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स्तुति हो तेरी, हे मेरे ईश्वर। मेरे परम् प्रियतम! अपने धर्म में मुझे दृढ़ बना और वर दे कि मैं उनमें गिना जाऊँ जिन्होंने तेरी संविदा का उल्लंघन नहीं किया है और न ही अपनी व्यर्थ कल्पना के देवों का अनुसरण किया है। मुझे समर्थ बना कि तेरे सान्निध्य में मैं सत्यतः का दामन थाम सकूँ, अपनी दया का दान दे और मुझे अपने उन सेवकों में शामिल होने दे जो भय नहीं करते, न ही चिन्तातुर होते हैं। मुझे मेरे हाल पर न छोड़, हे ईश्वर, न ही मुझे उसे पहचानने से वंचित कर जो तेरा ही प्रतिरूप है और न ही मुझे उनमें गिन जो तुझसे विमुख हो चुके हैं। हे मेरे ईश्वर! मुझे उनमें गिन जिन्होंने तेरे सौन्दर्य को पहचाना है, जिन्होंने अपना सर्वस्व न्योछावर करने का सौभाग्य प्राप्त किया है और जो अपने समर्पण का एक पल भी सम्पूर्ण सृष्टि के साम्राज्य के बदले देना पसंद नहीं करेंगे। हे ईश्वर, दया कर, विशेषरूप से तब जब तेरी धरती के अधिकांश लोग राह भटक गये हैं, घातक दोषों से भर गये हैं। हे मेरे ईश्वर, मुझे वह दे जो तेरी दृष्टि में शोभनीय है। तू, सत्य ही, सर्वशक्तिशाली, उदार, करुणामय और सदा क्षमाशील है।
वर दे, हे मेरे ईश्वर! कि मैं उनमें न गिना जाऊँ जो कान रहते सुन नहीं पाते, आँख रहते देख नहीं पाते, जिह्वा होते हुए भी मूक बने बैठे हैं और जिनके हृदय कुछ भी समझने में विफल हो गये हैं। हे ईश्वर, मुझे अज्ञानता की अग्नि और स्वार्थी इच्छाओं से मुक्त कर, अपनी सर्वोच्च दया की परिधि में रहने दे और मुझे वह दे जो तूने चुने हुये जनों के लिये निर्धारित किया है। तू जैसा चाहे करने में समर्थ है। सत्य ही तू, संकट में सहायक, स्वयंजीवी है।
- The Báb