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वह करुणामय, सर्वकृपालु है! हे ईश्वर, मेरे ईश्वर! तू मुझे देखता है, तू मुझे जानता है, तू ही मेरी शरण और मेरा आश्रय है, मैंने तेरे अतिरिक्ति किसी अन्य की न कामना की है, न करूंगा। तेरे प्रेम-पथ के सिवा मैंने अन्य किसी पथ पर न पाँव रखा है न रखूँगा। निराशा की अंधियारी रात में मेरी आँखें, अपेक्षा और आशा से भरी हुई, तेरे असीम अनुग्रह के प्रभात की ओर लगी हैं और अरुणोदय की बेला में मेरी मुरझाई हुई आत्मा तेरे सौन्दर्य और तेरी परिपूर्णता के स्मरण से नवस्फूर्ति और शक्ति प्राप्त करती है। जिसे तेरी दया का सहारा है वह एक बूंद भी हो तो असीम महासागर बन जायेगा और जिस पर तेरी स्नेहिल कृपालुता का उमड़ता प्रवाह हो वह तुच्छ धूलकण होकर भी जगमगाता सितारा सा जगमगायेगा।
हे तू पावनता की चेतना! हे तू जो असीम दाता है। अपने इस दीप्त दास को अपनी सुरक्षा में शरण दे।
अस्तित्व के इस संसार में इसे शक्ति दे कि यह तेरे प्रेम में दृढ़ और अडिग रहे और वर दे कि यह पंख टूटे पंछी को स्वर्गिक वृक्ष के नीड़ में शरण और आश्रय पाये।
- `Abdu'l-Bahá