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तू प्रतापशाली है, हे स्वामी, मेरे ईश्वर! अंतर्दृष्टि सम्पन्न प्रत्येक व्यक्ति तेरी सम्प्रभुता और तेरे अधिराज्य को स्वीकार करता है और प्रत्येक विवेकशील नेत्र तेरे वैभव की महानता और सामर्थ्य की बाध्यकारी शक्ति को देख पाता है ।
परीक्षाओं के प्रचंड झंझावात भी उन्हें रोक सकने में असमर्थ हैं। जो तेरी महिमा के क्षितिज को निहारते हैं, और तेरी निकटता का आनन्द पाते हैं; जिन्होंने तेरी इच्छा के प्रति स्वयं को पूरी तरह कर समर्पित कर दिया है, उन्हें तेरे सान्निध्य से दूर कर पाने में या तुझ तक पहुँचने में संकटों के झंझावात भी बाधा नहीं बन सकते। ऐसा लगता है कि उनके हृदय में प्रज्ज्वलित प्रेम के दीपक और ललक उठी है तेरी मृदुलता की ज्योति उनके वक्ष में है। विपदायें भी उन्हें तेरे धर्म से विमुख करने में असमर्थ हैं और भाग्य के उलट-फेर भी उन्हें तेरी सुप्रसन्नता के पथ से नहीं भटका सकते हैं।
मैं तुझसे याचना करता हूँ हे मेरे ईश्वर, उनके द्वारा और उनकी उन आहों के द्वारा जो तेरे वियोग में उनके हृदय से निकली हैं, कि उन्हें अपने विरोधियों के दुष्कृत्यों से सुरक्षित रख और उनकी आत्मा को उससे पोषित कर जिसका विधान तूने अपने उन प्रियजनों के लिये किया है जिन्हें कोई भय ग्रस्त नहीं करता और जिन पर कोई विपदा नहीं आयेगी।
- Bahá'u'lláh