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हे मेरे ईश्वर! तू देखता है मुझे दीनता में नत्, तेरे आदेशों के प्रति स्वयं को विनत होते हुए, तेरी सम्प्रभुता के प्रति समर्पित होते हुए, तेरे अधिराज्य की सामर्थ्य से प्रकम्पित होते हुए, तेरे कोप से बचते हुए, तेरी कृपा की याचना करते हुए, तेरी क्षमाशीलता पर भरोसा किये हुए, तेरे क्रोध के भय से कम्पायमान होते हुए; मैं धड़कते हृदय, अश्रुपूरित नेत्र और याचना भरी अंतश्चेतना से और सभी वस्तुओं से पूर्ण अनासक्ति के साथ तुझसे याचना करता हूँ कि तू अपने प्रेमियों को अपने साम्राज्य के आर-पार भेदती किरणों के समान बना और अपने सेवकों को अपने पावन शब्दों का गुणगान करने में सहायता दे ताकि उनके मुखड़े प्रकाश से प्रभासित और दीप्तिमान हो सकें, उनके हृदय रहस्यों से परिपूरित हो जायें और प्रत्येक आत्मा अपने पापों से मुक्त हो सके। निर्लज्ज बन गये लोगों और अधर्मियों तथा अन्याय करने वालों से उनकी रक्षा कर। सत्य ही, तेरे चाहने वाले प्यासे हैं। हे स्वामी! उन्हें अपनी दया और कृपा के निर्झर स्रोत तक ले चल। सत्य ही, वे भूखे हैं, उन तक अपना दिव्य भोज भेज। सत्य ही, वे वस्त्रविहीन हैं, उन्हें विद्वता और ज्ञान के परिधान से विभूषित कर। वे शूरवीर हैं, हे मेरे ईश्वर! उन्हें युद्ध क्षेत्र तक ले चल। वे मार्गदर्शक हैं, उन्हें तर्कों एवं प्रमाणों से युक्त बना। वे तेरे सक्रिय सेवक हैं उन्हें सेवा में दृढ़ता की मदिरा के प्याले को सबमें बांटने वाला बना। हे ईश्वर उन्हें ऐसे गायक बना जो सुदूर उपवनों में तेरा यशोगान करते हैं। उन्हें ऐसे सिंह बना, जो जंगलों में विचरण करते हैं, उन्हें ऐसे मत्स्य बना, जो अतल गहराइयों में गोते लगाते हों। सत्य ही, तू असीम अनुकम्पाओं से परिपूर्ण है। तेरे अतिरिक्त अन्य कोई ईश्वर नहीं, सामर्थ्यवान, शक्तिसम्पन्न, दाता।
- `Abdu'l-Bahá