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हे स्वामी, अपनी दिव्य एकता के वृक्ष के शीघ्र विकास का विधान कर। हे स्वामी, अपनी सुप्रसन्नता की जलधार से इसे सींच और अपने दिव्य आश्वासन के प्रकटीकरण से इससे ऐसे फल उपजा जैसा तू अपने गुणगान एवं महिमागान के लिये, अपनी स्तुति और आभार के लिये, अपने नाम की स्तुति के लिये, अपने सारत्व की एकता के लिये और अपनी उपासना में समर्पण के लिये चाहता है! सभी कुछ तेरी मुट्ठी में है। परम सौभाग्यशाली हैं वे जिनके रक्त का तूने अपने अस्तित्व के वृक्ष को सींचने के लिये और अपनी पावन और अतुलनीय वाणी को यशस्वी बनाने के लिये चुना है।
- The Báb