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हे तू दयालु ईश्वर! ये तेरे सेवक हैं जो इस सभा में एकत्रित हुए हैं, तेरे साम्राज्य की ओर उन्मुख हैं और तेरे उपहार तथा आशीर्वाद की कामना करते हैं। हे ईश्वर जीवन के यथार्थ में निहित एकता के अपने चिन्हों को प्रमाणित और प्रकट कर। उन गुणों को प्रकट और प्रत्यक्ष कर जो मानवीय यथार्थों में अप्रकट तथा गुप्त रखे गये हैं।
हे ईश्वर, हम पौधों की भाँति हैं और तेरी कृपा वर्षा के समान है। इन पौधों को नवस्फूर्ति प्रदान कर, इन्हें अपने आशीष से विकसित कर। हम तेरे सेवक हैं, हमें भौतिक अस्तित्व की बेड़ियों से मुक्त कर। हम अज्ञानी है, हमें ज्ञानी बना। हम मृत हैं, हमें जीवन दे। हम जड़ हैं, हमें चैतन्य बना। हम वंचित हैं, हमें अपने रहस्यों का बोध करा। हम दीन हैं, हमें अपने असीम कोष से समृद्धि और आशीष प्रदान कर।
हे ईश्वर, हमें पुनर्जीवित कर, दृष्टि तथा श्रवण शक्ति प्रदान कर, जीवन के रहस्यों से परिचित करा, ताकि अस्तित्व के प्रत्येक लोक में तेरे साम्राज्य के रहस्य हम पर प्रकट हों और हम तेरी एकमेवता के साक्षी बन सकें। तू ही प्रत्येक कृपा का स्रोत है। तू समर्थ, शक्तिसम्पन्न, दाता, सदा कृपालु है।
- `Abdu'l-Bahá