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सर्वस्तुति हो तेरी, हे मेरे ईश्वर! तू, जो समस्त महिमा और भव्यता, महानता और गौरव, सम्प्रभुता और साम्राज्य, उच्चता और कृपालुता, विस्मय और शक्ति का स्रोत है। जिसे तू चाहता है उसे अपने परम महान सिंधु को स्वीकारने का सौभाग्य प्रदान करता है। और जिसे तू चाहता है उसे अपने परम महान नाम को स्वीकारने का सौभाग्य प्रदान करता है। आकाश और धरती के समस्त वासियों में से कोई भी तेरे तेरी सम्प्रभु इच्छा को पूरा होने से रोक नहीं सकता। अनादिकाल से तूने सम्पूर्ण सृष्टि पर शासन किया है और करता रहेगा तेरा ही अधिपत्य सदा समस्त सृजित वस्तुओं पर है। सर्वसामर्थ्यवान, परम उदात्त सर्वशक्तिशाली सर्वप्रज्ञ के अतिरिक्त अन्य कोई ईश्वर नहीं है।
हे स्वामी! अपने सेवकों के मुखड़ों को दीप्त कर दे और उनके हृदय को निर्मल कर दे कि वे तेरे दिव्य अनुग्रहों की ओर उन्मुख हो सकें और पहचान सकें उसे जो तेरा और तेरे दिव्य सारतत्व का उद्गमस्थल है। वस्तुतः, तू ही समस्त लोकों का स्वामी है! तेरे अतिरिक्त अन्य कोई ईश्वर नहीं, अबाधित, सर्ववशकारी।
- Bahá'u'lláh