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महिमावंत हो तेरा नाम, हे मेरे ईश्वर! तेरे उस नाम के सहारे, जिसके द्वारा काल ठहर गया था, पुनर्जीवन सम्भव हुआ था और धरती तथा आकाश के सभी वासी भयभीत हो उठे थे, मैं याचना करता हूँ कि उन सब से, जो तेरी ओर उन्मुख हुए हैं और तेरे धर्म के कार्यों में संलग्न हैं, अपनी कृपा के आकाश और अपनी स्नेहिल करूणा के बादलों से वह बरसा जो उन सेवकों के हृदयों को उल्लसित कर दे। हे स्वामी! अपने सेवक और सेविकाओं को असद् आसक्ति और व्यर्थ-कल्पनाओं की पीड़ा से बचा और अपने ज्ञान की निर्मल जलधार से एक घूंट पीने की अनुकम्पा प्रदान कर। तू, सत्य ही, सर्वशक्तिमान, परम उदात्त, सदा क्षमाशील, और परम उदार है।
- Bahá'u'lláh