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बहाउल्लाह द्वारा प्रकट की गई दैनिक अनिवार्य प्रार्थनाएँ संख्या में तीन हैं। प्रत्येक बहाई को चाहिये कि इनमें से कोई एक प्रार्थना को वह चुन ले और अनिवार्य रूप से उसका पाठ प्रतिदिन करे। अनिवार्य प्रार्थना का पाठ उनके साथ दिये गये विशेष निर्देशों के अनुसार ही किया जाना चाहिये।
”अनिवार्य प्रार्थनाओं के संदर्भ में ’सुबह‘ ’दोपहर‘ और ’संध्या‘ का अर्थ है सूर्योदय से दोपहर तक, दोपहर से सूर्यास्त तक और सूर्यास्त से लेकर सूर्यास्त के दो घंटे पश्चात तक का समय।“
चैबीस घंटे में एक बार, दोपहर से संध्या के बीच इस प्रार्थना का पाठ करना चाहिये।
मैं साक्षी हूँ, हे मेरे ईश्वर! कि तुझे जानने तथा तेरी आराधना करने हेतु तूने मुझे उत्पन्न किया है। मैं इस क्षण अपनी शक्तिहीनता और तेरी शक्तिमानता, अपनी दरिद्रता तथा तेरी सम्पन्नता का साक्षी हूँ।
तेरे अतिरिक्त अन्य कोई ईश्वर नहीं, तू ही है संकट में सहायक, स्वःनिर्भर।
- Bahá'u'lláh