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हे मेरे स्वामी, मेरे लिये और उनके लिये जो तेरे भक्त हैं, उसका विधान कर, जिसे तूने अपने मातृग्रंथ के अनुरूप हमारे लिये सर्वोत्तम समझा हो, क्योंकि तेरी मुट्ठी में सभी वस्तुओं के परिणाम बंद हैं। तेरे मंगलमय उपहार अविरल बरसते हैं उन पर सब जिन्होंने तेरे प्रेम की कामना की है। तेरी दिव्य कृपा के अद्भुत चिन्हों का भरपूर दान मिलता है उनको, जो तेरी दिव्य एकता को समझ पाये हैं। तूने हमारे लिये जो कुछ भी विधान किया है उसे हम तेरी सार-सम्भाल में अप्रित करते हैं और तुझसे विनती करते हैं कि हमको वह सब शुभ मंगल प्रदान कर जो तेरे ज्ञान की परिधि में आता है। हे मेरे स्वामी, अपनी अन्तर्दृष्टि से प्रत्येक अशुभ से मेरी रक्षा कर, क्योंकि तेरे अतिरिक्त अन्य सभी शक्तिहीन हैं और तेरे सान्निध्य के अतिरिक्त कहीं से विजय का उद्भव नहीं होता। एकमात्र तेरा ही आदेश देने का अधिकार है जो भी ईश्वर ने चाहा है, वही हुआ है और जो नहीं चाहा है वह कदापि घटित नहीं होगा। परम उदात्त, परम सामर्थ्यवान ईश्वर के अतिरिक्त और किसी में शक्ति और सामर्थ्य नहीं है।
- The Báb