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हे मेरे स्वामी और, मेरी आशा! तू अपने इन प्रियजनों को तेरी परम सामर्थ्यमय संविदा में अडिग रहने में, और तेरे इस प्रकटित धर्म के प्रति निष्ठावान रहने में, तेरे महिमाओं के ग्रंथ में विहित आदेशों का पालन करने में सहायता कर जिससे कि ये दिव्य लोक के सहचरों के मार्गदर्शन की ध्वजा और दीपक बन सकें, तेरी अनन्त प्रभा के निर्झर स्रोत और सच्चा पथ दिखाने वाले वे तारक बन सकें, जो उस दिव्य गगन से जगमगाते हैं।
निश्चय ही तू अजेय, सर्वसमर्थ, सर्वशक्तिमान् है।
- `Abdu'l-Bahá