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वह सर्वशक्तिशाली, क्षमाशील, करुणामय है! हे ईश्वर मेरे ईश्वर! तू देखता है अपने इन सेवकों को जो द्रोह और भूलों की गर्त में पड़े हैं, तेरे दिव्य मार्गदर्शन की वह ज्योति कहाँ है? हे तू, विश्व की कामना! तू उनकी निस्सहायता और निर्बलता को जानता है। तेरी शक्ति कहाँ है, जिसके अधीन धरती और आकाश की समस्त शक्ति है?
तेरी स्नेहिल दया के प्रकाश के तेज के नाम से, तेरी प्रज्ञा के महासागर की तरंगों के नाम से, तेरी उस वाणी के नाम से, जिसने अपने साम्राज्य के जनों पर अपना आधिपत्य स्थापित किया है, मैं याचना करता हूँ, हे मेरे स्वामी! कि तू मुझको वर दे कि मैं उनमें से एक बनूं जिन्होंने तेरे ग्रंथ में विहित आदेशों का पालन किया है। मेरे लिये उसका विधान कर, जिसका विधान तूने अपने विश्वासपात्र सेवकों के लिये किया है, जिन्होंने तेरे कृपा-पात्र से दिव्य प्रेरणा की मदिरा का पान किया है और जो तेरी प्रसन्नता के लिये, तेरी संविदा में अडिग रहे हैं और तेरे विधानों के पालन की ओर अग्रसर हुए हैं। तू जैसा चाहे वैसा करने में समर्थ है। तेरे अतिरिक्त अन्य कोई ईश्वर नहीं, तू सर्वज्ञ, सर्वप्रज्ञ है।
हे स्वामी अपनी कृपा से मेरे लिये उसका आदेश दे जो इहलोक और परलोक में मुझे समृद्ध बनाये और तेरे निकट ले आये। हे तू, जो सभी मनुष्यों का स्वामी है ! तेरे अतिरिक्त अन्य कोई ईश्वर नहीं है, एकमेव, शक्तिमान, महिमावंत।
- Bahá'u'lláh