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महिमावंत हो तेरा नाम, हे मेरे ईश्वर ! तूने उस दिवस को प्रकट किया है जो दिवसों का अधिपति है, वह दिवस जिसे तूने अपने प्रियजनों तथा दिव्य अवतरणों के समक्ष अपनी श्रेष्ठतम पातियों में घोषित किया था, वह दिवस जब तूने समस्त सृजित वस्तुओं पर अपने नामों की प्रभा बिखराई है। उसे प्राप्त तेरा आशीष महान है जिसने स्वयं को तेरी ओर उन्मुख किया है और तेरा सान्निध्य प्राप्त किया है और तेरी वाणी की प्रखरता को ग्रहण किया है।
मैं तुझसे याचना करता हूँ, हे मेरे स्वामी, तेरे उस नाम से, जिसके चहुँओर नामों का साम्राज्य आराध्य भाव से परिक्रमा करता है, कि तू अपने उन प्रियजनों की सहायता कर जो तेरे सेवकों के मध्य तेरी वाणी की महिमा का बखान करते हैं और दूर-दूर तक तेरे प्राणियों के मध्य तेरा यशोगान करते हैं, जिससे तेरी धरा के निवासियों की आत्माएँ तेरे प्राकट्य के आह्लाद से भर उठीं हैं।
हे मेरे स्वामी! तूने अपने अनुग्रह की जीवंत जलधाराओं तक पहुँचने में उनका मार्गदर्शन किया है, उन्हें उदारता से यह वर दे कि वे तुझसे विमुख न हों। तूने उन्हें अपनी सिंहासन-स्थली तक बुलाया है, अपनी स्नेहयुक्त दयालुता के द्वारा तू उन्हें अपनी समीपता से दूर न कर। उनके पास वह भेज जो उन्हें तेरे अतिरिक्त अन्य सबसे पूरी तरह अनासक्त कर दे। तू अपनी समीपता के आकाश में उन्हें उड़ान भरने में इतना समर्थ बना कि न तो दमनकर्ता के तीव्र प्रहार और न ही तेरी परम पावनता और परम शक्तिमानता में अविश्वास करने वालों के भ्रामक परामर्श उन्हें तुझसे दूर कर सकें।
- Bahá'u'lláh