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विश्व न्याय मंदिर

रिज़वान 2017

विश्व के बहाईयों के लिए

परम प्रिय मित्रों,

िेखो ’महानिम नाम’ का समुिाय दकस िरह खड़ा होिा है! नई ’योजना’ के आरंभ हुए एक िर्ष बीिने के साथ ही ररपोटों से प्रमाविि होने लगा ह ैदक दकिने बड़ ेपैमाने पर क्या प्रयास दकए जा रह ेहैं और क्या उपलवधियां आरंभ हो चुकी ह।ैं 5,000 विकास कायषक्रमों में और अविक गहनिा लाने का काय ष अभूिपूिष स्िर पर प्रयास करने की मांग करिा है। ’योजना’ के मूलभूि ित्िों पर अपनी सुिढ़ृ पकड़ के साथ बड़ी संख्या में वमत्रगि इसकी आिश्यकिाओं को लेकर सदक्रय हो रह ेह ैंऔर अपने प्रत्युत्तर की गुिित्ता में िढ़ृिा और त्याग की भािना झलका रह ेह।ैं जैसी दक कल्पना की गई थी, लम्बे समय से वनरंिर चलाए जा रह ेकुछ गहन विकास कायक्रषम ज्ञान और संसािनों के भंडार बनिे जा रह ेहैं, िे आस-पास के क्षेत्रों को सहायिा ि ेरह ेहैं और अनुभि एिं अंििवषृि के िेजी स ेसवंििरि को सहज बना रह ेह।ैं गहन गविविवि के केन्द्र – यानी िे पड़ोस एिं गांि जहां समुिाय-वनमाषि का कायष सिाषविक सकंेवन्द्रि ह ै– सामूवहक रूपांिरि की उिषर भूवम सावबि हो रह ेह।ैं सहायक मंडल सिस्यों की एक विस्िृि और ऊजषवस्िि सेना और उनके सहायकगि िमाषनुयावययों के प्रयासों को उत्प्रेररि करन ेमें जुटे हुए हैं, उन्ह ेंयह पररकल् पना प्राप्त करन ेम ें मिि ि ेरह ेह ैंदक विविि पररवस्थवियों में और प्रत्येक समुिाय-समूह (क्लस्टर) की अपनी वस्थवियों के अनुरूप विकास-प्रदक्रया को कैसे आगे बढ़ाया जाए। अपनी-अपनी राष्ट्रीय आध्यावत्मक सभाओं की सहायिा से, क्षेत्रीय बहाई पररर्ि ेंयह सीख रही ह ैंदक एक ही समय में, व्यापक समुिाय-समूहों के अंिगषि, ’योजना’ के आिेग दकस िरह वनर्ममि दकये जायें। िसूरी ओर, कुछ छोटे िशेों में जहां पररर्ि ेंनहीं हैं, इसी कायष की शुरुआि राष्ट्रीय स्िर पर स्थावपि नई संस्थाओं द्वारा की जा रही ह।ै हालांदक, जैसा दक दकसी भी जैविक प्रदक्रया से अपेक्षा की जा सकिी है, कुछ जगहों में िजेी से विकास हो रहा ह ैजबदक कुछ अन्य जगहों में अभी ऐसा होना बाकी है, परन्िु पूरी िवुनया में गहन विकास कायषक्रमों की कुल संख्या अब बढ़न ेलगी ह।ै ििपुरांि, हमें यह िखेकर खशुी हो रही ह ैदक ’योजना’ की गविविवियों की भागीिारी में इसके प्रथम चार चक्रों के िौरान उल्लेखनीय िृवि हुई।

अिः, आन ेिाले िर्ष म ेंक्या होन ेजा रहा ह ैउसके वलए इससे अविक आशाजनक सकंेि भला और क्या हो सकिे ह।ैं और यह दक ‘उनके’ वप्रयजनों ने ‘उनके’ िमष के िायरे के विस्िार के वलए पूरी सत् यिापूिषक प्रयास दकया है, हम ’आशीिाषदिि सौन्ियष’ के वद्वशिाधि ी जन्मोत्सि पर उन्ह ेंइससे अविक उपयुक्त क्या समर्मपि कर सकिे हैं? इस िरह बहाई विश्ि द्वारा मनाए जाने िाले िो वद्वशििार्मर्क समारोहों में से प्रथम अत्यंि ही रोमांचक पररिश्ृय िाला अिसर ह।ै यदि सही ढंग से िखेा जाए िो, हृियों को बहाउल्लाह स े जोड़ने की िवृि से यह िर्ष अकेले ही अब िक का सबस ेबड़ा विश्ि व्यापी अिसर प्रस्िुि करिा ह।ै आगामी महीनों में, सबको इस बहुमल्ूय अिसर का ध्यान रखना चावहए और िसूरों को बहाउल्लाह के जीिन और उनके महान उद्दश्ेय स ेपररवचि कराने के वलए हर जगह विद्यमान संभािनाओं के प्रवि सचिे रहना चावहए। अब बहाई विश् ि के समक्ष वशक्षि का जो अिसर मौजूि ह ैऔर वजसका पूिष रूप से उपयोग दकया जाना चावहए, उसके वलए हर िरह के व्यवक्त के साथ आरंभ दकए जा सकने िाले िािाषलापों के बारे म ें रचनात्मक रूप से विचार दकया जाना चावहए। ऐस ेसाथकष संिािों के क्रम में समझ का विकास होिा ह ैऔर हृिय खुलिे ह ैं– कभी-कभी िुरन्ि। इस सुयोग्य कायष में हर दकसी की भूवमका है, और इस कायष में लगने स े प्राप्त होने िाला जो आनन्ि ह ैउससे दकसी को भी स्िय ंको िंवचि नहीं करना चावहए। हम उस एकमेि ’वप्रयिम’ से याचना करिे ह ैंदक यह सम्पूिष वद्वशििार्मर्की िर्ष इस पवित्रिम और मिुरिम आनन्ि स ेभर जाए: ’ईश् िर के दििस’ के अरुिोिय के बारे में अन्य व्यवक्त से कहन ेका आनन्ि!

वनष्ा ािानों के समुिाय द्वारा वनभाए जान ेिाले अवनिाय षिावयत्ि विश् ि में व याप्ि भ्ावंि, अविश् िास और अनिश्चितता के िािािरि में अब और अत्यािश्यक हो गए ह।ैं िास्िि में, वमत्रों को चावहए दक िे एक ऐसा प्रिीप जलाने के वलए हर अिसर का प्रयोग करें जो मागष को प्रकावशि कर सके और वजससे वचन्िािुर लोगों को आश्ि ासन, वनराशजनों को आशा प्राप्ि हो सके। हमें िमष-संरक्षक द्वारा एक बहाई समुिाय को दिए गए परामशष का स्मरि हो आिा है, िह भी ऐसे शधिों में जो मानों हमारे ही समय के वलए अभीष्ट हो: “अवनष्ट घटनाओं और आपिाओं के िनाि और िबाि के भार से आज जबदक ििमषान युग के समाज का िाना-बाना चरमरा रहा है, आज जबदक एक राष्ट्र को िसूरे राष्ट्र से, एक िगष को िसूरे िगष से, एक प्रजावि को िसूरी प्रजावि से, एक सम् प्रिाय को िसूरे सम् प्रिाय से पृथक करने िाली िरारों को उभारने िाली फूट बढ़िी जा रही है, िो ’योजना’ को दक्रयावन्िि करने िालों को चावहए दक िे अपने आध्यावत्मक जीिन और प्रशासवनक कायषकलापों में इससे भी बढ़कर एकमयिा झलकाए ंऔर अपने सामूवहक उद्यम में गहन प्रयास, आपसी सहयोग एिं सामंजस्य पूिष विकास का और अविक उच् च स्िर प्रिर्मशि करें।“ प्रभुिमष के कायष के आध्यावत्मक महत्ि और िमाषनुयावययों को वजस एकाग्र इराि ेके साथ अपने पािन िावयत्िों को वनभाना चावहए उस पर सिा बल ििेे हुए शोगी एफेन्िी ने यह भी आगाह दकया दक हम राजनीविक वििािों, उलझनों और िकरारों में कोई वहस्सेिारी न करें। एक अन्य अिसर पर उन्होंने आग्रह दकया दक “िे हर िरह के संघिाि और पक्षपाि, वनरथषक वििािों, िच्ुछ संगिनाओं, मुखड़ ेको उत्तेवजि और इस पररििनषशील संसार के ध्यानाकर्मर्ि करन ेिाले क्षविक भािािेशों के िायरों स ेऊपर उाें।‘’ ये सब उन अपररहायष झागों और फुहारों की िरह ह ैंवजन्ह ेंइस अशान्ि और विभक्त समाज को अपने थपेड़ों से वहला रही िरंगें एक के बाि एक बना रही ह।ैं इस िरह के भटकािों में व यस्ि रहने से हमारा बहुि कुछ िांि पर लग जािा ह।ै जैसा दक बहाउल्लाह का हर अनुयायी अच्छी िरह जानिा है, मानिजावि का अवन्िम कल्याि उसके विभेिों को पाटने और उसकी एकिा को िढ़ृिापूिषक स्थावपि करन ेपर वनभषर ह।ै अपने समाज के जीिन में बहाई जो भी योगिान ििे ेह ैंउसका लक्ष्य ह ैएकिा को बढ़ािा िनेा; समुिाय-वनमाषि सम्बंिी उनका हर प्रयास इसी उद्दश्ेय के वलए ह।ै कलह से थक चुके लोगों के वलए, ’महानिम नाम’ की छाया िले पनप रह ेसमुिाय इस बाि का एक जोरिार उिाहरि प्रस्िुि करिे ह ैंदक एकिा से क्या प्राप्ि हो सकिा है।

‘उसके’ इिने सारे वप्रयजनों को वनहारिे हुए, यह िखेिे हुए दक कैसे िे विविि िरीकों से अपना सिषस्ि वनछािर कर रहे ह ैंिादक मानिजावि की एकिा की ध्िजा उन्नि हो सके, हम ’प्रभुओं के प्रभु’ का गुिगान करिे ह।ैं ह ेअत्यंि वप्रय वमत्रों: अब जबदक एक अत्यंि शुभ िर्ष आरंभ हो रहा है, क्या हममें स े प्रत्येक को यह विचार नहीं करना चावहए दक िे कौन-से स्िर्मगक कायष ह ैंवजन्ह ेंकरन ेमें ‘उसकी’ कृपा हम ें सहायिा िगेी?

 

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