Return to BahaiPrayers.net
Facebook
महिमावंत है तू, हे स्वामी, मेरे ईश्वर! मैं तेरा आभार प्रकट करता हूँ कि तूने मुझे अपने प्रकटरूप को पहचानने और अपने शत्रुओं से विरत होने योग्य बनाया है; और तेरे दिनों में उनके, द्वारा किये गये दुष्कर्मों को मेरे सम्मुख खोलकर रख दिया है और उनके प्रति मुझे आसक्तियों से मुक्त किया है और पूर्णतया तेरी दया और कृपामय अनुग्रहों की ओर उन्मुख होने में समर्थ बनाया है। मैं इसके लिये भी तेरा आभार प्रकट करता हूँ कि तूने अपनी इच्छा के मेघों द्वारा मुझ तक वह भेजा है जिसने मुझे अधर्मियों के संकेतों और अविश्वासियों के भ्रांत विचारों से इतना मुक्त कर दिया है कि मैंने अपना हृदय दृढ़ता से तुझमें लगा लिया है और ऐसे लोगों से दूर भाग आया हूँ जिन्होंने तेरे मुखारबिन्द के प्रकाश को नकार दिया है। तब मैं पुनः तेरा आभार प्रकट करता हूँ कि तूने मुझे अपने प्रेम में दृढ़ रहने का, तेरी स्तुति करने का, तेरा गुणगान करने का और तेरे उस कृपा-पात्र से पान करने का अवसर दिया है जो सभी दृश्य और अदृश्य वस्तुओं के परे है। तू सर्वशक्तिशाली, परम उदात्त, सर्वमहिमाशाली, सभी को प्रेम करने वाला है।
- Bahá'u'lláh