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ईश्वर के नाम से, जो सबको वश में करने वाली भव्यता का स्वामी है, सर्वसम्मोहक है !
परम पावन वह स्वामी है, जिसके हाथ में साम्राज्य का स्रोत है। वह जो चाहता है सृजन करता है, अपने उस शब्द के माध्यम से ”हो जा“ के आदेश से और वह हो जाता है। शासन की शक्ति पहले भी उसी की थी और आगे भी उसी की रहेगी। अपने आदेश की शक्ति से वह जिसे चाहे विजयी बनाता है। सत्य ही, वह सर्वसमर्थ, सर्वशक्तिमान है। प्रकटीकरण और सृष्टि के साम्राज्य में, जो भी है और जो भी इनके मध्य है, समस्त महिमा और भव्यता उसी की है। सत्य ही, वह सर्वसमर्थ, सर्वमहिमावंत है। सदासर्वदा से वह अदम्य शक्ति का स्रोत रहा है और अनन्तकाल तक रहेगा। धरती और आकाश के समस्त लोक ईश्वर के हैं; उसकी शक्ति सर्वव्यापी है। धरती के समस्त खज़ाने और जो भी इनके मध्य है, सब उसी के हैं और उसके संरक्षण की छत्रछाया तले समस्त वस्तुओं से परे है। धरती और आसमानों का वही स्रष्टा है, और जो भी इनके मध्य स्थित है, सत्य ही, वह सर्वोपरि साक्षी है। धरती और आकाश के समस्त वासियों और जो भी इनके मध्य स्थित हैं, उन सबका वही निर्णायक है। सत्य ही, वह ईश्वर तत्क्षण निर्णय लेता है। वही है धरती और आकाश के समस्त वासियों और जो भी इनके मध्य स्थित है, उन सबके लिये अंशों का निर्धारक वस्तुतः, वही है सर्वोच्च संरक्षक; उसकी मुट्ठी में कैद हैं धरती और आकाश और जो भी इनके मध्य स्थित हैं इनके मध्य की कुंजी है। वह अपने आदेश की शक्ति के माध्यम से स्वयं अपनी ही प्रसन्नता से, उपहारों का दान देता है। वस्तुतः वह सभी कुछ का जानने वाला है और उसकी कृपा सभी कुछ को अपनी परिधि में लिये हुए है।
कहो, ईश्वर मेरा सर्वोपरि परिपूरक है, उसकी मुट्ठी में समस्त वस्तुओं का साम्राज्य कैद है। धरती और आकाश, और जो कुछ भी इनके मध्य है, उन सबकी वह रक्षा करता है। ईश्वर सत्य ही, समस्त वस्तुओं पर अपनी दृष्टि रखता है।
हे स्वामी, तू अपरिमेय रूप से उदात्त है! हमारे समक्ष और हमारे पीछे, हमारे सिर के ऊपर, हमारे दायें और बायें, हमारे पैरों तले, और प्रत्येक उस दिशा से जिससे भी हम असुरक्षित हैं, उन सबसे हमारी रक्षा कर। वस्तुतः समस्त पदार्थों पर तेरा संरक्षण अचूक है।
- The Báb