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हे ईश्वर, मेरे ईश्वर! गुणगान हो तेरा, शत-शत नमन तुझे। तूने ही दिखलाई है राह मुझे उस राजमार्ग की जो सीधा है, किन्तु है बहुत लम्बा पथ; तूने ही इस पथ पर चलने के योग्य बनाया है, मेरी आँखों को नवीन प्रकाश दिया है अपनी आभा का, तूने ही रहस्यों के साम्राज्य से आने वाले पावन पक्षियों के कलरव को सुनने वाले कान दिये हैं और तूने ही न्यायनिष्ठों के मध्य अपने प्रेम से विभोर किया है। हे ईश्वर! अपनी चेतना के उच्छ्वासों से मेरा रोम-रोम को भर दे कि मैं देश-देशान्तर में सम्पूर्ण मानवजाति को तेरे आगमन का शुभ संदेश दे सकूँ, पृथ्वी पर तेरे साम्राज्य की स्थापना की बात बता सकूँ। हे ईश्वर, मैं निर्बल हूँ, अपनी शक्ति और सामर्थ्य से मुझे सबल बना। मैं अक्षम हूँ, अपनी स्तुति और गुणगान करने में मुझे सक्षम बना। मैं अधम हूँ, अपने साम्राज्य में प्रवेश देकर मुझे सम्मानित कर; मैं तुझसे अलग-थलग पड़ गया हूँ, अपनी दयालुता की पावन देहरी तक पहुँचने में मेरी सहायता कर। हे ईश्वर! मुझे एक देदीप्यमान दीपक बना दे, एक जगमगाता हुआ सितारा बना दे, फलों से भरा एक ऐसा वृक्ष बना दे जिसकी शाखाएँ फैलें। सत्य ही, तू शक्तिशाली, बलशाली, और अबाधित है।
- `Abdu'l-Bahá