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विश्व न्याय मंदिर

रिज़वान 2018

विश्व के बहाईयों के लिए

परम प्रिय मित्रों,

’आशीवािदत सौ दय’ के ज मो सव की ि शता दी को रेखांिकत करने वाले काय म की िचर थायी भा के वातावरण म हम आपका अिभनंदन करत े ह। त प ात जो कुछ भी ितफिलत आ है उसपर िवचार करने से हम यह दखे ते ह िक आज िव भर का बहाई समुदाय वैसा नह ह ै जैसा िक वह वतमान ’योजना’ के थम छः च के समारंभ के समय था। अपने येय के ित वह पहले स े अिधक जाग क हो चकु ा ह।ै िम और पिरिचत को अपन े सामदु ाियक जीवन के ससं ग म लाने, अपने पास-पड़ोस के लोग और गांव को समिे कत यास म एकजुट हो जान े की ेरणा दने ,े यह अिभ करन े म िक आ याि मक स ाइय को िकस तरह थािय वपणू ावहािरक कायकलाप का प िदया जा सकता ह,ै और सबस े बढ़कर, न केवल उन िश ा के बारे म िजनस े एक नए िव का िनमाण हो सकेगा बि क ’िजसने’ व े िश ाएं द , अथात बहाउ लाह, के बारे म भी बातचीत करन े की िदशा म बहाई समदु ाय की मता म अभतू पूव िवकास का अनभु व आ ह।ै बहाउ लाह के जीवन और उनके ारा सह े गए क के बारे म िविभ वय क , युवा और ब के मुख से कह े गए वृता त ने अनिगनत दय को अिभभूत करके रख िदया। उनम से कुछ लोग ने उनके धम के बारे म और अिधक जानन े की त परता िदखाई। अ य लोग न े सहयोग के वचन िदए। और भी अनेक हणशील लोग अपनी आ था कट करन े के िलए ेिरत ए।

गित का एक भावी सकं ेतक यह था िक असं य जगह पर यह प हो गया िक भधु म रा ीय तर पर अपनी गुमनामी के अधं कार से बाहर आ चकु ा ह।ै शासन-सू का सचं ालन करने वाले अनके नेता और बु लोग ने सावजिनक प स े कहा – और कई बार िनजी तौर पर इस बात को रेखािं कत िकया – िक आज की दिु नया को बहाउ लाह के िवचार-दशन की ज रत ह ै और यह िक बहाइय ारा िकए जा रह े यास शंसनीय ह और उनका िव तार िकया जाना चािहए। हम यह दखे कर खुशी ई िक बहाउ लाह के ित स मान कट करन े और उनके ज म का समारोह मनाने की उ कंठा केवल बहाइय म नह थी – बहाई समदु ाय से बाहर के कुछ लोग ारा भी िवशषे सि मलन का ायोजन िकया गया। ऐसी जगह म जहां अभी भी भुधम के ित श ुता का वातावरण ह,ै वहा ं भी िम गण िनडर बन े रह,े उ ह न े अ भुत लोचपूणता का पिरचय िदया, उ ह न े अपने दशे वािसय को वयं ही स य को परखने के िलए ो सािहत िकया, और अनेक लोग समारोह म सहष शािमल ए। ि शता दी समारोह न े कट प से कला मक अिभ ि य की असीम अिभ ंजना को भी बढ़ावा िदया जो िक उस अिभ ि को ज म दने े वाले मे के ोत का एक भ माण था। इस अवसर पर बहाई समदु ाय ारा सम प स े अपनाए गए दिृ कोण की कृित इस बात को पु करती थी िक िव ापी ’योजना ’ की वतमान ृंखला के आरंभ होने के समय स े दो दशक स े भी अिधक समय म िकतना कुछ सीखा-समझा गया ह।ै ि गत धमानुयाियय न े पहल की, समुदाय सामिू हक यास की भावना के साथ उठ खड़ा आ, और िम न े सं था ारा तयै ार की गई योजना म सु वि थत प स े

अपनी रचना मक ऊजा लगाई। दो शताि दय की समाि को रेखािं कत करन े वाल े वािषको सव ने आन े वाली सदी के िलए समुदाय के िनमाण के काय के िलए बल उ रे ण दान िकया। दसू री ि शता दी की ओर अ सर इस अविध म, थम ि शता दी के दौरान इतन े मे स े बोए गए इन बीज को धैयपूवक पोिषत िकए जान े की ज रत ह ै तािक व े फलीभतू हो सक।

वतमान ’योजना’ के इन दो वष म, हालांिक वाभािवक प से यके दशे म समान प स े गित नह ई ह ै लिे कन गहन िवकास काय म की सं या वतमान िव ापी यास म अिभकि पत पांच हजार की सं या से आध े पर प चं रही ह,ै और यह सं या िजस दर स े बढ़ रही ह ै उसम सतत वृि होती िदख रही ह।ै और भी अिधक गहनता स े दखे ने पर, इस बात के भी आशाजनक सकं ेत दिृ गोचर रह े ह िक ि य , समदु ाय और सं था की शि यां और मताए ं िकस तरह कट हो रही ह। सभी जगह के धमानुयाियय के िलए, ि शता दी समारोह के अनुभव न े यह झलकाया ह ै िक अपने इद-िगद के लोग के साथ रोजमरा के उनके अनके काय- वहार िश ण की चते ना से अनु ािणत हो सकते ह। और हजार गांव और पास-पड़ोस म जसै-े जैसे काय म गितशीलता आती जा रही ह,ै वसै -े वैसे उनम से यके म जीव त सामुदाियक जीवन की जड़ गहराती जा रही ह। ऐसे समुदाय-समूह ( ल टर ) की सं या म अ छी-खासी विृ ई ह ै जहां कायकलाप के इस ढांच े का यादा स े यादा थान म िव तार करन े की णाली अ छी तरह सं थािपत की जाने लगी ह–ै और उसके मा यम से िम को िवकास के एक दायरे म मील के तीसरे प थर को पार करन े की मता हािसल ई ह।ै और बहाई िव के इ ह िश ण -- खास तौर पर बहाउ लाह के िवचार-दशन की ओर लोग के अ सर होन े के बारे म िश ण -- के मोच पर, न केवल लोग बड़ी सं या म बहाई कायकलाप के सतत ापक होत े दायरे म शािमल हो रह े ह बि क िम गण अब यह भी सीख रह े ह िक िकस तरह बड़ े समूह ’महानतम नाम’ के समुदाय के साथ अपनी पहचान बनाते ह। हम दखे ते ह िक ऐसी जगह पर भधु म के शै िणक कायकलाप और अिधक औपचािरक प हण करन े लगते ह यिक साल-दर-साल ब े िनबाध प से एक ेड से दसू रे ेड म आगे बढ़त े रहते ह और िकशोर के आ यािमक सश ीकरण का काय म का एक तर स े दसू रे तर पर प चं जाता ह।ै इन थान म, िश ण सं थान यह सुिनि त करना सीख रहा ह ै िक िनरंतर बढ़ती ई सं या म ब एव ं िकशोर के आ याि मक एव ं निै तक चिर -िनमाण के िलए पया मानव संसाधन तैयार िकए जा सक। लोग की सं कृित म इन मलू कायकलाप म भागीदारी इस तरह समािहत होती जा रही ह ै िक उसे समुदाय के जीवन का एक अिभ पहलू समझा जाने लगा ह।ै अपने िवकास का िज मा वयं उठाने की भावना से स प लोग म एक नई जीव तता का ज म हो रहा ह ै और समाज की िनि यता उ प करने वाली शि यां उनपर बेअसर हो रही ह। भौितक और आ याि मक गित की संभावना अब पाकार लेन ेलगी ह।ै सामािजक यथाथ म बदलाव आन े लगा ह।ै

ि य िम ो, यह सचमुच ’परम ि यतम’ के ित आभार कट करने की बले ा ह।ै ो सािहत होने के अनके कारण ह। लेिकन हमारे सामन े जो अपार दािय व पड़ े ह हम उनस े भली-भांित अवगत ह। आधारभूत प से, जैसािक हमन े पहले भी सकं ेत िदया ह,ै ज री ह ै िक सकै ड़ समुदाय-समूह म ऐसे धमानुयाियय की टोिलयां तैयार होनी चािहए जो, अपने इद-िगद के िम के साथ िमलकर, िवकास को पोषण दान करने और मता-िनमाण के काय पर िनरंतर यान केि त कर सक, और जो अपनी मता एवं अनुशासन ारा कायकलाप की समी ा करने और अपने अनुभव स े सीखने की िविश ता रखते ह । यके थान म – केवल समुदाय-समूह ( ल टर) तर पर ही नह बि क पास-पड़ोस और गांव म भी – ि य का एक सतत ापक होता आ ’नािभकीय िबद’ु तैयार करना और उनका साथ िनभाना अपन े आप म एक बड़ी चुनौती का काय भी ह ै और मह वपणू प स े आव यक भी। लिे कन जहां कह भी ऐसा हो रहा ह ै वहां के पिरणाम बड़ े िवल ण ह।

हम यह दखे कर आ त ह िक भुधम की सं थाएं इस परम आव यकता पर मुखता से िवचार करती ह और गित से ा अतं दिृ य को ापक प से लागू करन े यो य बनाने के िलए व े भावी तौर-तरीके तैयार करने म िनरत ह। इसके साथ ही, रा ीय, ादिे शक एवं थानीय सं थाएं अपने वृह र अनुभव से स प होकर ापक दिृ कोण अपना रही ह। वे समुदाय के िवकास के सभी पहलु म सलं हो रही ह और समुदाय के औपचािरक सद य स े भी परे वे सभी लोग के क याण से वा ता रखती ह। लोग के िवकास की िदशा म सं थान- ि या के गहन अिभ ाय के ित सजग, व े इस बात पर खास यान दते ी ह िक िश ण सं थान को कैस े मजबूत बनाया जाए। ’योजना’ की आव यक बात पर समुदाय का यान केि त िकए रखन े की ज रत को वे सतत प से समझती ह और िनरंतर ापक होत े ए िम के दायरे को एकता के उ स े उ तर तर का पश करन े का आ वान करती ह। अपनी शासिनक एव ं िव ीय णािलय को बेहतर से बेहतर बनाने की िज मेदारी का वे िन ापूवक यान रखती ह तािक िव तार और सुगठन के काय म समुिचत सहायता दी जा सके। इन तमाम काय म, अंततः उनका यान समुदाय के अंतगत बल आ याि मक शि य को कट करने वाली अनकु ूल ि थितय के सृजन पर केि त रहता ह।ै

समुदाय-िनमाण के काय म गहनता आने के साथ-साथ, िम गण अपने आस-पास के समाज की दशा को बेहतर बनान े के िलए अपनी नव-िवकिसत मता का उपयोग करन े लगे ह, और इस काय म उनका उ साह िद िश ा के अ ययन स े अनु िे रत होता ह।ै अ पकािलक ोजे ट की सं या काफी बढ़ी ह,ै औपचािरक काय म के दायरे म िव तार आ ह ै और िश ा, वा य, कृिष तथा अ य े म अब और भी अिधक बहाई- ेिरत िवकास सं थाए ं सामने आ रही ह। इन सबके पिरणाम व प लोग के ि गत और सामुदाियक जीवन म जो पांतरण िदखाई पड़ने लगा ह ै उसे बहाउ लाह के धम की समाज-िनमाणकारी शि के अचकू उ ले न के प म समझा जा सकता ह।ै इसिलए, इसम कोई आ य की बात नह िक सामािजक काय के ऐसे ही उदाहरण से – चाह े वे सरल ह या जिटल, थायी या दीघकािलक – समाज के बारे म मौजदू ा पिरसंवाद म भाग लेने के अपने यास म बहाई अंतरा ीय समुदाय के कायालय िनरंतर रे णा हण करते आ रह े ह। भुधम के िलए कायकलाप का यह एक अ य े ह ै

िजसका अ छा िवकास आ ह।ै रा ीय तर पर, समाज के िलए साथक पिरसंवाद – जसै े अ य िवषय के साथ ही

ी-पु ष की समानता, वासन और एकीकरण, सामािजक पातं रण म युवा की भिू मका, और धािमक सहअि त व -- म पहले स े अिधक आ मिव ास, स मता और अंतदिृ के साथ योगदान िदया जा रहा ह।ै और सभी आयुवग और पृ भिू मय के धमानुयायी जहां कह भी रहते, काम करत,े या अ ययन करते ह, वे बहाउ लाह के िवराट कटीकरण से पाियत एक आदश पिर े य की ओर अपन े आस-पास के लोग का यान आकिषत करते ए, खास पिरसंवाद म अपना अमू य योगदान द े रह े ह।

िजन िविवध अवसर पर य े पिरसंवाद तुत िकए गए ह उनम भुधम के दिृ कोण को समृ करन े म व ड वाइड वेब पर इसकी मौजूदगी से काफी भाव पड़ा ह ै जो िक अनके रा ीय वेबसाइट आरंभ िकए जाने और बहाई.ऑग से जुड़ी अ य अनके साइट के कारण और भी िव तृत हो गई ह।ै भधु म के सार और उसकी संर ा इन दोन ही दिृ य स े इसका अ यिधक मह व ह।ै बहाई ि शता दी वेबसाइट पर तुत एवं एक ही समय नौ भाषा म अपडटे की गई बहाई धम स बंधी सु वि थत िवषय-साम ी ने,कुछ ही िदन के अंतराल म, परू ी दिु नया से िवशाल सं या म लोग को आकिषत िकया। अब इस वेबसाइट को अलग-अलग दशे के पेज स े पिर कृत कर िदया गया ह ै और िविवध कार के समारोह के सिच िववरण तुत िकए गए ह। अब बहाई रेफरस लाय ेरी साइट म एक िविश ता तुत करन े की योजना का काफी िवकास हो चकु ा ह ै िजसस े ’पिव लेख ’ के ऐस े अंश या ’पाितय ’ को ऑनलाइन प से जारी करने की सिु वधा ा होगी िजनका पहल े कभी अनुवाद या काशन नह आ ह।ै इसके साथ ही, आगामी वष म बहाउ लाह और अ दलु -बहा के लेख के अं ेजी म अनूिदत नए खंड के काशन की तैयारी हो रही ह।ै

सिटएगो (िचली) और बैटमबग (कंबोिडया) म हाल ही म िव को समिपत िकए गए बहाई उपासना मि दर अब आकषण के थायी क बनते जा रह े ह और वे अपन े समाज के लोग को भधु म के सम त तीक की ओर सकं ेितत करन े वाल े काश- तंभ बन गए ह। इन उपासना-गृह की सं या बढ़न े वाली ह।ै हम यह घोषणा करत े ए हष हो रहा ह ै िक नॉट डले कॉसा (कोलि बया) के मि दर का लोकापण समारोह जलु ाई म होन े वाला ह।ै उसके बाद, और भी उपासना मि दर का िनमाण अब ब त दरू नह ह।ै वैनुएतू म भवन-िनमाण की अनमु ित ली जा रही ह।ै भारत तथा कांगो गणरा य म, अ यतं ही जिटल और दु ह ि या से गुजरने के बाद, अंततः हम भिू म के अिध हण की ओर कदम बढ़ा चकु े ह। पापआु य ू गायना के थम रा ीय मशिरकुल-अज़कार की िडजाइन के अवलोकन स े उ प हष अभी समा भी नह हो पाया था िक के या के थानीय उपासना मि दर का िडजाइन भी सामने आ गया। साथ ही, हम पूरी उ मीद ह ै िक मशिरकुल-अज़कार की सं था के बारे म हमारे शोध िवभाग ारा हाल ही म जारी िकया गया व सामुदाियक जीवन म उपासना के मह व के बारे म िम की समझ को ेिरत करेगा, य िक सेवा के अपन े सभी काय म, खास तौर पर अपने िनयिमत भि परक सि मलन म, हर जगह के बहाई बंधु भिव य के उपासना मि दर की आ याि मक बुिनयाद कायम कर रह े ह।

एक-ितहाई शता दी के अिभयान के परू ा होने म िसफ तीन वष रह गए ह िजसकी शु आत 1996 म की गई थी और जो एक ही ल य पर केि त था: समूह ारा भुधम को वीकार िकए जान े (इं ी बाइ स) की ि या म मह वपणू गित। िरज़वान 2021 म बहाउ लाह के अनुयायी एक वष की एक ’योजना’ का समारंभ करगे, लेिकन शभु सकं ेत से भरा यह एक-वष य कायकलाप ’योजना ’ की एक नई लहर को ज म दगे ा िजससे भधु म की नौका बहाई यगु की तीसरी शता दी म प चं जाएगी। बारह महीन की इस मांगिलक अविध म अ दलु -बहा के िनधन की शता दी के िव ापी आयोजन के म म बहाई िव क म एक िवशषे सि मलन भी शािमल होगा िजसके िलए यके रा ीय आ याि मक सभा और हर े ीय बहाई पिरषद के ितिनिध आमिं त िकए जाएंगे। लिे कन यह उन काय म की ृंखला म पहला काय म होगा जो िक धमानुयाियय को आने वाल े दशक की मांग को परू ा करन े के िलए तैयार करगे। आगामी जनवरी म, ि य मा टर के ’इ छाप और वसीयतनामा’ के थम सावजिनक पाठ के सौ वष पूरे हो जाएंगे और उस अवसर पर सभी महा ीपीय सलाहकार मंडल और सार एव ं संर ा के िलए िनयु सभी सहायक मंडल सद य को एकि त करते ए पिव भूिम म एक अिधवेशन आयोिजत िकया जाएगा। इन दो ऐितहािसक स मेलन स े िनगत आ याि मक ऊजा को उसके बाद यके भभू ाग म रहन े वाल े भ ु के िम के पास ल े जाया जाएगा। इस उ े य की दिृ से, उसके बाद के महीन म, आगामी ’एक वष य योजना’ के बाद के अनके वष के अिभयान म पिरवतन के संवाहक के प म, परू ी दिु नया म अिधवेशन की एक पूरी ृंखला आयोिजत की जाएगी।

इस तरह, ि य मा टर की ’िद योजना’ के कटीकरण की िदशा म एक नया चरण तुत होने वाला ह।ै लेिकन उसस े भी अिधक उ साहव क एवं यादा ज री पिरदृ य अभी सीधे सामने खड़ा है। बाब के ज म की ि शता दी म मा डढ़े वष बाकी ह। यह वह अविध ह ै जब हम अपन े धम के शहीद-िशरोमिण एवं अ दतू की असाधारण शूरता को याद करगे िजनके अित मह वपूण धमनेतृ व-काल न े मानवजाित को इितहास के एक नए युग म ला खड़ा िकया। यिद हम अ याचार के भाव और अनके लोग म ान पाने की आ मा की िपपासा को शातं करन ेके िलए समाधान पाने की जो उ कंठा ह ै उस दिृ से दखे तो दो शता दी के अतं राल के बावजूद वह समाज िजसम बाब का आिवभाव आ था, आज के ससं ार स े ब त कुछ िमलता-जुलता ह। इस दो सौ वष य वािषको सव को समिु चत तरीके स ेकैसे मनाया जाए इसपर िवचार करत े ए हम यह मानत ेह िक इन समारोह का एक िवशेष ल ण होगा। तथािप, हम आशा करत े ह िक कायकलाप का फुटन अभी-अभी गुजरे वािषको सव स े कम समृ और कम समावेशकारी नह होगा। यह एक ऐसा अवसर ह ै िजसकी उ सकु तापूण ती ा िन संदहे हर समुदाय, हर घर-पिरवार, हर दय को रहगे ी।

आन े वाल े माह बाब के शूर-वीर अनुयाियय के जीवन के पु य- मरण का भी काल ह ग े – उन वीर ि य और पु ष को याद करन े की अविध िज ह न े अपनी िन ा को ऐस े अनपु म एवं यागपणू कृ य के मा यम स े कट िकया था जो सदा-सदा के िलए भुधम के इितहास को िवभूिषत िकए रहगे। िनडरता, पावनता और ई र के िसवा अ य सबस े अनासि के उनके गुण उन सभी लोग को भािवत करके रख दते े ह जो उनके कारनाम के बारे म सुनत े ह। और यह भी िकतना िव मयकारी है िक शेर जसै े जांबाज ऐसे अनिगनत लोग अ यंत युवाव था म ही इितहास म अपनी अिमट िनशानी छोड़कर चले गए। आने वाली अविध म, उनके आदश आ थावान के सम त समूह को साहस दान कर – न

िक केवल युवा को िजनका एक बार िफर आ वान िकया जाता ह ै िक वे उस आंदोलन के अ नायक बन िजसका उ े य िव के पांतरण से कम कुछ नह ह।ै

अतः यही ह ै हमारी खर, ददे ी यमान आशा। इस िरज़वान से लके र अगली ि शता दी के बीच के छः च म – और, व तुतः, वतमान ’योजना’ की शेष तीन वष की सम त अविध म – वही उ कट एव ं चरम ेम आपको भी महान काय की िदशा म ेिरत करे िजसस े िद काश के सार के िलए बाब के अनुयायी अनु ािणत ए थ।े पिव दहलीज पर हमारी ाथना ह ै िक आपको विगक सहायता ा हो।

 

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