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हे मेरे ईश्वर! हे मेरे ईश्वर! सत्य ही, ये सेवक तेरी ओर उन्मुख हो रहे हैं, तेरी दया के साम्राज्य की याचना कर रहे हैं। सत्य ही ये तेरी पावनता के प्रति आकर्षित हुए हैं और तेरे प्रेम की ज्वाला से दीप्त हो उठे हैं, तेरे महिमामय लोक की दया की कामना कर रहे हैं और तेरे दिव्य साम्राज्य में प्रवेश पाने की आशा रखते हैं। सत्य ही, ये तेरे आशीषों की वर्षा की कामना करते हैं और सत्य सूर्य से प्रकाशित होने की इच्छा रखते हैं। हे ईश्वर, इन्हें देदीप्यमान दीपक बना दे। ऐसा वर दे कि ये तेरे योग्य बन सकें, तेरे प्रेम की डोर से बंध सकें और तेरी अनुकम्पा का प्रकाश पा सकें। हे स्वामी ! इन्हें मार्गदर्शन के चिन्ह बना, अपने शाश्वत साम्राज्य का आदर्श प्रतिरूप बना, अपने कृपासागर की उत्ताल तरंगें बना, अपनी भव्यता के प्रकाश को प्रतिबिम्बित करने वाला दर्पण बना।
सत्य ही, तू उदार, दयामय, अनमोल, परम प्रियतम है।
- `Abdu'l-Bahá