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स्तुति हो तेरी, हे स्वामी मेरे ईश्वर! मै तुझसे इस प्रकटीकरण के माध्यम से याचना करता हूँ जिससे अंधकार प्रकाश में परिवर्तित हो गया है, जिसके माध्यम से बार-बार उपासना स्थल का निर्माण हुआ है और लिखित पाती प्रकट की गई है, और वह विस्तारित नामावली अनावृत हुई है, मैं तुझसे याचना करता हूँ कि मुझे और उन्हें, जो मेरे संगी हैं, वह प्रदान कर जो हमें तेरी सर्वातीत महिमा के आकाश में ऊँचे विचरण करने में समर्थ बनाये और हमें ऐसे सन्देहों के कलुष से मुक्त कर दे जिन्होंने शंकाशील लोगों को तेरी एकता की छत्रछाया में आने से रोका है।
मैं वह हूँ, हे मेरे ईश्वर, जिसने तेरी स्नेहमयी उदारता की डोर को दृढ़ता से थाम लिया है और तेरी दया और तेरी अनुकम्पा के आंचल से बंधा हुआ है। तू मेरे लिये और मेरे प्रियजनों के लिये इहलोक और परलोक के शुभ-मंगल का विधान कर और तब उन्हें वह गुप्त उपहार प्रदान कर जिसका विधान तूने अपने सबसे चुने हुए जनों के लिये किया है।
ये वे दिन हैं, हे मेरे ईश्वर, जिसमें तूने अपने सेवकों को उपवास धारण करने का आदेश दिया है। वह धन्य हैं जो मात्र तेरे लिये और तेरे अतिरिक्त अन्य समस्त वस्तुओं से पूर्णतया अनासक्त होकर, उपवास धारण करता है। हे मेरे ईश्वर! मेरी सहायता कर और उन्हें भी सहायता दे, कि हम सब तेरी आज्ञा का पालन करें और तेरी शिक्षाओं पर चलें। सत्य ही तू अपनी इच्छानुसार सब कुछ करने में समर्थ है।
तेरे अतिरिक्त अन्य कोई ईश्वर नहीं। तू सर्वज्ञाता, सर्वप्रज्ञ है। स्तुति हो ईश्वर की, अखिल लोकों के ईश्वर की।
- Bahá'u'lláh