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विश्व न्याय मंदिर

रिज़वान 2020

विश्व के बहाईयों के लिए

परम प्रिय मित्रों,

दो उभरती ई स ाइय न े हम आपको इन श द से सबं ोिधत करने के िलए ेिरत िकया ह।ै पहली स ाई ह ै कोरोना वायरस महामारी ारा संवािहत चुनौतीपूण एवं भयावह खतर के बारे म दिु नया भर म बढ़ती ई जाग कता। अनेक दशे म, इस आपदा की रोकथाम के िलए साहस एवं दढ़ृ संक प भरे सामूिहक यास के बावजूद, ि थित पहले ही गंभीर हो चकु ी है और पिरवार एवं ि य के िलए दखु की रचना करती ई सभी समाज को संकट म डुबोए जा रही है। एक के बाद एक, कई जगह से दखु और क की लहर उमड़ती चली आ रही ह जो िविभ समय म, िविभ तरीक स,े िविभ रा को जजर बनाकर रख दगी।

दसू री स ाई -- जो िक िदन- ितिदन यादा से यादा प होती जा रही ह ै -- वह ह ै एक ऐसे चुनौती भरे समय म, िजसके समान हमारे जीते जी हमारी मृित म शायद ही कभी सामने आया था, बहाई िव की लोचपूणता और उसकी अथक शि । आपका यु र अ भुत रहा ह।ै एक महीने पहले जब हमन े नौ ज़ के समय आपको प िलखा था तो हम उन भावपूण िवशेषता को रेखािं कत करने के िलए उ सुक थ े िजनकी झलक उन समुदाय ारा िदखाई जा रही थी िजनके कायकलाप का सामा य ताना-बाना व त हो चुका था। बीच के स ाह म, जबिक अनेक िम को िनत स त से स त ितबंध का अनुपालन करना पड़ा, जो कुछ भी प प से दिृ गोचर आ ह ै उससे हमारी शंसा की भावना और अिधक गहरी ई ह।ै दिु नया के अ य िह स म ा िकए गए अनुभव से सबक सीखते ए, कुछ समुदाय ने अपने-अपने जनसं या े के दायरे म लोक वा य से जुड़ी आव यक बात के बारे म जाग कता उ प करने के सुरि त एवं रचना मक तरीके खोजे ह। उन लोग पर िवशेष यान िदया जा रहा ह ै जो वायरस और उसके सं मण से उ प आिथक मसु ीबत से सबसे यादा जोिखम म ह। इस िसलिसले म बहाई व ड यूज़ सिवस पर िजन यास की झलक िदखाई गई ह ै वे इसी तरह से जारी अ य अनिगनत यास के चंद उदाहरण मा ह। इन उप म के साथ-साथ, इस समय िजन आ याि मक गुण की िनता त आव यकता ह ै उ ह परखने, ो सािहत करने और उनके िवकास के िलए भी अनेक यास िकए जा रह े ह। अिनवायतया, ऐसे अनेक यास अकेले म या पिरवार की इकाई म िकए जा रह े ह, लेिकन जहां भी ि थितया ं अनुकूल ह अथवा संचार के साधन के कारण ऐसा करना संभव ह,ै वहां इन समान पिरि थितय को भोग रह े ि य के बीच सि यता के साथ असाधारण एकता की भावना का संचार िकया जा रहा ह।ै सामूिहक गित के िलए अ यंत मह वपूण, सामुदाियक जीवन की ग या मकता को दबाया नह जा सकेगा।

यह दखे कर हमारी चेतना उड़ान भरती ह ै िक ’ काश की सेना’ के इन अद य सने ानायक , हमारी रा ीय आ याि मक सभा , ने िकतनी स मता के साथ अपने समुदाय को मागदशन और इस संकट के ित उनकी िति या को िदशाबोध िदया ह।ै इस काय म उ ह सलाहकार और उनके सहायक से सुदढ़ृ सहायता ा ई ह ै िज ह ने सदा की तरह ेमपणू सेवा की वजा को वीरतापूवक ऊंचा उठाए रखा ह।ै अपने-अपने दशे म अ सर तेजी से बदलते ए हालात की अ छी तरह जानकारी रखते ए, आ याि मक सभा ने भुधम के मामल के शासन के िलए, और जहां भी संभव हो सका है वहां खास तौर पर चुनाव के संचालन के िलए, आव यक बंध िकए ह। िनयिमत संवाद के मा यम से सं था और एजिे सय ने िववेकपूण परामश तुत िकए ह, िदलासा भरे आ ासन और सतत ो साहन िदए ह। कई मामल म, उ ह ने भी अपने समाज म चिलत पिरसंवाद स े उभरते ए रचना मक िवषय की पहचान शु की ह।ै अपने नौ ज़ संदशे म हमने जो उ मीद जािहर की थी िक मानवजाित की सहनशीलता की यह परी ा उसे यादा गहन अंतदिृ स े स प बनाएगी, वह अब साकार प लेने लगी ह।ै अ णी लोग, मुख िवचारक और ा याकार अब उन बुिनयादी संक पना और मुखर अिभलाषा की टोह लेने लगे ह जो हाल के िदन म लोग के पिरसंवाद से िब कुल गायब थ । िफलहाल, ये तो बस कुछ शु आती िझलिमलाहट ह, िकतु िफर भी उनम यह संभावना िनिहत ह ै िक सामूिहक जागृित का एक दौर सामने आएगा।

बहाई जगत ारा ि या मक प से झलकाई गई लोचपूणता को दखे कर हम जो तस ली िमल रही ह ै उसके साथ ही मानवजाित के िलए इस महामारी के पिरणाम स े हम िथत ह। अफ़सोस, हम जानते ह िक बहाई धमानुयायी और उनसे जुड़े लोग भी इस क के साझेदार ह। लोग के वा य की आव यकता के म ेनज़र आज दिु नया के अनेक लोग अपने दो त और सगे-स बंिधय स े जो दरू ी और अलगाव बनाए ए ह, वह, कुछ लोग के िलए, सदा-सदा के िलए अलगाव बनकर रह जाएगा। हर सुबह यह बात प ी लगती ह ैिक सूय ढलन े स े पहले न जान े और िकतनी यातनाएं झेलनी ह गी। अन त लोक म पुनिमलन का वादा उन लोग को सां वना दान करे जो अपने ि यजन को खो देते ह। हम उनके दय की सां वना के िलए ाथना करते ह और याचना करत े ह िक परमा मा की क णा उन सबको आ छािदत करे िजनकी िश ा, आजीिवका, घर-बार, और यहां तक िक उनके जीिवत रहने के मूल साधन ही आज खतरे म पड़ गए ह। आपके िलए, आपके ि यजन , और आपके सम त दशे वािसय के िलए, हम बहाउ लाह स े िवन ाथना करते ह और उनके आशीवाद और उनकी कृपा के िलए िवनती करते ह।

वह पथ िजसपर हम चलना ह ै वह चाह े िकतना ही ल बा और किठन य न हो, हम इस या ा को परू ा करने म आपके पौ ष और दढ़ृ संक प पर परम िव ास ह।ै दसू र की ज रत को अपनी ज रत से यादा मह व दते े ए, वंिचत लोग को आ याि मक पोषण दान करत े ए, जो लोग उ र के िलए सतत यासे ह उ ह संतुि दते े ए, और िजनके मन म िव को बेहतर बनाने के िलए काय करने की ललक ह ै उ ह उसके साधन उपल ध करात े ए, आप आशा, िन ा और उदारता के भंडार स े ेरणा हण कर। ’आशीवािदत पूणता’ के समिपत अनुयाियय से हम इससे कम की आशा कैस े कर सकते ह?

 

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