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स्तुति हो तेरी, हे स्वामी, मेरे ईश्वर! कृपापूर्वक वर दे कि यह शिशु तेरी स्नेहसिक्त दया और तेरे प्रेमपूर्ण मंगलविधान के स्तनों से आहार पाये और तेरे दिव्य वृक्ष के फल से पोषित हो। इसे अपने अतिरिक्त अन्य किसी के सार-सम्भाल में न छोड़, क्योंकि तूने अपनी सर्वोपरि इच्छा और शक्ति से इसका सृजन किया है और इसे अस्तित्व दिया है। तुझ सर्वशक्तिशाली, सर्वज्ञाता के सिवा अन्य कोई ईश्वर नहीं है।
- Bahá'u'lláh