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गुणगान हो तेरे नाम का, हे स्वामी, मेरे ईश्वर! समस्त भू पर अंधियारा छा गया है और सभी राष्ट्रों को दुष्ट शक्तियों ने घेर लिया है। इसमें भी मैं तेरे विवेक को और पाता हूँ तेरे विधान की चमक देखता हूँ।
वे जो तुझसे दूर आवरण में लिपटे हैं, उन्होंने समझ लिया है कि उनमें तेरे प्रकाश को बुझा देने की और तेरी अग्नि को मिटा देने की और तेरी कृपा के पवन झकोरों को रोक लेने की शक्ति है, किन्तु नहीं, तेरी प्रभुता मेरी साक्षी है यदि प्रत्येक विपदा तेरे विवेक और प्रत्येक अग्नि-परीक्षा तेरे मंगल-विधान का संवाहक नहीं बनाई गई होती तो हमारा विरोध करने का साहस कोई भी नहीं दिखाता, भले ही धरती तथा आकाश की समस्त शक्तियाँ हमारे विरूद्ध उठ खड़ी होतीं। यदि मैं तेरे विवेक के अद्भुत रहस्यों को, जो मेरे सम्मुख खुले पड़े हैं, प्रकट कर देता तो तेरे शत्रुओं के साम्राज्य विदीर्ण हो जाते। अतः, गुणगान हो तेरे नाम का, हे मेरे ईश्वर! मैं तुझसे याचना करता हूँ, तेरे परम महान नाम से कि जो तुझसे प्रेम करते हैं, उन्हें अपने उस विधान के चतुर्दिक एकत्र कर जो तेरी इच्छा की कृपा से प्रवाहित हुआ है और उनके लिये वह भेज जो उनके हृदयों को आश्वस्त करे।
तू जैसा चाहे वैसा करने में समर्थ है। सत्य ही तू संकट में सहायक, स्वयंजीवी है।
- Bahá'u'lláh