।

उन्हें रोक सकने में असमर्थ हैं परीक्षाओं के प्रचंड पवन, जो निहार कर तेरी महिमा के क्षितिज को, पाते हैं आनन्द तेरी निकटता का; जिन्होंने तेरी इच्छा के प्रति स्वयं को पूरी तरह कर दिया है समर्पित, उन्हें तेरे दरबार से दूर रख पाने में या वहाँ पहुँचने में बाधा बनने में संकटों के झंझावात भी हो जाते हैं विफल। ऐसा लगता है कि उनके हृदय में प्रज्ज्वलित हैं तेरे प्रेम के दीपक और ललक उठी है तेरी मृदुलता की ज्योति उनके वक्ष में। विपदायें भी उन्हें तेरे धर्म से विमुख करने में असमर्थ हैं और भाग्य के उलट-फेर भी नहीं भटका सकते हैं उनको तेरी सुप्रसन्नता के पथ से।

मैं तुझसे याचना करता हूँ हे मेरे ईश्वर, उनके द्वारा और उनकी उन आहों के द्वारा जो तेरे वियोग में उनके हृदय से निकली हैं, कि उन्हें अपने विरोधियों के दुष्कृत्यों से सुरक्षित रख और उनकी आत्मा को उससे पोषित कर जिसका विधान तूने अपने उन प्रियजनों के लिये किया है जिन्हें कोई भय त्रस्त नहीं करता और जिन पर कोई विपदा नहीं आयेगी।

#8345
- बहाउल्लाह

 

हे मेरे परमेश्वर, तू भलीभांति जानता है कि सभी दिशाओं से मुझ पर विपदायें बरस पड़ी हैं और तेरे अतिरिक्त अन्य कोई नहीं जो उन्हें दूर कर सकता है या कम भी कर सकता है। तेरे प्रति अपने प्रेम के कारण मैं अच्छी तरह जानता हूँ कि तू किसी भी आत्मा को तब तक विपदाग्रस्त नहीं करता जब तक अपने पावन स्वर्ग में उसके स्थान को ऊँचा करने का निर्णय तू नहीं ले लेता और जब तक यह भौतिक जीवन जीने के लिये उसके दिल को मजबूत करने का इरादा तेरा नहीं होता। अपनी शक्ति के सहारे तू ये सुरक्षा-कवच उसे इसलिये प्रदान करता है कि दुनिया के मिथ्या अभिमान के प्रति उसका झुकाव न हो जाये। यह सच है और तू भलीभाँति परिचित भी है कि दुनिया और स्वर्गों के समस्त सुख से भी अधिक तेरे नाम के स्मरण में मैं प्रसन्नता का अनुभव करूँगा।

हे मेरे ईश्वर, अपने प्रेम और अपनी आज्ञाओं के पालन में मेरे दिल को मजबूत कर और ऐसा वर दे कि तेरे विरोधियों की छाया से मैं पूरी तरह मुक्त रह सकूँ। सत्य ही, मैं तेरी महिमा के नाम पर शपथ लेता हूँ कि तेरे अतिरिक्त मैं किसी अन्य की समीपता की कामना नहीं करता और न ही तेरी दया के अतिरिक्त किसी अन्य की दया का पात्र ही बनना चाहता, न ही मुझे तेरे न्याय के अतिरिक्त किसी अन्य से न्याय पाने की अभिलाषा है।

तू परम् उदार है, हे स्वर्गों और धरा के प्रभु, सभी मनुष्यों के गुणगान से परे। तेरे आज्ञाकारी सेवकों को शांति प्राप्त हो और ईश्वर की महिमा बढ़े, तू ही है सभी लोकों का स्वामी !

#8346
- बाब

 

माता-पिता के लिये

देखता है तू, हे स्वामी ! तुम्हारी अनुकम्पा और कृपा के लिये स्वर्ग की ओर फैली मेरी याचना भरी बाहें। वर दे कि ये तेरी उदारता और कृपा से परिपूर्ण सहायता के बहुमूल्य रत्नों से भर जायें। हमें और हमारे माता-पिता को क्षमादान दे और हमने तेरे आशीष और तेरी दिव्य उदारता के महासागर से जो कुछ भी पाना चाहा है, उनसे इन्हें भर दे। हमारे हृदयों के प्रिय प्रभु, अपनी राह में अर्पित हमारे सभी कर्म स्वीकार कर। सत्य ही, तू सर्वशक्तिशाली है, है सर्वोच्च, अतुलनीय, एकमेव। सत्य ही, तू है एक और केवल एक क्षमादाता, करूणामय।

#8326
- बहाउल्लाह

 

महिमा हो तेरी, हे स्वामी, मेरे नाथ! मैं तुझसे याचना करता हूँ कि क्षमा कर दे मुझे और उन्हें, जो तेरे धर्म के समर्थक हैं। वस्तुतः, तू सम्प्रभु स्वामी है, क्षमादाता, सर्वाधिक उदार। अपने वैसे सेवकों को, जो ज्ञानविहीन हैं, अपने धर्म को स्वीकार करने के योग्य बना, क्योंकि एक बार यदि वे तेरे बारे में जान जायेंगे तो वे न्याय दिवस की सत्यता के साक्षी बनेंगे और तेरी कृपा के प्रकटीकरण का विरोध नहीं करेंगे। उनके लिये अपनी दया के चिन्ह भेज और वे जहाँ कहीं भी निवास करें उन्हें अपनी उदारता का अंशदान दे, जिसका विधान तूने उनके लिये किया है जो तेरे सेवकों के बीच विशुद्ध हृदय हैं। तू सत्य ही सर्वोपरि सम्राट, सर्वकृपालु, परम करुणामय है। अपनी कृपा और अपने आशीषां की बूंदें बरसने दे वहाँ जिनके निवासियों ने तेरे धर्म को स्वीकार किया है। वस्तुतः, क्षमादान देने में तू सर्वोपरि है। यदि तेरी कृपा उन तक नहीं पहुँच पायेगी तो तेरे इस युग में वे तेरे भक्तों में कैसे गिने जायेंगे। मुझे आशीष दे, हे मेरे ईश्वर! और उन्हें भी जो इस पूर्व निर्धारित युग में तेरे चिन्हों पर विश्वास करेंगे! जो अपने दिलों में तेरा प्यार धारण करते हैं, एक ऐसा प्रेम जिसे तूने ही उन्हें दिया है, उन्हें भी आशीष दे, हे मेरे प्रभु! सत्य ही, तू न्याय का स्वामी है, है सर्वोच्च!

#8328
- बाब

 

हे स्वामी! इस सर्वमहान युग में माता-पिता की ओर से संतानों द्वारा की गई प्रार्थना तू स्वीकार करता हैं। यह इस युग के विशेष आशीषों में एक है। अतः, हे कृपालु प्रभु! अपनी एकमेवता की देहरी पर इस सेवक की विनती स्वीकार कर और अपनी अनुकम्पा के महासागर में इसके पिता को निमग्न कर दे, क्योंकि यह पुत्र तेरी सेवा करने के लिये उठ खड़ा हुआ है और तेरे प्रेम के पथ पर हर पल प्रयत्नशील है। सत्य ही, तू दाता, क्षमादाता और कृपालु है।

#8324
- अब्दुल-बहा

 

विशेष अवसर

दिवंगतों के लिए

हे मेरे परमेश्वर!

हे तू पापों को क्षमा करने वाले! वरदाता! व्याधियों को दूर करने वाले!

सत्य ही , मैं तुझसे याचना करना हूं कि जो इस भोतिक देहरूपी चोलो को छोड़कर उस आध्यात्मिक लोक में आरोहण कर गये हैं उनके पापों को क्षमा कर दे!

हे मेरे प्रभु! उन्हें भूलों से मुक्त करके पवित्र कर दे, उनके शोक का निवारण कर, और उनके अंधकार को ज्योति का रूप दे दे!

उन्हें आनन्द - उद्यान में प्रवेश दे, परम पावन जल से उन्हें स्वच्छ कर दे और उन्हें वरदान दे कि वे पर्वत शिखर पर तेरे वैभव के दर्शन कर सकें।

#6848
- बहाउल्लाह

 

पातियाँ

अग्नि पाती

अग्नि पाती

परम प्राचीन परम महान ईश्वर के नाम पर !

वस्तुत:, निष्ठावनों के ह्रदय वियोग की अग्नि में दग्ध है: कहाँ है तेरे मुखमण्डल की आभा, हे सर्वलोकों के प्रियतम ?

जो तेरे निकट हैं, छोड़ दिये गये हैं वे निर्जन के अंधकार में: कहाँ है तेरे पुनर्मिलन के प्रभात की जगमगाहट, हे सर्वलोकों की कामना ?

तेरे प्रियजनों के शरीर तड़प रहे हैं सुदूर रेत पर: कहाँ है तेरी उपस्थिति का महासागर, हे सर्वलोकों के मोहन ?

ललकते हाथ तेरी कृपा और उदारता के स्वर्ग की ओर उठे हैं: कहाँ है तेरी अनुकम्पा की वर्षा हे सर्वलोकों के उत्तरदाता ?

हर ओर अत्याचार कर रहें हैं विश्वासघाती: कहाँ है तेरी विधि-लेखनी की बाध्यकारी शक्ति हे सर्वलोकों के विजेता ?

हर दिशा में तेज हो उठी है श्वानों की भौंक: कहाँ है तेरे सामर्थ्य के महावन का मृगराज, हे सर्वलोकों के निर्णायक ?

समस्त मानवता को जकड़ लिया है जड़ता ने: कहाँ है तेरे प्रेम की ऊष्मा, हे सर्वलोकों के सूर्य ?

संकट अब अपने चरम पर आ पहुँचा है: कहाँ हैं तेरी सहायता के चिन्ह, हे सर्वलोकों के मुक्तिदाता ?

बहुसंख्य जनों को घेर लिया है अंधकार ने: कहाँ है तेरी आभा की प्रखरता, हे सर्वलोकों के आलोक ?

लोगों की गर्दनें दुष्ट्ता से तनी हैं: कहाँ है तेरे प्रतिशोध की तलवार, हे सर्वलोकों के प्रलयंकर ?

अधमता पतन के रसताल तक जा पहुँची है: कहाँ है तेरी गरिमा के संकेत, हे सर्वलोक के गौरव ?

तुझ सर्वकृपालु के नाम को प्रकट करने वाले दु;खों से पीड़ित हैं; कहाँ है तेरे प्राकट्य के अरुणोदय का आहलाद, हे सर्वलोकों के आनन्द ?

पृथ्वी के जन-जन पर टूट पड़ी है घोर विपदा: कहाँ हैं तेरे आनन्द की ध्वजाएँ, हे सर्वलोकों के उल्लास ?

देखता है तू कि तेरे 'संकेतो का उदयस्थल' कुचक्रों के आवरण से ढक दिया गया है : कहाँ है तेरी सामर्थ्य की उंगलियाँ, हे सर्वलोकों की शक्ति ?

भीषण प्यास से सब हैं संत्रस्त: कहाँ हैं तेरी कृपा की सरिता, हे सर्वलोकों की करुणा ?

मैं प्रवंचित निष्कासित हूँ निर्जन वीराने में: कहाँ हैं तेरे आदेश के स्वर्ग के अनुचर, हे सर्वलोकों के सम्राट ?

मैं हूँ परित्यक्त एक अनजाने देश में: कहाँ है तेरी निष्ठा के प्रतीक, हे सर्वलोकों के विश्वास ?

मृत्यु की वेदना ने ग्रास बना लिया सबको: कहाँ हैं तेरे अनन्त जीवन के सागर के ज्वार, हे सर्वलोकों के जीवन ?

फूंक गया है शैतान मंत्र अपना हर कान में : कहाँ है तेरी ज्वाला का धूमकेतु, हे सर्वलोकों के आलोक ?

बहुसंख्य मानवों को पथभ्रष्ट कर गया है वासनाओं का सुरापान: कहाँ हैं तेरी विशुद्धता के निर्झर, हे सर्वलोकों की अभिलाषा ?

देखता है तू इस प्रवंचित को सीरियाई लोगों के बीच उत्पीड़न से आक्रांत: कहाँ है तेरी प्रभात-रश्मियों की दमक, हे सर्वलोकों की ज्योति ?

देखता है तू कि प्रतिबन्धित है मेरा बोलना भी: कहाँ से मुखरित होगी तेरी मधुरता, हे सर्वलोकों के कोकिल ?

बहुसंख्य लोग कपोल कल्पनाओं के जाल में उलझे हैं: कहाँ हैं तेरी आस्था के शब्द-शिल्पी हे सर्वलोकों के आश्वासन ?

डूब रहा है बहा विपदा के सागर में: कहाँ है तेरी मुक्ति की नौका, हे सर्वलाकों के उद्धारक ?

सत्य और पावनता के, निष्ठा और सम्मान के दीप बुझा दिये गये है: तेरे प्रतिहिंसक क्रोध के प्रतीक, हे सर्वलोकों के संचालक ?

क्या तुम नहीं देख सकते उन्हें जो तेरे ही लिये युद्धरत हैं या जो विचारमग्न हैं उन संकटों पर, जो तेरे प्रेम- पथ पर, उन पर आन पड़े हैं ? ठहर गई है अब मेरी लेखनी, हे सर्वलोकों के प्रियतम !

दिव्य कल्पतरूवर के शाख-शाख टूटे हैं नियति के प्रचंड वेग, झंझा की झोंक से : कहाँ हैं तेरे अभय दान की ध्वजायें, हे सर्वलोकों के विजेता ?

यह मुखड़ा कलंक की धूल से ढका है: कहाँ हैं तेरी अनुकम्पा के मधुर समीर, हे सर्वलोकों की करुणा ?

प्रवंचकों ने कलुषित क्र दिया वस्त्र पावनता का: कहाँ है तेरी पावनता का परिधान, हे सर्वलोकों के श्रृंगारकर्ता ?

मनुष्य ने अपने ही हाथों से जो कर डाला है, स्तब्ध रह गया है उससे सागर दया का: कहाँ हैं तेरी उदारता की लहरें, हे सर्वलोकों की अभिलाषा ?

तेरे शत्रुओं के आंतक से बंद पड़े हैं द्वार तेरे दिव्य दरबार तक पहुँचने के: कहाँ हैं कुंजी तेरे आशीष की, हे सर्वलोकों के समाधानकर्ता ?

द्रोह की विषमय हवाओं से पात-पात मुरझाए हैं: कहाँ है तेरी कृपा की मेघ-धारा हे सर्वलोकों के दाता ?

विश्व हो गया है अंधकारमय पापों की धूल से: कहाँ हैं तेरी क्षमा के पवन-झकोरे हे सर्वलोकों के क्षमाकर्ता ?

एकाकी है यह युवक इस निर्जन भू पर : कहाँ है तेरी स्वर्गिक करुणा की वर्षा, हे सर्वलोकों के वरदाता ?

हे परम महान लेखनी ! तेरी अतिशय मधुर पुकार सुन ली है हमने शाश्वत साम्राज्य में : ध्यान से सुन जो कह रही भव्यता की वाणी, हे तू सर्वलोकों के 'प्रवंचित '!

होता न यदि शीत, विजयी होती कैसे ऊष्मा तेरे शब्दों की, हे सर्वलोकों के व्याख्याता ?

संकट यदि नहीं होते, कैसे चमक दिखाता सूर्य तेरे धैर्य का, हे सर्वलोकों के आलोक ?

शोक न कर तू, दुष्ट जनों के कारण, रचा गया था तुझे सब कुछ झेलने को, हे सर्वलोकों के धैर्य !

विद्रोह के लिये भड़काने वालों के बीच, संविदा के क्षितिज पर तेरा उदित होना, और ललकना तेरा उस प्रभु के लिये, आह ! कितना मधुर था, हे सर्वलोकों के प्रेम !

तूने ही उच्चतम् शिखरों पर फहराया था मुक्ति-ध्वजा, और जगाया था सागर उदारता भरी कृपा का | हे सर्वलोकों के भावोल्लास !

तेरे एकाकीपन से ही चमका था सूर्य एकमेवता का, और तेरे निष्कासन से ही अंलकृत हुई थी भूमि एकता की | धैर्य रख, हे सर्वलोकों के निर्वासित !

अनादर को हमने बनाया है परिधान गौरव का, और दुखों को तेरे मन्दिर का आभूषण, हे सर्वलोकों के गौरव !

देखता है तू घृणा भरे ह्रदयों को, इसकी उपेक्षा करना है तेरी महानता, हे सर्वलोकों के पाप को छिपाने वाले ! आगे बढ़ चमके जब तलवारें, बढ़ता जा, 'गर तीर भी बरसते हों, हे सर्वलोकों के बलिदान !

तू बिलखे या मैं रोऊँ, कि तेरे अनुयायी हैं इतने थोड़े, जो कारण है अखिल लोकों के रुदन का !

मैने सुनी है, सत्य ही, तेरी पुकार हे सर्वगौरवमय प्रियतम !

दीप्त है अब बहा का मुखमण्डल, दु;खों के ताप से,

तेरे ज्योतिमर्य शब्दों कि ज्वाला से, और अब वह निष्ठापूर्वक उठ खड़ा हुआ है

तेरी सुप्रसन्नता पर दृष्टी केन्द्रित किए हुए,

हे अखिल लोकों के विधाता !

हे अली अकबर ! धन्यवाद कर अपने प्रभु का इस पाती के लिए कि जब मेरी विनम्रता की सुरभि तू ग्रहण न कर सकेगा तब तू जान पाएगा कि सब के आराध्य ईश्वर के पथ पर कैसे कष्टों ने हमें घेरा था |

(यदि प्रभु के सेवक पूरी निष्ठा से इसका पाठ करेंगे तो जग उठेंगी ऐसी ज्वालाएँ उनकी नसों में जो सर्वलोकों में अग्नि धधका देंगी |)

#6862
- बहाउल्लाह

 

अहमद की पाती

अहमद की पाती

वह दिव्य सम्राट है, सर्वज्ञाता, सर्वबुद्धिमान ! देखो, बैकुंठ -कोकिला अनन्त तरुवर की टहनियों पर पावन और मधुर स्वर में गा रही है, परमेश्वर की निकटता का शुभ संदेश भक्तजनों को सुना रही है, दिव्य एकता के नाम पर प्रभुभक्तों को परम कृपालु परमेश्वर के सान्धिय में बुला रही है, दु;खी हताश जनों को उस परम महिमाशाली, अद्वितीय सम्राट का संदेश सुना रही है, प्रभु-प्रेमियों को पवित्रता के आसन और इस देदीप्यमान सौन्दर्य की राह दिखला रही है |

वस्तुत; यह वह परम महान सौन्दर्य है जिसकी भविष्यवाणियाँ अवतारों के ग्रंथों में की गई हैं और जिसके द्वारा सत्य और असत्य का अन्तर स्पष्ट होगा और प्रत्येक आदेश की बुद्धिमता प्रमाणित की जायगी | वस्तुत; यह वह दिव्य जीवन-वृक्ष है जो सर्वोच्च, सर्वशक्तिमान, सर्वोपरि परमेश्वर के फल देता है |

हे अहमद, तू इसका साक्षी बन कि वही ईश्वर है और उसके अतिरिक्त अन्य कोई ईश्वर नहीं है, सम्राट, रक्षक, अतुलनीय, सर्वसमर्थ ! और प्रभु ने जिसे अली (बाब) के नाम से अवतरित किया, सत्यमेव वह परमेश्वर की ओर से ही आये थे, जिनके आदेशों का हम सभी पालन कर रहे हैं |

कहो, हे लोगों ! प्रभु के उन विधानों के प्रति आज्ञाकारी बनो, जो 'बयान' में उस प्रतापशाली सर्वबुद्धिमान द्वारा आदेशित हैं | सत्य ही, वह अवतारों का सम्राट है ओर उसका पवित्र ग्रंथ मातृग्रंथ है | काश ! तुम यह जान पाते |

इस कारावास से दिव्य कोकिला प्रभु का यही आह्वान तुम्हें सुना रहीहैं | उसे तो बस यह स्पष्ट सन्देश देना है- जो भी चाहे उसे इस सन्देश से विमुख होने दो और जो चाहे उसे अपनाने दो प्रभु का पथ | हे लोगों ! यदि तुम इन श्लोकों को अस्वीकार करते हो तो किस प्रमाण के द्वारा तुमने परमेश्वर में अपनी आस्था दिखलाई है, इसे बतलाओ, हे मिथ्याचारियों के समूह !

नहीं, जिसके हाथों में मेरी आत्मा है उस परमात्मा की सौगंध ! वे सब मिलकर भी यदि एक दूसरे की सहायता करने लगें तब भी वे ऐसा करने में समर्थ नहीं हो पायेंगे |

हे अहमद ! मेरी अनुपस्थिति में मेरी अनुकम्पाओं को न भूल और अपने जीवन में दूरस्थ कारावास के इन दु:ख भरे दिनों और निष्कासन को याद रख | तू मेरे प्रेम में इतना अटल बन कि यदि तुझ पर शत्रुओं कि तलवारों के प्रहार भी बरसने लगें और समस्त पृथ्वी स्वर्ग की सभी शक्तियाँ भी तेरे विरुद्ध उठ खड़ी हो जायें, तब भी तेरा ह्रदय शंका से विचलित न हो | मेरे शत्रुओं के लिये तू अग्नि की ज्वाला बन और मेरे प्रियजनों के लिये अनन्त जीवन की सरिता बन जा और उनमें से न बन जो संदेह करते हैं | और यदि मेरी राह में तुझको घेर ले संकट या मेरे कारण तुझे सहन करना पड़े अनादर तो उनसे मत घबरा |

प्रभु, अपने पूर्वजों के प्रभु में विश्वास रख | लोग मिथ्या संदेह की राह में भटक रहे हैं, विवेक से हीन वे अपनी आँखें से ईश्वर के दर्शन कर पाने में असमर्थ हैं अथवा अपने कानों से उसकी दिव्य वाणी को नहीं सुन पाते | हमने उन्हें ऐसा ही पाया है, जिसका तू साक्षी है | इस प्रकार उनके अंधविश्वास उनके तथा उनके स्वयं के अंत;करण के बीच आवरण बन गये हैं, जिससे वे सर्वोच्च सर्वोपरि ईश्वर के मार्ग से दूर हो गये हैं |

तू इसे सत्य मान कि जो भी इस सौन्दर्य से विमुख होता है, वह अतीत के अवतारों से भी विमुख हो जाता है और अनन्तकाल तक परमेश्वर के प्रति अंहकार दिखाता है |

हे अहमद, इस पाती को कंठस्थ कर ले | अपने दिनों में तू इसे मधुर स्वर से गा और अपने आपको इससे विमुख न कर | इसका पाठ करने वालों के लिये परमात्मा ने प्रभुधर्म में अपने प्राणों का बलिदान करने वाले सौ शहीदों का कर्मफल तथा इहलोक और परलोक में सेवा का पुरस्कार निर्धारित किया है | ये अनुकम्पाएं हमने अपनी दयालुता तथा कृपालुता के परिणामस्वरूप प्रदान की हैं ताकि तू उनमें से बन सके जो हमारे प्रति कृतज्ञ हैं |

प्रभु की सौगध ! यदि कोई दु;खी व्यक्ति इस पाती का पूर्व निष्ठा से पाठ करे तो निश्चय ही प्रभु उसके दु;ख दूर करेगा, उसकी समस्याओं का समाधान करेगा और उसके कष्टों को हर लेगा |

वस्तुत; वह दयालु, कृपालु है, सर्वलोकों के उस स्वामी की जय हो !

#6861
- बहाउल्लाह