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(ईश्वर की सुरभि का प्रसार करने वालों को प्रत्येक सुबह इस प्रार्थना का पाठ करना चाहिये।)
हे ईश्वर! मेरे ईश्वर! तू देखता है इस निर्बल को, तेरी दिव्य शक्ति की याचना करते हुए, इस निर्धन को, तेरी दैवी निधियों की कामना करते हुए इस प्यासे को, अनन्त जीवन-निर्झरनी की इच्छा लिये हुए इस पीड़ित को, उस आरोग्य की अभ्यर्थना करते हुए, जो तूने अपनी असीम कृपा के द्वारा अपने उच्च साम्राज्य में अपने चुने हुए जनों के लिये नियत की है। हे ईश्वर, तेरे अतिरिक्त मेरा कोई सहायक नहीं, तेरे अतिरिक्त मेरा कोई आश्रय नहीं, तेरे अतिरिक्त मेरा कोई पालनहार नहीं। अपने देवदूतों द्वारा मेरी सहायता कर कि मैं तेरी पावन सुरभि को सर्वत्र फैला सकूँ और देश-देशांतर में तेरे चुने हुए जनों के बीच तेरी शिक्षाओं का प्रसार कर सकूँ। हे मेरे ईश्वर! मुझे अपने सिवा अन्य सबसे अनासक्त होने की शक्ति दे, तेरी कृपा की डोर दृढ़ता से थामे रहूँ, ऐसी भक्ति दे, तेरे धर्म के प्रति पूरी तरह समर्पित रहूँ, ऐसी निष्ठा दे, तेरे प्रेम में समृद्ध और तूने अपने पावन ग्रंथ में जो भी निर्धारित किया है उसका पालन कर सकूँ, ऐसी दृढ़ता दे। सत्य ही, तू शक्तिशाली, सामर्थ्यवान और सर्वसम्पन्न है।
- `Abdu'l-Bahá