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स्तुति हो तेरी, हे स्वामी, मेरे ईश्वर! तू देखता है और जानता है कि मैंने तेरे सेवकों का अन्य किसी ओर नहीं, बल्कि बस तेरी कृपा की ओर उन्मुख होने का आह्वान किया है और इन्हें उन आदेशों का पालन करने को कहा है जो तेरे बोधगम्य निर्णय और अटल उद्देश्य के द्वारा भेजे गये हैं।
हे मेरे ईश्वर! जब तक तेरी आज्ञा न हो मैं एक शब्द भी नहीं बोल सकता और जब तक तेरी स्वीकृति न मिले न ही किसी भी ओर जा सकता हूँ। तू ही है मेरे ईश्वर जिसने अपनी सामर्थ्य की शक्ति से मुझे अस्तित्व दिया है और अपने धर्म का संदेश देने के लिये अपनी कृपा प्रदान की है। इसी कारण मुझ पर इतनी विपत्तियाँ ढ़ायी गईं हैं कि मेरी जिह्वा पर तेरा गौरवगान करने और तेरी महिमा का उद्घोष करने से रोक दी गई है।
सर्वज्ञ स्तुति हो तेरी, हे मेरे ईश्वर ! उन सब के लिये जिसका विधान अपने आदेश और अपनी सम्प्रभुता की शक्ति से तूने किया है, मैं तुझसे याचना करता हूँ कि तू मेरे और अपने प्रेमियों को अपने प्रेम को सुदृढ़ रख। तुझे तेरी सामर्थ्य की सौगंध, हे मेरे ईश्वर! मात्र एक पर्दे के कारण मैं तुझसे दूर होकर लज्जित हूँ। तुझे जानूं मेरा गौरव तो इसी में है। तेरे नाम की शक्ति का कवच धारण कर लेता हूँ तब कोई भी आघात चोट नहीं पहुँचा पाता और मेरे हृदय में जब तेरा प्रेम होता है तब संसार की विपदाएँ भी मुझे विचलित नहीं कर पातीं। अतः, हे मेरे ईश्वर! वर दे कि तेरे सत्य का खण्डन करने वालों और तेरे चिन्हों में अविश्वास करने वालों से मेरी रक्षा हो सके। तू ही, वस्तुतः, सर्वमहिमाशाली, सर्वकृपालु है।
- Bahá'u'lláh