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हे ईश्वर! मेरे स्वामी! मैं छोटी उम्र का बालक हूँ, अपनी दया के दुग्ध से मेरा पोषण कर, अपने प्रेम के वक्ष से मुझे प्रशिक्षण दे, अपने मार्गदर्शन की पाठशाला में मुझे शिक्षित कर और अपने आशीष की छत्रछाया में मेरा विकास कर। मुझे अंधकार से मुक्ति दे, मुझे एक दीप्त प्रकाशपुंज बना दे; मुझे उदासी से छुटकारा दिला; मुझे अपनी गुलाब वाटिका का एक पुष्प बना; मुझे अपनी पावन देहरी का एक सेवक बना और मुझे सदाचारियों की वृत्ति और स्वभाव प्रदान कर; मुझे मानव संसार के लिये सम्पदाओं का एक माध्यम बना और मेरे मस्तक को शाश्वत जीवन के मुकुट से सुशोभित कर। तू निश्चय ही शक्तिशाली, सामर्थ्यवान, सर्वद्रष्टा और सबका सुनने वाला है !
- `Abdu'l-Bahá