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देखता है तू, हे स्वामी ! तेरी अनुकम्पा और कृपा के लिये आकाश की ओर फैले मेरे याचना भरे हाथों को। वर दे कि ये तेरी उदारता और कृपा से परिपूर्ण सहायता के बहुमूल्य रत्नों से भर जायें। मुझे और मेरे माता-पिता को क्षमादान दे और मैंने तेरे आशीष और तेरी दिव्य उदारता के महासागर से जो कुछ भी पाना चाहा है, उनसे इन्हें भर दे। मेरे हृदय के प्रिय ईश्वर, अपनी राह में अर्पित मेरे सभी कर्म स्वीकार कर। सत्य ही, तू सर्वशक्तिशाली, सर्वोच्च, अतुलनीय, एकमेव है। सत्य ही, तू एक, एकाकी, क्षमादाता, करूणामय है।
- Bahá'u'lláh