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महिमा हो तेरी, हे ईश्वर, मेरे ईश्वर! तेरे नाम से मैं तुझसे याचना करता हूँ जिसके द्वारा तूने अपने मार्गदर्शन की ध्वजाओं को उच्च किया है और अपनी स्नेहमयी कृपालुता की कीर्ति-प्रभा बिखेरी है और अपने स्वामित्व की सत्ता को प्रकट किया है, जिसके द्वारा अपने नामों का दीपक अपने गुणों के निवास में तूने आलोकित किया है; और जिसके द्वारा वह, जो तेरी एकता का मण्डप-वितान और अनासक्ति का मूर्तरूप है, प्रकट हुआ है; जिसके माध्यम से तेरे मार्गदर्शन के पथों का ज्ञान हुआ है, तेरी प्रसन्नता के मार्ग रेखांकित किये गये हैं, जिसके द्वारा पाप करने वालों की नींव हिला दी गई है और दुष्टता के चिन्ह मिटा दिये गये हैं, जिसके द्वारा प्रज्ञा के निर्झर स्रोत प्रगट हुए हैं और दिव्य भोज की पाती भेजी गई है, जिसके द्वारा तूने अपने सेवकों को सुरक्षित किया है और अपनी सुकोमल दया उनके प्रति प्रकट की है और अपने प्राणियों के मध्य अपनी क्षमाशीलता दिखाई है, उसके नाम से मैं तुझसे याचना करता हूँ कि जो दृढ़ बना रहा है और जो तुझ तक वापस लौट आया है और तेरी दया की डोर थामे हुए है और तेरे प्रेमपूर्ण मंगल-विधान के परिधान की छोर से जुड़ा रहा है, उसे सुरक्षित रख और उसे तेरे द्वारा प्रदान की गई निरन्तरता से और तेरी इस उदात्त सत्ता से प्रदत्त प्रशांतता से मंडित कर। तू निश्चय ही आरोग्यदाता, संरक्षणदाता, सहायक, सर्वशक्तिमान, बलशाली, सर्वमहिमामय, सर्वज्ञाता है।
- Bahá'u'lláh