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हे ईश्वर, मेरे ईश्वर! हम तेरे सेवक हैं जो भक्तिपूर्वक तेरे पावन मुखड़े की ओर उन्मुख हुए हैं, जिन्होंने इस महिमामय दिवस में तेरे अतिरिक्त अन्य सभी से स्वयं को अनासक्त कर लिया है। हम इस आध्यात्मिक सभा में, अपने विचारों और चिन्तन में, एक बनकर उपस्थित हुए हैं और मानवजाति के मध्य तेरी वाणी का यशोगान करने के लिये हमारे उद्देश्य एक हो गये हैं। हे स्वामी! हमारे ईश्वर! हमें अपने दिव्य मार्गदर्शन के चिन्ह, मनुष्यों के मध्य अपने उदात्त धर्म की ध्वजाएँ, अपनी सशक्त संविदा के सेवक बना, हे तू हमारे परमोच्च स्वामी ! हमें अपने अब्हा साम्राज्य में अपनी दिव्य एकता की अभिव्यक्तियाँ, और सर्वत्र चमकते दीप्तिमान सितारे बना। स्वामी! हमें अपनी अद्भुत कृपा की विराट तरंगों से तरंगित सागर बनने में हमारी सहायता कर, तेरे सर्वमहिमामय शिखरों से प्रवाहित सरितायें, अपनी दिव्य धर्म के तरूवर पर लगे सुमधुर फल तेरी दिव्य अंगूर-वाटिका में तेरे उदारता की समीरों से झूमते हुए तरूवर बना। हे ईश्वर! हमारी आत्माओं को अपनी दिव्य एकता के छंदों पर आश्रित कर दे, हमारे हृदय तेरी कृपा से आनंदित जिससे कि हम समुद्र की तरंगों के समान एक हो जायें, तेरे देदीप्यमान प्रकाश कि किरणों के समान एक-दूसरे में विलीन हो जायें; कि हमारे विचार, हमारे मत, हमारी अनुभूतियाँ एक वास्तविकता बन जायें, जो सम्पूर्ण विश्व में एकता की भावना को व्यक्त करें। तू कृपालु, उदार, प्रदाता, सर्वशक्तिमान, दयावान, करूणामय है।
- `Abdu'l-Bahá