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हे मेरे ईश्वर! मैं तेरी शरण में जाग उठा हूँ, और जो उस शरण की कामना करे उसके लिये यह उचित है कि वह तेरे संरक्षण के शरण-स्थल और तेरी सुरक्षा के दुर्ग में निवास करे। हे मेरे स्वामी! अपने प्रकटीकरण के उद्गमस्थल की भव्यताओं से मेरे अंर्तमन को प्रदीप्त कर दे वैसे ही, जैसे तूने मेरे बाह्य अस्तित्व को अपनी कृपा के प्रभात-प्रकाश द्वारा आलोकित किया है।
- Bahá'u'lláh