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हे ईश्वर! मेरे ईश्वर्! अहम् और वासना की आसुरी प्रवृत्तियों से अपने सत्यनिष्ठ सेवकों की रक्षा कर, अपनी स्नेहमयी दयालुता की सदा सावधान दृष्टि द्वारा प्रत्येक विद्वेष, घृणा और ईर्ष्या से इन्हें बचा, अपनी सार-सम्भाल के अभेद्य दुर्ग में इन्हें आश्रय दे और संदेहों के बाणों से इनकी रक्षा कर, इन्हें अपने महिमामय चिन्हों के मूर्तरूप बना। अपनी दिव्य एकता के सूर्य से निकलने वाली दीप्तिमान किरणों से इनके मुखड़ों को आलोकित कर, अपने दिव्य साम्राज्य से प्रकट किये गये छंदों द्वारा इनके हृदयों को आनन्दित कर दे, अपने परमलोक से आने वाली सर्वसमर्थ शक्ति द्वारा इन्हें समर्थ बना।
तू सर्वप्रदाता, सर्वरक्षक, सर्वसामर्थ्यशाली और सर्वकृपालु है।
- `Abdu'l-Bahá