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हे मेरे ईश्वर! अपनी राह में हमारे पगों को अडिग बना, हमारे हृदयों को अपने आदेश के पालन में समर्थ बना। अपनी एकता के सौन्दर्य की ओर हमें उन्मुख कर और हमारे अन्तर्मन को अपनी दिव्य एकता के चिन्हों से आह्लादित कर दे। अपनी कृपा के परिधान से हमारी काया को सजा दे। हमारी आँखों के सामने से पाप कर्मों के पर्दे हटा दे और हमें अपनी कृपा का वह पात्र दे जिससे तेरी भव्यता की अनुभूति कर सभी तेरा स्तुति करने लगे। अपनी कृपालु जिह्वा और अपने रहस्यमय अस्तित्व से तब वह प्रकट कर, हे मेरे ईश्वर, कि हमारी आत्माएँ प्रार्थना के अतिरेक से भर उठें और सभी पदार्थ तेरे प्रकटीकरण के प्रभापुंज के समक्ष अस्तित्वहीन हो जायें; ऐसी प्रार्थना जो शब्दों, स्वरों और समस्त संकेतों से परे, हृदय से निकली हो। हे ईश्वर, ये वे सेवक हैं जो तेरी संविदा और तेरे विधानों के अनुपालन में अडिग और अटल रहे हैं, जो तेरे धर्म के प्रति निष्ठा की डोर थामे हुए हैं और तेरे प्रताप के परिधान की आँचल से लिपटे हुए हैं। इन्हें अपनी अनुकम्पा दे, इनकी सहायता कर। हे मेरे ईश्वर! अपनी आज्ञापालन में इन्हें अडिग बना और अपनी शक्ति से इन्हें सम्पुष्ट कर। तू क्षमाशील, करुणामय है।
- `Abdu'l-Bahá