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हे तू, जिसकी निकटता मेरी कामना है, जिसका सान्निध्य मेरी आशा है, जिसका स्मरण मेरी आकांक्षा है, जिसकी महिमा का प्रांगण मेरी मंजिल है, जिसका निवास ही मेरा लक्ष्य है, जिसका नाम मेरा रोग-निवारक है, जिसका प्रेम मेरे हृदय की शक्ति है, जिसकी सेवा मेरी सर्वोच्च अभिलाषा है; मैं तेरे नाम के द्वारा जिसके द्वारा तूने, तुझे पहचानने वालों को अपने ज्ञान की परम उदात्त ऊँचाइयों तक उड़ने में समर्थ बनाया है, और भक्तिपूर्वक तेरी आराधना करने वालों को अपने अनुग्रह की परिधि में पहुँचने की शक्ति दी है, तुझसे याचना करता हूँ कि मुझे तेरे मुखारविंद की ओर उन्मुख होने में, तुझ पर अपनी दृष्टि स्थिर रखने में, और तेरी महिमा की चर्चा करने में सहायता दे।
मैं वह हूँ, हे मेरे नाथ! जिसने तेरे अतिरिक्त सब कुछ भुला दिया है और जो तेरी कृपा के दिवास्रोत की ओर उन्मुख हो गया है, जिसने तेरे प्रांगण की निकटता पाने की आशा में, तेरे अतिरिक्त अन्य सब का परित्याग कर दिया है। देख मुझे उस आसन की ओर निहारते हुए जो तेरे मुखारबिंद के प्रकाश की भव्यता से प्रकाशमान है। इसलिये, हमारे प्रियतम, मुझ तक वह भेज जो मुझे तेरे धर्म में दृढ़ रहने के योग्य बनाये, जिससे नास्तिकों के संदेह, मुझे तेरी ओर उन्मुख होने में बाधक न बन सकें।
वस्तुतः, तू ही शक्ति का ईश्वर, संकट में सहायक, सर्वप्रतापशाली, सामर्थ्यशाली है!
- Bahá'u'lláh