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वह ईश्वर है! हे स्वामी, मेरे ईश्वर, मेरे परम प्रियतम! ये तेरे वे सेवक हैं जिन्होंने तेरी पुकार सुनी है, तेरी वाणी, तेरे आह्वान पर ध्यान दिया है और विश्वास किया है; ये साक्षी रहे हैं तेरी अद्भुत लीला के, इन्होंने तेरे प्रमाणों को और पुष्ट किया है तेरे साक्ष्यों को स्वीकारा है; तेरे मार्गदर्शन का अनुसरण किया है, और जाना है तेरा रहस्य, और पाया है मंत्र तेरे ग्रंथ का; तेरी पातियों का स्रोत पाया है, तेरे संदेशों का भाव और तेरे प्रकाशन और भव्यता के परिधान का आंचल दृढ़ता से थाम लिया है; जिनके पग तेरी संविदा में अडिग हैं, तेरे प्रमाण में उनके हृदय दृढ़ हैं।
स्वामी! तू उनके हृदय में अपने दिव्य आकर्षण की लौ को प्रज्वलित कर दे और वरदान दे कि प्रेम और ज्ञान का पंछी उनके हृदय में चहके। वर दे कि वे तेरे ऐसे समर्थ चिन्ह बनें, ऐसी जगमगाती ध्वजायें बनें व परिपूर्णता को प्राप्त हों जैसे तेरे शब्द परिपूर्ण हैं। तू अपना धर्म उनके माध्यम से उन्नत कर, अपनी धर्म-ध्वजा और दूर-दूर तक फहरा, अपनी अद्भुत लीला का विस्तार कर। अपनी वाणी को उनके माध्यम से विजयी बना और अपने प्रियजनों के मेरूदंड सशक्त कर। उनकी वाणी को अपने गुणगान के लिये मुक्त कर, उन्हें तू अपनी पावन इच्छा के पालन के लिये प्रेरित कर। अपने पावन साम्राज्य में उनके मुखड़ों को आलोकित कर और अपने धर्म की विजय के लिये उठ खड़े होने में उनकी सहायता करके उनका आनन्द बढ़ा। स्वामी, हम निर्बल हैं, हमें अपनी पावनता की सुरभि का प्रसार करने की शक्ति दे; हम दरिद्र हैं, अपनी दिव्य एकता के कोष से हमें समृद्ध बना; हम परिधानहीन हैं, अपनी कृपा के परिधान हमें धारण करा; हम पापी हैं, अपनी कृपालुता, अनुग्रह और क्षमाशीलता से हमारे पापों को क्षमा कर। सत्य ही, तू ही सम्बल देने वाला, सहायक, कृपालु, सामर्थ्यशाली और शक्तिशाली है। महिमाओं की महिमा उन पर विराजे, जो दृढ़ और अटल हैं।
- `Abdu'l-Bahá