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विश्व न्याय मंदिर

रिज़वान 2019

विश्व के बहाईयों के लिए

परम प्रिय मित्रों,

अब जबकि ’परम महान उत्सव’ निकट आ चुका है, हम आभार और आशा की भावनाओ ंसे अत्यतं आह्लादित हैं--आभार उन अद्भतु कार्यों के लिए जिन्हे ंपूरा कर पाने मंे बहाउल्लाह ने अपने अनुयायियांे का ेसक्षम बनाया है, आरै आशा उन बातांे के लिए जा ेनिकट भविष्य के गर्भ मं ेहैं।

बहाउल्लाह के जन्म के द्विशताब्दी समारोह के विश्वव्यापी आयाजेनो ंसे उत्पन्न गति तब से बढत़ी ही चली गई है। बहाई समुदाय के विकास मंे आई तेजी, उसकी बढ़ती हुई क्षमता, और अपने अधिक से अधिक सदस्यांे की ऊर्जाओ ंसे लाभ उठा सकने की उसकी याग्ेयता उसके हाल की वैश्विक उपलब्धियो ंसे स्पष्ट रूप से उभर कर सामने आई है। इन सबमंे, समुदाय-निर्माण सम्बंधी कार्यकलापो ंमंे जा ेप्रगति हुई है, वह खास तारै पर उल्लेखनीय है। वर्तमान पांच वर्षीय योजना बहाई विश्व द्वारा बीस वर्षांे तक किए गए उन प्रयासो ंका अनुसरण करती है जबकि कार्यकलापो ंका ेसुव्यवस्थित तरीके से बेहतर बनाने और उनकी संख्या मंे वृद्धि करने के प्रयत्न किए गए--किन्तु उल्लेखनीय यह है कि, याजेना के आरंभिक ढाई वर्षों में ही, केवल मलू कार्यकलापो ंकी संख्या मंे आध ेसे भी ज्यादा बढ़ोत्तरी हुई है। किसी भी खास समय मे,ं वैश्विक समुदाय ने एसेी गतिविधियांे मंे, आध्यात्मिक सच्चाइयांे की तलाश करने और उनका प्रत्युत्तर देने मंे उन्हे ंसहायता प्रदान करते हुए, दस लाख से भी अधिक लागेां ेका ेसंलग्न कर सकने की अपनी क्षमता का परिचय दिया है। उसी संक्षिप्त समयावधि मंे, प्रार्थना-सभाआंे की संख्या लगभग दागेुनी हो गई--जो कि आशा और उदार कृपा के ’मूल स्राते’ से मानवजाति की बढ़ती हुई दूरी के लिए एक अति आवश्यक प्रत्युत्तर था। यह जा ेप्रगति हुई है उसकी एक विशष्ेा संभावना है, क्यांेकि भक्तिपरक सम्मिलन समुदाय के जीवन मंे नई चतेना का संचार करते हैं। सभी आयुवर्ग के लोगांे के लिए शैक्षणिक प्रयासांे को पिरोते हुए, व ेउन प्रयासांे के इस उच्च उद्दश्ेय का ेबल प्रदान करते हैंः ऐस ेसमुदायांे का पाष्ेाण करना जिनकी खासियत है परमात्मा की उनकी उपासना आरै मानवजाति की सेवा। यह बात उन समुदाय-समूहांे से ज्यादा अन्य कहीं उतनी अधिक स्पष्ट नहीं है जहां बहाई गतिविधियांे मंे बड़ी संख्या मंे लागेो ंकी भागीदारी का ेजारी रखा गया है और जहां मित्रगण अपने समुदाय के विकास के तीसरे मील के पत्थर को पार कर चुके हैं। हम यह देखकर खुश हैं कि जहां विकास की प्रक्रिया इस हद तक आग ेबढ़ चुकी है एसेे समुदाय-समूहांे की संख्या ‘याजेना’ के आरंभ से लेकर अभी तक दागेुनी से भी ज्यादा हो गई है और अब उनकी संख्या लगभग पाचं सौ है।

रूपातंरण की जो प्रक्रिया अभी जारी है उसके पैमाने का ेमापने मंे यह संक्षिप्त सर्वेक्षण न्याय नहीं कर सकता। ‘याजेना’ के बचे हुए दा ेवर्षांे का परिदृश्य बड़ा ही उज्ज्वल है। उन समुदाय-समूहांे मंे जा,े हमारी आशा के अनुरूप, ज्ञान और संसाधनो ंके भंडार बन चुके हैं, सुदृढ़ विकास-कार्यक्रमो ंसे सीखे गए पाठो ंके व्यापक संवितरण के माध्यम से, इस पिछले वर्ष बहतु कुछ हासिल किया गया है। अंतर्राष्ट्रीय शिक्षण केद्रं, सलाहकारगण, और उनके अथक सहायक मडंल सदस्य यह सुनिश्चित करने के लिए अनवरत प्रयास करते रह ेहैं कि दुनिया के सभी हिस्सों मंे निवास करने वाले बंधु ज्ञान मंे हुई इस समृद्धि से लाभान्वित हो ंऔर जा ेअंतर्दृष्टियां प्राप्त हो रही हैं उन्हे ंव ेअपने यहाँ की वास्तविकताआंे मंे क्रियान्वित करे।ं हम यह देखकर आनन्दित हं ैकि बढ़ती हुई संख्या मंे समुदाय-समूहांे, और उनके अंतर्गत आने वाले गावंांे और पास-पड़ोसांे मंे, मित्रों का एक नाभिकीय-बिंदु उभर कर सामने आया है, जा ेअपने क्रिया और समीक्षा के माध्यम से किसी खास समय मंे अपने आस-पास विकास की प्रक्रिया की प्रगति के लिए आवश्यक तत्वो ंकी तलाश मंे जुटे हैं। व ेसंस्थान रूपी सक्षम उपकरण से संबल प्राप्त कर रह ेहैं जिसके माध्यम से समुदाय की आध्यात्मिक और भौतिक समृद्धि मंे यागेदान देने की क्षमता का विकास हो रहा है, और उनकी सक्रियता के कारण, उनके साथ भागीदारी निभाने वाले मित्रों की संख्या भी बढ़ रही है। स्वाभाविक बात है कि अलग-अलग स्थानो ंमे ंइन स्थितियांे मंे अन्तर है, और साथ ही विकास सम्बंधी विशष्ेाताआंे मंे भी फर्क है। लेकिन सुव्यवस्थित प्रयास के माध्यम से, हर र्काइे मौजूदा कार्य मे ंअपना अधिक से अधिक प्रभावी यागेदान दे सकता है। हर परिवेश मंे, अन्य लागेांे का ेएसेे सार्थक और उत्प्ररेक वार्तालापो ं मंे शामिल करना एक विशद्धु आनन्द का विषय है जा,े शीघ्र या क्रमिक रूप से, आध्यात्मिक संवदेनाआंे को स्पंदित करने की दिशा मंे ले जाते हों। आस्थावान व्यक्ति के हृदय मंे जितनी ही प्रखर लौ प्रज्ज्वलित की जाएगी उसकी उष्मा के संसर्ग मंे आने वाले लागेों द्वारा महसूस की जाने वाली आकर्षण की शक्ति भी उतनी ही प्रबल होगी। और जो हृदय बहाउल्लाह के प्रमे से अनुप्राणित है उसके लिए एसेे आत्मीय चतेना-सम्पन्न लोगांे की तलाश, सेवा के पथ पर अग्रसर होने पर उन्हे ंप्रात्ेसाहित करने, जब व ेअनुभव प्राप्त कर ले ंता ेउनका साथ निभाने और--संभवतः सबसे ज्यादा आनन्द का विषय--उन लागेां ेका े प्रभुधर्म मे ंपुष्ट होते, स्वतंत्र रूप से सेवा के लिए उठ खड़ ेहोते और उस समान यात्रा मंे अन्य लागेां ेकी सहायता करते हुए देखने से ज्यादा उपयुक्त किस कार्य की कल्पना की जा सकती है! इस क्षणभंगुर जीवन मंे ये ही सबसे ज्यादा अभिलषित क्षण हैं।

बाब के जन्मात्ेसव की द्विशताब्दी पास आने के कारण इस आध्यात्मिक उद्यम का ेआगे बढ़ाने के परिप्रेक्ष्य और भी अधिक रोचक बन गए हैं। इससे पहले वाली द्विशताब्दी की तरह ही, यह वार्षिकात्ेसव भी एक अपरिमित रूप से मल्ूयवान अवसर है। यह सभी बहाईयांे का ेअपने आस-पास के लागेों का े’ईश्वर के महान दिवस’ के प्रति, ’दिव्य अस्तित्व’ के दा ेप्रकटावतारो,ं विश्व के क्षितिज का ेदीप्तिमान बनाने वाले एक के बाद एक आने वाले दा े’प्रखर नक्षत्रांे’, द्वारा संकेतित स्वर्गिक कृपा के असाधारण प्रवाह के प्रति, जागरूक करने के लिए विलक्षण अवसर उपलब्ध कराता है। दा ेवर्ष पूर्व मनाए गए द्विशताब्दी समारोह के अनुभवांे के कारण, आने वाले दा ेचक्रो ंमें क्या कुछ संभव हो सकता है उसका परिमाप सबको ज्ञात है, और उस अवसर पर जो कुछ भी सीखा-समझा गया उन सबका ेइस वर्ष मनाए जाने वाले ’युगल पावन जन्मात्ेसवांे’ के लिए सुनियोजित किया जाना चाहिए। अब जबकि दा ेसौवें वर्ष का वार्षिकात्ेसव निकट आ रहा है, हम आपकी ओर से ’पवित्र समाधियांे’ पर निरन्तर वन्दना करेगं,े और यह प्रार्थना करेगं ेकि बाब का े समुचित सम्मान देने के लिए आपके द्वारा किए जाने वाले प्रयास ’उनके’ द्वारा पूर्वघाेिषत धर्म को और आग े बढ़ाने मंे सफल हो।ं

रचनात्मक युग की प्रथम शताब्दी के समापन मंे अब सिर्फ ढाई वर्ष रह गए हैं। इसके साथ ही, प्रभुधर्म के शौर्य काल के दौरान अत्यंत त्याग की भावना से रखी गई प्रभुधर्म की बुनियाद को सुदृढ़ करने और उसके विस्तार के लिए किए गए पावन प्रयासांे के सौ वर्षांे की परिसमाप्ति हो जाएगी। उसी समय बहाई समुदाय अब्दुल-बहा के स्वर्गाराहेण की शताब्दी भी मनाएगा--उस क्षण की शताब्दी जब प्रिय मास्टर स्वर्गिक महिमा की आश्रय-स्थली में ‘अपने पिता’ से पुनर्मिलन के लिए इस संसार की सीमाआंे से मुक्त हो गए थे। अगले ही दिन सम्पन्न हुई उनकी शव-यात्रा एक ऐसी घटना थी “जैसी फिलिस्तीन ने पहले कभी नहीं देखी थी।“ इसकी समाप्ति पर, उनके पार्थिव अवशष्ेाांे का ेबाब की समाधि के एक प्रकोष्ठ मंे चिर-विश्रान्ति के लिए रख दिया गया था। लेकिन शागेी एफन्ेदी की परिकल्पना यह थी कि यह एक अस्थायी व्यवस्था होगी। उपयुक्त समय आने पर, एक एसेी समाधि का निर्माण किया जाना था जिसकी विशष्ेाता अब्दुल-बहा के अद्वितीय पद के सुयाग्ेय हा।े

अब वह समय आ गया है। बहाई विश्व का आह्वान किया जाता है कि वह एक एसेे भवन का निर्माण करे जहां सदा-सदा के लिए उन अवशष्ेाांे का ेस्थापित किया जा सके। उसका निर्माण रिज़वान के उद्यान के निकट होना है उस भूिम पर जा े’आशीर्वादित सौन्दर्य’ के चरण-चिह्नो ंसे पावन हुई है; इस तरह अब्दुल-बहा की समाधि अक्का और हाइफा की पवित्र समाधियांे के बीच के अर्द्ध-चद्रंाकार से दिखते स्थान मंे अवस्थित हागेी। भवनशिल्प की याजेनाआंे पर काम आगे बढ़ रहा है, और आने वाले महीनों मंे और अधिक सचूनाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।

और अब जब हम आने वाले वर्ष और उसकी संभावनाआंे पर ध्यान केन्द्रित करते हैं ता ेहमारे मन मे ं अत्यधिक हर्ष की भावना उमड़ उठती है। आप में से प्रत्यके व्यक्ति से--उन सबसे जा ेबहाउल्लाह की सेवा मंे जुटे हुए हं,ै जा ेहर राष्ट्र मंे शांित के ध्येय के लिए प्रयासरत हैं--हम आशा करते हैं कि आप अपने महान दायित्व को पूरा करेगं।े

 

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