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वह रोगनिवारक, संतुष्टिदाता, सहायक, सर्वक्षमाशील सर्वकरुणामय है!
मैं आह्वान करता हूँ तेरा हे परम महान! हे निष्ठावान, हे गरिमावान, तू पर्याप्त, तू रोगनिवारक, तू चिरस्थायी, हे तू चिरस्थायी!
मैं आह्वान करता हूँ तेरा हे सम्राट, हे उन्नत्तिदाता, हे न्यायकर्ता! तू पर्याप्त, तू रोगनिवारक, तू चिरस्थायी, हे तू चिरस्थायी!
मैं आह्वान करता हूँ तेरा, हे अनुपम, हे अनन्त, हे एकमेव! तू पर्याप्त, तू रोगनिवारक, तू चिरस्थायी, हे तू चिरस्थायी!
मैं आह्वान करता हूँ तेरा, हे अति प्रशंसित, हे पावन, हे सहायक! तू पर्याप्त, तू रोगनिवारक, तू चिरस्थायी, हे तू चिरस्थायी!
मैं आह्वान करता हूँ तेरा हे सर्वज्ञ, हे महाप्रज्ञ, हे परम महान! तू पर्याप्त, तू रोगनिवारक, तू चिरस्थायी, हे तू चिरस्थायी!
मैं आह्वान करता हूँ तेरा हे दयावान, हे भव्य, हे आदेशकर्ता! तू पर्याप्त, तू रोगनिवारक, तू चिरस्थायी, हे तू चिरस्थायी!
मैं आह्वान करता हूँ तेरा हे प्रियतम्, हे चिरवांछित, हे परमानन्द! तू पर्याप्त, तू रोगनिवारक, तू चिरस्थायी, हे तू चिरस्थायी !
मैं आह्वान करता हूँ तेरा, हे परमशक्तिशाली, हे पालनहार, हे सामर्थ्यवान! तू पर्याप्त, तू रोगनिवारक, तू चिरस्थायी, हे तू चिरस्थायी!
मैं आह्वान करता हूँ तेरा हे शासक, हे स्वनिर्भर, हे सर्वज्ञ! तू पर्याप्त, तू रोगनिवारक, तू चिरस्थायी, हे तू चिरस्थायी!
मैं आह्वान करता हूँ तेरा हे चेतना, हे प्रकाश, हे परम प्रत्यक्ष! तू पर्याप्त, तू रोगनिवारक, तू चिरस्थायी, हे तू चिरस्थायी!
मैं आह्वान करता हूँ तेरा हे सर्वसुलभ, हे सर्वज्ञात, हे सर्वनिगूढ़! तू पर्याप्त, तू रोगनिवारक, तू चिरस्थायी, हे तू चिरस्थायी!
मैं आह्वान करता हूँ तेरा हे अगोचर, हे विजेता, हे वरदाता! तू पर्याप्त, तू रोगनिवारक, तू चिरस्थायी, हे तू चिरस्थायी!
मैं आह्वान करता हूँ तेरा, हे सर्वशक्तिमंत हे सहायक, हे आवरणदाता! तू पर्याप्त, तू रोगनिवारक, तू चिरस्थायी, हे तू चिरस्थायी!
मैं आह्वान करता हूँ तेरा हे स्वरूपदाता, हे पालनहार, हे संहारकर्ता! तू पर्याप्त, तू रोगनिवारक, तू चिरस्थायी, हे तू चिरस्थायी!
मैं आह्वान करता हूँ तेरा, हे उदीयमान, हे एकत्रकर्ता, हे उन्नायक! तू पर्याप्त, तू रोगनिवारक, तू चिरस्थायी, हे तू चिरस्थायी!
मैं आह्वान करता हूँ तेरा हे पूर्णकर्ता, हे अप्रतिबंधित, हे उदार! तू पर्याप्त, तू रोगनिवारक, तू चिरस्थायी, हे तू चिरस्थायी!
मैं आह्वान करता हूँ तेरा हे परोपकारी, हे बंधनकारी, हे सृष्टिकर्ता! तू पर्याप्त, तू रोगनिवारक, तू चिरस्थायी, हे तू चिरस्थायी!
मैं आह्वान करता हूँ तेरा हे उदात्त, हे सौन्दर्यवान, हे परम उदार! तू पर्याप्त, तू रोगनिवारक, तू चिरस्थायी, हे तू चिरस्थायी!
मैं आह्वान करता हूँ तेरा हे न्यायकर्ता, हे दयावान, हे उदार! तू पर्याप्त, तू रोगनिवारक, तू चिरस्थायी, हे तू चिरस्थायी!
मैं आह्वान करता हूँ तेरा हे सर्वसम्मोहक, हे चिरशाश्वत, हे परम ज्ञाता! तू पर्याप्त, तू रोगनिवारक, तू चिरस्थायी, हे तू चिरस्थायी!
मैं आह्वान करता हूँ तेरा हे महा भव्य, हे युगातीत, हे परम उदार! तू पर्याप्त, तू रोगनिवारक, तू चिरस्थायी, हे तू चिरस्थायी!
मैं आह्वान करता हूँ तेरा हे सुसंरक्षित, हे आनन्द के स्वामी, हे वांछित! तू पर्याप्त, तू रोगनिवारक, तू चिरस्थायी, हे तू चिरस्थायी!
मैं आह्वान करता हूँ तेरा हे सर्वदयालु, हे सभी के प्रति संवदेनशील, हे सर्वकल्याणकारी! तू पर्याप्त, तू रोगनिवारक, तू चिरस्थायी, हे तू चिरस्थायी!
मैं आह्वान करता हूँ तेरा हे सबके आश्रयदाता, हे सबकी शरणस्थली! हे सबके सुरक्षादाता, तू पर्याप्त, तू रोगनिवारक, तू चिरस्थायी, हे तू चिरस्थायी!
मैं आह्वान करता हूँ तेरा हे सबके सहायक, हे सबके द्वारा प्रार्थीत, हे सचेतक! तू पर्याप्त, तू रोगनिवारक, तू चिरस्थायी, हे तू चिरस्थायी!
मैं आह्वान करता हूँ तेरा हे प्रकटकर्ता, हे विनाशकर्ता, हे सर्व-दयावान! तू पर्याप्त, तू रोगनिवारक, तू चिरस्थायी, हे तू चिरस्थायी!
मैं आह्वान करता हूँ तेरा, हे तू मेरी आत्मा, हे तू मेरे प्रियतम, हे तू मेरी आस्था! तू पर्याप्त, तू रोगनिवारक, तू चिरस्थायी, हे तू चिरस्थायी!
मैं आह्वान करता हूँ तेरा हे प्यासहर्ता, हे ज्ञानातीत स्वामी, हे परम अनमोल! तू पर्याप्त, तू रोगनिवारक, तू चिरस्थायी, हे तू चिरस्थायी!
मैं आह्वान करता हूँ तेरा हे महानतम् स्मरण, हे सर्वोत्तम नाम, हे प्राचीनतम् मार्ग! तू पर्याप्त, तू रोगनिवारक, तू चिरस्थायी, हे तू चिरस्थायी!
मैं आह्वान करता हूँ तेरा हे सर्वाधिक प्रशंसित, हे परम पावन, हे परम पुनीत! तू पर्याप्त, तू रोगनिवारक, तू चिरस्थायी, हे तू चिरस्थायी!
मैं आह्वान करता हूँ तेरा हे बंधन मुक्त करने वाले, हे परामर्शदाता, हे मुक्तिदाता! तू पर्याप्त, तू रोगनिवारक, तू चिरस्थायी, हे तू चिरस्थायी!
मैं आह्वान करता हूँ तेरा हे मित्र, हे चिकित्सक, हे सम्मोहक! तू पर्याप्त, तू रोगनिवारक, तू चिरस्थायी, हे तू चिरस्थायी!
मैं आह्वान करता हूँ तेरा हे महिमा, हे सौन्दर्य, हे उदार! तू पर्याप्त, तू रोगनिवारक, तू चिरस्थायी, हे तू चिरस्थायी!
मैं आह्वान करता हूँ तेरा हे सर्वाधिक विश्वसनीय, हे सर्वोत्तम प्रेमी, हे प्रभात के स्वामी! तू पर्याप्त, तू रोगनिवारक, तू चिरस्थायी, हे तू चिरस्थायी!
मैं आह्वान करता हूँ तेरा हे ज्योतिदाता, हे दीप्तिदाता, हे हर्ष के संवाहक! तू पर्याप्त, तू रोगनिवारक, तू चिरस्थायी, हे तू चिरस्थायी!
मैं आह्वान करता हूँ तेरा हे उदारता के स्वामी, हे परम करुणामय, हे परम दयालु! तू पर्याप्त, तू रोगनिवारक, तू चिरस्थायी, हे तू चिरस्थायी!
मैं आह्वान करता हूँ तेरा हे अटल, हे जीवन प्रदाता, हे अस्तित्व के मूल! तू पर्याप्त, तू रोगनिवारक, तू चिरस्थायी, हे तू चिरस्थायी!
मैं आह्वान करता हूँ तेरा हे सर्वभेदी, हे सर्व द्रष्टा ईश्वर, हे वाणी के स्वामी! तू पर्याप्त, तू रोगनिवारक, तू चिरस्थायी, हे तू चिरस्थायी!
मैं आह्वान करता हूँ तेरा हे प्रत्यक्ष, फिर भी अप्रत्यक्ष, हे अदृश्य, फिर भी कीर्तिमान, हे दर्शक जिसकी खोज सभी करते हैं! तू पर्याप्त, तू रोगनिवारक, तू चिरस्थायी, हे तू चिरस्थायी!
मैं आह्वान करता हूँ तेरा हे प्रेमियों के प्राणहर्ता, हे दुष्टों पर कृपालु ईश्वर! हे संतुष्टिदाता।
मैं आह्वान करता हूँ तेरा, हे संतुष्टिदाता, हे रोगनिवारक, तू चिरन्तन, हे तू चिरन्तन!
हे चिरस्थायी, मैं तेरा आह्वान करता हूँ, हे चिरस्थायी! तू सदाचिरस्थायी, हे तू चिस्थायी!
पावन है तू हे मेरे ईश्वर! मैं याचना करता हूँ तुझसे तेरी उदारता के नाम से जिससे कृपा और करुणा के द्वार खोले गये, जिससे शाश्वत सिंहासन पर तेरी पावनता का मंदिर स्थापित हुआ है। मैं तुझसे उस करुणा के नाम से याचना करता हूँ, जिससे तूने अपनी उदारताओं और भेटों के सहभोज में समस्त सृष्टि को आमंत्रित किया था! मैं तुझसे उस अनुग्रह के नाम से याचना करता हूँ, जिस अनुग्रह के कारण तूने उत्तर दिया था ”ऐसा ही हो।“ तूने यह उत्तर दिया, अपने ही ”आत्मस्वरूप“ में धरती और आकाश के समस्त निवासियों की ओर से, तब, जब उषाकाल में तेरी भव्यता और शक्ति प्रकट हुई और तेरे साम्राज्य की सत्ता प्रत्यक्ष की गई। तेरे इन परम सौन्दर्यवान नामों से मैं तुझसे पुनः याचना करता हूँ, तेरे इन उदात्त गुणों के नाम से, तेरे परम उदात्त स्मरण और तेरे निर्मल सौंदर्य के नाम से, तेरे निगूढ़ शिविर के नाम से, निगूढ़ आलोक और तेरे उस ’नाम‘ के नाम से जो, हर सुबह, हर शाम कष्टों के परिधान से लिपटा रहा, कि इस आशीर्वादित पाती के संवाहक की तू रक्षा कर और उसकी भी रक्षा कर जो इसका पाठ करे, जो इसे प्राप्त करे और जो उस घर से गुजरे जहाँ यह पाती रखी गई हो। इसके माध्यम से तू प्रत्येक रोगी को आरोग्य प्रदान कर, रूग्ण-विपन्न का हर संकट, हर व्यथा से बचा, प्रत्येक अनचाही पीड़ा, दुःख से त्राण दे, उनका मार्गदर्शन कर, जो तेरा मार्गदर्शन चाहते हैं, चाहते हैं पथ तेरी क्षमा का।
तू सत्य ही शक्तिशाली, सर्व-परिपूरक, रोगनिवारक, संरक्षक, प्रदाता, सर्वदयालु, सर्वउदार, सर्वकृपालु है।
- Bahá'u'lláh