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हे ईश्वर! मेरे ईश्वर! यह एक पंख टूटा पंछी है और इसकी उड़ान बहुत धीमी है....इसकी सहायता कर कि यह समृद्धि और मुक्ति के सर्वोच्च शिखर पर उड़ान भर सके, इस असीम अंतरिक्ष में परम आनन्द और सुख सहित सर्वत्र विचरण कर सके, सभी देशों-प्रदेशों में तेरे सर्वोपरि नाम का मधुरगान गुंजरित कर सके, तेरी पुकार सुन सके और तेरे मार्गदर्शन के संकेतों को समझ सके। हे ईश्वर, मैं अकेला, एकाकी और दीन हूँ। तेरे अतिरिक्त मेरा कोई पालनहार नहीं, अवलम्बन नहीं; तेरे अतिरिक्त कोई और सहारा नहीं है। देवदूतों के समूहों द्वारा मेरी सहायता कर; अपने शब्दों के प्रसार में मुझे विजयी बना और अपने लोगों के बीच तेरे ज्ञान का प्रसार कर सकूँ, मुझे इस योग्य बना। सत्य ही, तू निर्बल का बल; और असहायों का सदा सहाय है। सत्य ही तू शक्तिशाली, बलशाली और अबाधित है।
- `Abdu'l-Bahá