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हे करुणामय ईश्वर! धन्यवाद हो तेरा कि तूने मुझे जगाया, चेतना दी। देखने के लिये मुझे आँखे दीं और मुझे समर्थ कान दिये। तूने अपने साम्राज्य की राह दिखलाई, तूने मुझे सच्चा पथ दिखलाया और मुझे मुक्ति की नौका में प्रवेश दिया है। हे ईश्वर! मुझे अडिग बनाये रख और मुझे निष्ठा में अटल बना। प्रचण्ड परीक्षाओं से मेरी रक्षा कर अपनी संविदा के मंदिर और विधानों के दुर्ग में मुझे संरक्षण दे। तू सर्वदृष्टा है, तू सब की सुनने वाला है।
हे तू करुणामय ईश्वर! मुझे एक ऐसा हृदय प्रदान कर जो दप्रण की भाँति तेरे प्रेम की ज्योति से प्रकाशित हो और अपनी दिव्य कृपा की वर्षा से मुझे ऐसे विचारों का दान दे, जो इस संसार को एक गुलाब वाटिका में बदल दे।
तू करुणामय, कृपालु, कल्याणकारी ईश्वर है।
- `Abdu'l-Bahá