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हे तू कृपालु ईश्वर! हे तू, जो समर्थ और शक्तिशाली है। हे तू परम दयालु पिता! ये सेवक तेरी ओर उन्मुख होकर, तेरी पावन देहरी का स्मरण करते हुए और तेरे महान आश्वासन की अनन्त कृपा की कामना करते हुए एकत्रित हुए हैं। तुम्हारी सुप्रसन्नता के अतिरिक्त इनका और कोई उद्देश्य नहीं है। मानव-सेवा के अतिरिक्त इनका और कोई उद्देश्य नहीं है।
हे ईश्वर! इस सभा को दीप्त कर। इनके हृदयों को दयावान बना। पावन चेतना के आशीष इन्हें प्रदान कर। दिव्य शक्ति से इन्हें विभूषित कर। इन्हें दिव्य विवेक का आशीष दे। इनकी निष्ठा बढ़ा ताकि पूर्ण विनम्रता और सम्पूर्ण समर्पण की भावना के साथ ये तेरे साम्राज्य की ओर उन्मुख हो सकें और मानव-सेवा में लगे रहें। इनमें से प्रत्येक प्रकाशित दीप बने। इनमें से प्रत्येक जगमगाता सितारा बने। इनमें से प्रत्येक ईश्वर के साम्राज्य के सुन्दर रंग और सुरभि के संवाहक बनें।
हे दयालु पिता! अपने आशीष भेज। हमारे दोषों को न देख। अपनी सुरक्षा में हमें आश्रय दे। हमारे पापों को क्षमा कर। अपनी कृपा से हमें आरोग्य प्रदान कर। हम शक्तिविहीन हैं, तू शक्तिशाली है। हम दरिद्र हैं, तू सम्पन्न हैं ! हम रोगग्रस्त हैं, तू दिव्य चिकित्सक है! हम आवश्कताग्रस्त हैं, तू परम उदार है!
हे ईश्वर ! अपने मंगलविधान से हमें विभूषित कर। तू शक्तिशाली है ! तू कल्याणकारी है ! तू दाता है!
- `Abdu'l-Bahá